आर्कटिक क्षेत्र में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और समुद्री बर्फ रिकॉर्ड गति से पिघल रही है। ध्रुवीय भालुओं के लिए यह स्थिति सबसे बड़ा खतरा मानी जा रही है क्योंकि वे शिकार करने और घूमने के लिए समुद्री बर्फ पर निर्भर रहते हैं। जब बर्फ घटती है, तो आमतौर पर भालू पतले होने लगते हैं और पुनरुत्पादन क्षमता पर असर पड़ता है। यही कारण है कि वैज्ञानिकों के लिए आर्कटिक की 20 अलग–अलग जनसंख्याओं में बर्फ का स्तर एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
बारेंट्स सागर में बर्फ का सबसे तेज़ क्षरण
उत्तरी ध्रुव से लगभग 800 मील दूर स्थित नॉर्वे का स्वालबार्ड द्वीप बारेंट्स सागर में आता है, जहाँ समुद्री बर्फ सबसे तेज़ी से घट रही है। पिछले कुछ दशकों में यहाँ बर्फ की अवधि लगभग 100 दिनों तक कम हो चुकी है। वैज्ञानिकों का मानना था कि इस क्षेत्र के भालुओं का वजन सबसे पहले गिरना चाहिए, लेकिन पाया गया कि वे पहले से भी अधिक मोटे हो रहे हैं।
अध्ययन में चौंकाने वाले परिणाम
नॉर्वेजियन पोलर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता जॉन आर्स और उनकी टीम ने 1995 से 2019 तक 770 वयस्क ध्रुवीय भालुओं का अध्ययन किया। परिणाम बेहद अप्रत्याशित थे। समुद्री बर्फ में भारी कमी के बावजूद ध्रुवीय भालुओं का औसत वसा स्तर समय के साथ बढ़ा। इसका संकेत है कि भालू अपने आहार और शिकार के व्यवहार में बदलाव ला रहे हैं और नई परिस्थितियों के अनुकूल हो रहे हैं।
भालुओं के वजन बढ़ने के संभावित कारण
वैज्ञानिकों का मानना है कि स्वालबार्ड के भालू नए–नए शिकार स्रोतों की ओर बढ़ रहे हैं। रेनडियर (हिरन) जैसे स्थलीय शिकार और हार्बर सील जैसे समुद्री जीव नए और गर्म होते वातावरण में अच्छी तरह फल–फूल रहे हैं। इससे भालुओं को बर्फ कम होने के बावजूद पर्याप्त भोजन मिलने लगा है। यह अनुकूलन उन्हें अब तक संकट से बचाए हुए है।
भविष्य के लिए चेतावनी का संकेत
हालाँकि अभी भालू स्वस्थ दिख रहे हैं, पर वैज्ञानिक इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं मानते। यदि समुद्री बर्फ इसी गति से घटती रही, तो एक समय ऐसा आ सकता है जब शिकार के विकल्प भी सीमित हो जाएंगे और भालुओं की स्थिति फिर तेजी से बिगड़ सकती है। जॉन आर्स के अनुसार, “अभी भालू ठीक हैं, लेकिन आगे एक सीमा अवश्य आएगी जहाँ परिस्थितियाँ उनके लिए असहनीय हो जाएँगी।”
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