फाल्गुन मास 2 फरवरी 2026 से आरंभ हो चुका है और हिंदू पंचांग के अनुसार यह महीना शिव–शक्ति साधना का सर्वोत्तम काल माना जाता है। इस मास में जप, तप, दान, व्रत, पूजा और विविध अनुष्ठान अत्यंत फलदायी होते हैं। मान्यता है कि फाल्गुन में किए गए शुभ कर्म साधक की इच्छाओं को सिद्ध करते हुए जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि बढ़ाते हैं। महाशिवरात्रि, एकादशी, होलाष्टक और होली जैसे प्रमुख पर्व इसी महीने में पड़ने से इसका महत्त्व और अधिक बढ़ जाता है। इस वर्ष विशेष योग यह है कि इसी माह में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों का संयोग बन रहा है, जिससे खगोलीय दृष्टि से फाल्गुन का महत्व और प्रबल हो गया है।
महाशिवरात्रि 2026: रात्रि तप, उपवास और शिव एकत्व की रात्रि
इस वर्ष महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि में 15 फरवरी को मनाई जाएगी। तिथि का आरंभ 15 फरवरी को शाम 5:04 पर और समापन 16 फरवरी को शाम 5:34 पर हो रहा है। महाशिवरात्रि की रात्रि को चार प्रहरों में होने वाली पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है, क्योंकि यह रात शिव और शक्ति के संयोग, सृष्टि की स्थिरता और आत्म-चेतना की दिव्यता का सर्वोत्तम क्षण माना जाता है। साधक इस रात ध्यान, जप और रुद्राभिषेक के माध्यम से शिवतत्व के समीप पहुंचते हैं और मन–बुद्धि–चेतना की शुद्धि का अनुभव करते हैं।
फाल्गुन में लगने वाला सूर्य ग्रहण: खगोलीय परिप्रेक्ष्य और धार्मिक प्रभाव
फाल्गुन अमावस्या के दिन 17 फरवरी 2026 को सूर्य ग्रहण लगने वाला है, जिसकी अवधि शाम 5:26 से 7:57 तक रहेगी। कुल 2 घंटे 31 मिनट का यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, अतः आम नियमों के अनुरूप सूतक मान्य नहीं माना जाएगा। बावजूद इसके, ग्रहण के समय प्रकृति में होने वाले ऊर्जा-परिवर्तन और खगोलीय हलचल को ध्यान में रखते हुए इसे एक महत्त्वपूर्ण खगोलीय घटना के रूप में देखा जा रहा है।
चंद्र ग्रहण 2026: सूतक काल और दर्शनीय स्थिति
फाल्गुन मास की ही अवधि में 3 मार्च 2026 को एक आंशिक (खण्डग्रास) चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है जिसे भारत में देखा जा सकेगा। ग्रहण का समय शाम 6:26 से 6:46 तक रहेगा, यानी यह केवल 20 मिनट का अल्पकालिक ग्रहण होगा। इसके सूतक काल की शुरुआत सुबह 9:39 से हो जाएगी और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में पूजा–अर्चना, भोजन और शुभ कार्यों के नियमों का पालन किया जाता है। चंद्र ग्रहण सदैव मन और भावनाओं से जुड़े ग्रहण माने जाते हैं, इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव श्रेष्ठ ध्यान और आत्मनिरीक्षण के लिए शुभ माना गया है।
फाल्गुन: आनंद, उत्सव और रंगों की ओर बढ़ता अंतिम चरण
फाल्गुन माह की सजीवता का अंतिम चरण होलाष्टक और फिर होली के रंगों में खिलता है। यह महीना जीवन को सरल, आनंदमय और उत्सवपूर्ण बनाने का संदेश देता है। महाशिवरात्रि की साधना, ग्रहणों का खगोलीय अध्ययन और होली का उल्लास—सब मिलकर फाल्गुन को आध्यात्मिकता, विज्ञान और संस्कृति का अद्भुत संगम बना देते हैं। यह माह हमें बताता है कि जब ऋतु परिवर्तित होती है तो मन भी नयापन चाहता है और जीवन भी नई ऊर्जा से भर उठता है।
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