नई दिल्ली - भारतीय क्रिकेट टीम के युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल ने टेस्ट क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी से मजबूत पहचान बनाई है। हालांकि, सीमित ओवरों के प्रारूप में उन्हें अभी नियमित मौके नहीं मिल पाए हैं। वनडे टीम में शामिल होने के बावजूद प्लेइंग इलेवन में जगह बनाना उनके लिए चुनौती बना हुआ है। इसी बीच खबर है कि जायसवाल अपने खेल में एक और कौशल जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनके विकेटकीपिंग सीखने की जानकारी सामने आने के बाद क्रिकेट जगत में चर्चा शुरू हो गई है।

मुंबई के कप्तान सिद्धेश लाड ने किया खुलासा
रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन शुरू होने से पहले मुंबई के कप्तान सिद्धेश लाड ने बताया कि यशस्वी जायसवाल अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वह विकेटकीपिंग का अभ्यास भी कर रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर टीम को अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध करा सकें।
हालांकि, विकेटकीपिंग सीखने का मतलब यह नहीं है कि भारतीय टीम में उनकी भूमिका बदलने वाली है या उन्हें इसी आधार पर सीमित ओवरों की टीम में जगह मिल जाएगी। फिलहाल इसे उनके कौशल विकास की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
वसीम जाफर ने जताई असहमति
भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर को जायसवाल का विकेटकीपिंग सीखना खास पसंद नहीं आया। जाफर का मानना है कि युवा बल्लेबाज को अपनी बल्लेबाजी पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, विकेटकीपिंग एक ऐसी कला है जिसमें नियमित अभ्यास, तकनीक और काफी मेहनत की जरूरत होती है।
जाफर ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस कदम को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने इसे व्हाइट बॉल क्रिकेट में जगह बनाने की बेचैनी से जुड़ी कोशिश के तौर पर देखा। हालांकि, उनके विचार व्यक्तिगत आकलन हैं और जायसवाल के इस फैसले के पीछे की पूरी वजह को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
विकेटकीपिंग आसान नहीं, लगातार अभ्यास जरूरी
विकेटकीपिंग केवल दस्ताने पहनकर गेंद पकड़ने तक सीमित नहीं है। इसके लिए तेज प्रतिक्रिया, फुटवर्क, सही पोजिशनिंग और लगातार एकाग्रता की जरूरत होती है। तेज गेंदबाजों के साथ-साथ स्पिनरों के खिलाफ भी विकेटकीपर को अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी तकनीक का इस्तेमाल करना पड़ता है।
ऐसे में किसी विशेषज्ञ बल्लेबाज के लिए विकेटकीपिंग सीखना अतिरिक्त मेहनत मांगता है। जाफर की सलाह का मुख्य जोर यही है कि जायसवाल को अपनी बल्लेबाजी की ताकत बनाए रखते हुए ही दूसरे कौशल पर काम करना चाहिए।
क्या जायसवाल को मिलेगा व्हाइट बॉल क्रिकेट में मौका?
यशस्वी जायसवाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमित ओवरों के प्रारूप में लगातार अच्छा प्रदर्शन करके चयनकर्ताओं का भरोसा हासिल करना है। टेस्ट क्रिकेट में स्थापित होने के बाद अब वह वनडे और टी20 में भी नियमित भूमिका चाहते होंगे, लेकिन टीम में जगह प्रदर्शन, संयोजन और चयनकर्ताओं की रणनीति पर निर्भर करती है।
विकेटकीपिंग सीखने से उनकी बहुमुखी प्रतिभा विकसित हो सकती है, लेकिन इससे टीम इंडिया में जगह मिलने की गारंटी नहीं है। अब देखना होगा कि जायसवाल इस नए कौशल पर कितना काम करते हैं और क्या वह वसीम जाफर की सलाह के मुताबिक अपना मुख्य ध्यान बल्लेबाजी पर ही रखते हैं।