टोक्यो. दुनिया अल नीनो के जबरदस्त असर को देख रही है। यह एक ऐसी समुद्री व मौसमी गतिविधि है जो पूरी दुनिया के मौसम चक्र को उलट-पुलट कर सकती है। स्पेनिश भाषा में अल नीनो का अर्थ छोटा लड़का होता है। सबसे पहले 1600 के दशक में दक्षिण अमेरिकी मछुआरों ने देखा कि समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है जिससे मछलियां गायब हो जाती हैं और भारी बारिश व तूफान आते हैं। यह स्थिति अक्सर क्रिसमस के आसपास बनती थी लेकिन अब बीते कुछ दशकों में इसका दायरा और समय काफी बढ़ गया है। आमतौर पर इसका असर दिसंबर में चरम पर होता है लेकिन इस बार यह समय से पहले ही खतरनाक रूप ले चुका है।
अटाकामा रेगिस्तान में फूलों की बहार
प्रशांत महासागर और एंडीज पर्वत श्रृंखला के बीच चिली में लगभग 1,600 किलोमीटर में फैला अटाकामा रेगिस्तान दुनिया के सबसे सूखे इलाकों में गिना जाता है। यहां सितंबर में हुई रिकॉर्ड बारिश के कारण लगभग 200 प्रजातियों के लाखों बैंगनी फूल खिल उठे। इस शानदार नजारे को देखने आए पर्यटकों द्वारा पोस्ट की गई तस्वीरों में धरती के सबसे सूखे रेगिस्तान में बैंगनी फूलों की चादर बिछी हुई दिखाई दी। चिली के अधिकारियों यानी कोनाफ के मुताबिक जुलाई और अगस्त के दौरान यहां 180 मिलीमीटर से भी ज्यादा बारिश दर्ज की गई जो 1950 में रिकॉर्ड रखने की शुरुआत के बाद से सबसे अधिक है। इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।
टोक्यो में टूटा 138 साल का रिकॉर्ड
टोक्यो में लगातार 35 दिनों तक बारिश हुई जिसने 1886 के बाद का सबसे लंबा रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले 2019 में 33 दिनों तक बारिश दर्ज की गई थी। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सितंबर महीने में यहां सामान्य से तीन गुना अधिक बारिश हुई। पूरे महीने में केवल 45.8 घंटे ही धूप देखने को मिली और 14 दिनों तक सूरज बिल्कुल नहीं निकला। इस स्थिति के कारण सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान हुआ और लोग हफ्तों धूप देखने को तरस गए। लगातार बारिश ने शहर की दिनचर्या को प्रभावित किया।
वैश्विक स्तर पर चरम मौसम के संकेत
विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी डब्ल्यूएमओ के अनुसार अल नीनो की वजह से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम में असामान्य और चरम बदलाव देखे गए हैं। जहां चिली के अटाकामा रेगिस्तान में फूल खिले वहीं जापान की राजधानी टोक्यो में लगातार 35 दिनों तक बारिश हुई। डब्ल्यूएमओ ने चेतावनी दी है कि इस साल अक्टूबर और दिसंबर के बीच दुनिया भर में समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने यह भी कहा कि अल नीनो 1950 के बाद से सबसे मजबूत अल नीनो में से एक है और यह फरवरी 2027 तक बना रहेगा।
भविष्य की चेतावनी और सतर्कता
अल नीनो के इस प्रभाव से वैश्विक मौसम प्रणाली में बड़े बदलाव की आशंका है। समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से तूफान भारी बारिश और सूखे जैसी घटनाएं और तीव्र हो सकती हैं। अटाकामा जैसे सूखे क्षेत्रों में अचानक बारिश से पर्यावरणीय बदलाव दिख रहे हैं। टोक्यो जैसे शहरों में लंबे समय तक बारिश से आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में सतर्कता बरतने की जरूरत है। मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां निरंतर निगरानी रख रही हैं ताकि संभावित आपदाओं से बचाव किया जा सके।