लखनऊ: उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में मेट्रो के दूसरे चरण की तैयारियां तेज हो गई हैं। चारबाग से बसंतकुंज के बीच बनने वाले इस मेट्रो रूट पर पांडेयगंज स्टेशन खास आकर्षण होगा। प्रस्तावित योजना के मुताबिक, यह स्टेशन जमीन से करीब 122 फीट यानी 37 मीटर नीचे बनाया जाएगा। इसके साथ ही यहां जगह की कमी के कारण मेट्रो ट्रेनों को समानांतर ट्रैक के बजाय अलग-अलग ऊंचाई पर चलाने की योजना है। इस पांच मंजिला भूमिगत स्टेशन के निर्माण पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
चारबाग-बसंतकुंज मेट्रो परियोजना से पुराने लखनऊ के कई इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की उम्मीद है। दूसरे चरण में कुल 12 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनाया जाना है, जिसमें सात भूमिगत और पांच एलिवेटेड स्टेशन प्रस्तावित हैं। पूरी परियोजना पर करीब 5,801 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
122 फीट नीचे बनेगा पांडेयगंज मेट्रो स्टेशन
लखनऊ के पांडेयगंज में प्रस्तावित भूमिगत मेट्रो स्टेशन अपनी गहराई के कारण चर्चा में है। योजना के अनुसार, स्टेशन जमीन से लगभग 37 मीटर यानी 122 फीट नीचे होगा। इतनी गहराई के कारण इसके निर्माण में विशेष इंजीनियरिंग तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत होगी।दिए गए परियोजना विवरण के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के नीचे बने मेट्रो स्टेशन की गहराई करीब 33 मीटर बताई गई है। ऐसे में पांडेयगंज स्टेशन की प्रस्तावित गहराई उससे भी अधिक होगी।
एक-दूसरे के ऊपर चलेंगी मेट्रो ट्रेनें
पांडेयगंज स्टेशन की एक खास बात यह भी होगी कि सीमित जगह के कारण दोनों दिशाओं में जाने वाली मेट्रो ट्रेनों के ट्रैक एक-दूसरे के ऊपर बनाए जाने की योजना है। सामान्य तौर पर मेट्रो ट्रैक समानांतर होते हैं, लेकिन इस स्टेशन पर जगह का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए अलग-अलग स्तरों पर ट्रेनों के संचालन की व्यवस्था प्रस्तावित है।
योजना के मुताबिक, स्टेशन के सबसे निचले स्तर पर एक ट्रैक होगा, जबकि दूसरा ट्रैक उससे ऊपर बनाया जाएगा। इससे सीमित जगह में भूमिगत स्टेशन का निर्माण संभव हो सकेगा। स्टेशन की पांच मंजिला संरचना यात्रियों की आवाजाही और मेट्रो संचालन को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी।
दिसंबर से शुरू हो सकता है निर्माण कार्य
चारबाग-बसंतकुंज मेट्रो रूट पर निर्माण से पहले मिट्टी की जांच की जा रही है। फिलहाल मूसाबाग क्षेत्र में मिट्टी परीक्षण का काम जारी है। इस प्रक्रिया में प्रस्तावित स्टेशनों और भूमिगत ढांचों के लिए जमीन की स्थिति का आंकलन किया जा रहा है।
परियोजना से जुड़े विवरण के अनुसार, मिट्टी परीक्षण में अभी करीब दो महीने और लग सकते हैं। इसके बाद दिसंबर से मेट्रो स्टेशनों का निर्माण शुरू होने की उम्मीद जताई गई है।
5,801 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा मेट्रो का दूसरा चरण
लखनऊ मेट्रो के दूसरे चरण पर कुल करीब 5,801 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना के लिए राज्य और केंद्र सरकार की ओर से लगभग 2,900 करोड़ रुपये दिए जाने की जानकारी है। शेष राशि ऋण के माध्यम से जुटाने की योजना है।मेट्रो प्रशासन की ओर से स्टेशनों और डिपो के निर्माण से जुड़े कई टेंडर जारी किए जाने की बात भी सामने आई है। इस चरण के पूरा होने से पुराने लखनऊ और शहर के अन्य इलाकों के बीच सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है।
लखनऊ मेट्रो का दूसरा चरण: एक नजर में
कुल लंबाई: करीब 12 किलोमीटर
कुल भूमिगत स्टेशन: 7
कुल एलिवेटेड स्टेशन: 5
पांडेयगंज स्टेशन की प्रस्तावित गहराई: 122 फीट यानी करीब 37 मीटर
पांडेयगंज स्टेशन की अनुमानित लागत: 400 करोड़ रुपये
पूरी परियोजना की अनुमानित लागत: 5,801 करोड़ रुपये
निर्माण पूरा करने का लक्ष्य: पांच वर्ष
ये सात स्टेशन होंगे भूमिगत
चारबाग से बसंतकुंज के बीच प्रस्तावित दूसरे चरण में सात भूमिगत स्टेशन बनाए जाने हैं। इनमें चारबाग, गौतमबुद्ध मार्ग, अमीनाबाद, पांडेयगंज, सिटी रेलवे स्टेशन, मेडिकल चौराहा और चौक शामिल हैं।
इन स्टेशनों से पुराने लखनऊ के प्रमुख बाजारों, रेलवे स्टेशन और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। भूमिगत स्टेशन होने के कारण व्यस्त शहरी इलाकों में सड़क पर उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल भी किया जा सकेगा।
पांच स्टेशन होंगे एलिवेटेड
इस रूट पर पांच एलिवेटेड स्टेशन भी प्रस्तावित हैं। इनमें ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज, मूसाबाग और बसंतकुंज शामिल हैं।परियोजना के लिए पांच वर्ष में काम पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है। निर्माण पूरा होने के बाद चारबाग से बसंतकुंज के बीच मेट्रो सेवा शुरू होने से लखनऊ के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को विस्तार मिलने की उम्मीद है।
पुराने लखनऊ की कनेक्टिविटी होगी बेहतर
मेट्रो के दूसरे चरण को लखनऊ के परिवहन नेटवर्क के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। नए भूमिगत और एलिवेटेड स्टेशन शहर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने में मदद कर सकते हैं। इससे यात्रियों को सड़क यातायात के विकल्प के रूप में मेट्रो की सुविधा मिलेगी।पांडेयगंज स्टेशन अपनी प्रस्तावित गहराई और अलग-अलग स्तरों पर ट्रैक की योजना के कारण इस परियोजना का प्रमुख हिस्सा होगा।