देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड से लेकर दिल्ली-एनसीआर और आसपास के कई इलाकों तक मंगलवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के चमोली जिले में जमीन की सतह से करीब 13 किलोमीटर नीचे बताया गया है।भूकंप के झटके उत्तराखंड के गढ़वाल से लेकर कुमाऊं क्षेत्र तक कई जिलों में महसूस हुए। रात करीब 10:24 बजे कई इलाकों में लोगों को धरती हिलने का अहसास हुआ।
उत्तराखंड के कई जिलों में महसूस हुए झटके
भूकंप का असर उत्तराखंड के कई हिस्सों में महसूस किया गया। जानकारी के अनुसार बागेश्वर, भीमताल, पिथौरागढ़, चंपावत, हल्द्वानी, खटीमा, रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश, गोपेश्वर, चमोली और बदरीनाथ में लोगों ने झटके महसूस किए।चमोली में भूकंप का केंद्र होने के कारण आसपास के क्षेत्रों में इसका प्रभाव अधिक महसूस किया गया।
दिल्ली-NCR और मुरादाबाद तक हिली धरती
भूकंप के झटके उत्तराखंड से बाहर भी महसूस किए गए। दिल्ली-एनसीआर के साथ मुरादाबाद में भी लोगों ने धरती हिलने का अनुभव किया।मुरादाबाद में झटके महसूस होने के बाद कई लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों पर पहुंच गए। कुछ समय तक इलाकों में लोग भूकंप को लेकर चर्चा करते रहे।
नोएडा में कुछ सेकेंड तक महसूस हुआ कंपन
नोएडा के कई इलाकों में भी मंगलवार रात करीब 10:30 बजे लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए। कंपन कुछ सेकेंड तक रहा।
आखिर क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है। ये प्लेटें लगातार गति करती रहती हैं। जहां प्लेटों की हलचल और टकराव ज्यादा होता है, वहां भूगर्भीय तनाव बढ़ सकता है।जब चट्टानों और प्लेटों पर जमा दबाव अचानक मुक्त होता है, तो ऊर्जा तरंगों के रूप में बाहर निकलती है। इसी ऊर्जा के कारण धरती में कंपन पैदा होता है, जिसे हम भूकंप के झटके के रूप में महसूस करते हैं।
भूकंप का केंद्र और तीव्रता क्या होती है?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहा जाता है, जहां से भूकंपीय गतिविधि का प्रभाव सतह पर प्रमुख रूप से महसूस होता है। इसके नीचे पृथ्वी के भीतर जिस स्थान से ऊर्जा मुक्त होती है, उसे भूकंप का उद्गम केंद्र माना जाता है।केंद्र से दूरी बढ़ने के साथ आम तौर पर कंपन का प्रभाव कम होता जाता है। हालांकि इसका असर भूकंप की तीव्रता, गहराई और स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।
रिक्टर स्केल से कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?
भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। इस पैमाने पर भूकंप की तीव्रता उसके द्वारा उत्पन्न भूकंपीय ऊर्जा के आधार पर बताई जाती है।भूकंप की तीव्रता बढ़ने के साथ उससे निकलने वाली ऊर्जा भी बढ़ती है। भूकंप के प्रभाव का वास्तविक स्तर केवल एक संख्या से तय नहीं होता, बल्कि उसकी गहराई, केंद्र से दूरी और स्थानीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।