नई दिल्ली/जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को बड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि राज्य के स्कूलों में राजस्थानी भाषा की पढ़ाई शुरू की जाए और भविष्य में इसे शिक्षा का माध्यम बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जाएं। अदालत ने साफ कहा कि मातृभाषा में शिक्षा बच्चों का अधिकार है और राजस्थानी भाषा की लगातार उपेक्षा उचित नहीं है।
रीट परीक्षा मामले में आया बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में शामिल नहीं किए जाने को चुनौती दी गई थी। इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को सही माना था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को पलट दिया।
स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से लागू होगी राजस्थानी
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि राज्य सरकार राजस्थानी भाषा को बढ़ावा देने के लिए व्यापक नीति तैयार करे।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि:
प्राथमिक स्तर पर राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में पढ़ाया जाए
धीरे-धीरे इसे उच्च कक्षाओं तक बढ़ाया जाए
भविष्य में इसे शिक्षा का माध्यम बनाने पर भी काम किया जाए
“मातृभाषा में शिक्षा बच्चों का अधिकार”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा मिलनी चाहिए। अदालत ने माना कि स्कूली शिक्षा में राजस्थानी भाषा की उपेक्षा गलत है। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य के कई विश्वविद्यालयों में पहले से राजस्थानी भाषा पढ़ाई जा रही है, ऐसे में स्कूल स्तर पर इसे लागू करने में हिचक नहीं होनी चाहिए।
राज्य सरकार की दलील कोर्ट ने खारिज की
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने कहा था कि शिक्षा केवल संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में ही दी जा सकती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि किसी भाषा को शिक्षा में शामिल करने के लिए उसका आठवीं अनुसूची में होना जरूरी नहीं है।
याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं पदम सिंह और कल्याण सिंह शेखावत की ओर से कहा गया कि: राजस्थान विधानसभा दो दशक पहले ही राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता देने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है 2011 की जनगणना के अनुसार 4.36 करोड़ से ज्यादा लोग राजस्थानी बोलते हैं इसके बावजूद REET परीक्षा में इसे शामिल नहीं किया गया
याचिका में इसे स्थानीय अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव बताया गया था।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का भी दिया गया हवाला
याचिका में कहा गया कि:
संविधान के अनुच्छेद 350A
शिक्षा का अधिकार कानून
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
सभी बच्चों को मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा देने पर जोर देते हैं।