कोलकाता: कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में खेले गए ऐतिहासिक कोलकाता डर्बी और आईएफए शील्ड के हाई-वोल्टेज फाइनल मुकाबले में मोहन बागान ने अपने चिरप्रतिद्वंद्वी ईस्ट बंगाल को हराकर लगातार दूसरी बार आईएफए शील्ड का खिताब अपने नाम कर लिया है। नॉर्थ-ईस्ट यूनाइटेड के खिलाफ सेमीफाइनल में 7-2 की एकतरफा जीत दर्ज करने के बाद ईस्ट बंगाल के खेमे में जो अति-आत्मविश्वास (ओवरकॉन्फिडेंस) देखा जा रहा था, वही अंततः फाइनल में उनकी हार का मुख्य कारण बना। ईस्ट बंगाल के प्रशंसकों में इस शर्मनाक हार के बाद भारी निराशा है और कोच एंटोनियो लोपेज हबास की रणनीतियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्टार खिलाड़ियों को बेंच पर बिठाना कोच हबास को पड़ा भारी
सेमीफाइनल मैच में गोलों की बौछार करने वाले और पिछली डर्बी में हैट्रिक लगाने वाले इन-फॉर्म स्ट्राइकर डेविड लालसांगहा को शुरुआती एकादश में मौका न देना हबास की सबसे बड़ी गलती मानी जा रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय टीम से लौटने का हवाला देते हुए प्रमुख डिफेंडर अनवर अली को भी शुरुआती 11 से बाहर रखा गया। हबास ने पिछले मैच के हीरो रहे एडमंड लालरिंदिका पर भरोसा जताया, लेकिन वे पूरे मैच में अपनी छाप छोड़ने में पूरी तरह नाकाम रहे।
ईस्ट बंगाल का रक्षापंक्ति और मिडफील्ड पूरी तरह फ्लॉप
मैच के दौरान ईस्ट बंगाल की पूरी टीम में तालमेल और प्रतिबद्धता की कमी साफ देखने को मिली। मोहम्मद रशीद, रामिरेज़, बिपिन और जिक्सन जैसे अनुभवी खिलाड़ी एक साथ फ्लॉप साबित हुए। स्टार डिफेंडर अनवर अली की गैरमौजूदगी में ईस्ट बंगाल का डिफेंस ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। हार्दिक और चुंगनुंगा मोहन बागान के आक्रमणकारियों को रोकने में पूरी तरह असफल रहे। पूरी मैच के दौरान ईस्ट बंगाल का मिडफील्ड भी मैच पर अपनी पकड़ नहीं बना सका।
गोलकीपर लाचेनपा ने बचाई ईस्ट बंगाल की साख
अगर इस फाइनल मुकाबले में ईस्ट बंगाल की हार का अंतर बड़ा नहीं हुआ, तो उसकी एकमात्र वजह गोलकीपर लाचेनपा का शानदार प्रदर्शन रहा। मोहन बागान के लगातार हमलों के बीच लाचेनपा ने कई बेहतरीन और गोल-रक्षक बचाव (Saves) किए। पूरी तरह से निराशाजनक रहे इस मैच में लाचेनपा ही ईस्ट बंगाल के प्रशंसकों के लिए उम्मीद की एकमात्र किरण बनकर उभरे।
कोच दिलामपेरिस का मास्टरस्ट्रोक और मोहन बागान की संगठित रणनीति
डूरंड कप के फाइनल में मिली हार से सबक लेते हुए मोहन बागान की टीम इस मुकाबले में अधिक केंद्रित और आक्रामक नजर आई। मोहन बागान के कोच पनागियोटिस दिलामपेरिस ने सुभाशीष बोस को बेंच पर बिठाकर अभिषेक सेकचाम को मौका दिया, जो मैच का मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। अभिषेक ने अकेले ईस्ट बंगाल के हमलों को नाकाम किया, जिससे समीर ज़ेलकोविच और मिडफील्ड का आत्मविश्वास बढ़ा। मोहन बागान ने पूरी तरह से मिडफील्ड पर अपना कब्जा बनाए रखा और अंततः खिताब जीतकर डूरंड कप की हार का बदला चुकता किया।
मुख्य बातें
- IFA शील्ड चैंपियन: मोहन बागान ने फाइनल मुकाबले में ईस्ट बंगाल को हराकर लगातार दूसरी बार आईएफए शील्ड ट्रॉफी जीती।
- कोच हबास के फैसले पर सवाल: सेमीफाइनल में 7-2 से जीत दिलाने वाले डेविड लालसांगहा और स्टार डिफेंडर अनवर अली को बेंच पर बिठाने का फैसला गलत साबित हुआ।
- मिडफील्ड और डिफेंस फेल: ईस्ट बंगाल की ओर से रशीद, रामिरेज़, बिपिन और जिक्सन समेत पूरा मध्यक्रम और रक्षापंक्ति बुरी तरह फ्लॉप रही।
- लाचेनपा का शानदार प्रदर्शन: ईस्ट बंगाल के गोलकीपर लाचेनपा ने कई शानदार बचाव करके टीम को बड़े अंतर से हारने से बचा लिया।
- मोहन बागान का मास्टरस्ट्रोक: कोच दिलामपेरिस द्वारा अभिषेक सेकचाम को मैदान पर उतारने की रणनीति सफल रही, जिससे डिफेंस मजबूत हुआ और मिडफील्ड ने मैच पर नियंत्रण बनाया।
- डूरंड कप की हार का बदला: डूरंड कप के फाइनल में ईस्ट बंगाल से मिली हार से सीख लेते हुए मोहन बागान ने अधिक केंद्रित और अनुशासित खेल का प्रदर्शन किया।