नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 अक्टूबर को वाराणसी दौरे में हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। नमो घाट पर विंग्स ऑफ गंगा की थीम पर एयर शो के आखिरी दिन वे मुख्य अतिथि रहेंगे। भारतीय वायु सेना के हवाई अभ्यास में राफेल तेजस सुखोई जैसे फाइटर जेट और सूर्य किरण-सारंग जैसे हेलीकॉप्टर करतब दिखाएंगे। वे रेलवे के डबल डेकर ब्रिज रोपवे और काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यक्रम का जायजा भी लेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेता आयोजन में शामिल होंगे।
डबल डेकर सिग्नेचर ब्रिज की विशेषताएं
वाराणसी में गंगा नदी पर नया सिग्नेचर रेल-सड़क डबल डेकर ब्रिज बन रहा है। 2642 करोड़ रुपये के खर्च का यह मेगा प्रोजेक्ट 139 साल पुराने मालवीय ब्रिज की जगह लेगा। इसके निचले हिस्से में 4 रेलवे ट्रैक बिछाए जाएंगे। यह भारत का पहला ऐसा पुल होगा जिसके एक डेक पर एक साथ 4 रेल लाइनें होंगी। ऊपरी हिस्से में 6 लेन की चौड़ी सड़क होगी जिस पर भारी और हल्के वाहन दौड़ेंगे। यह नया पुल काशी रेलवे स्टेशन के नजदीक मालवीय पुल से करीब 50 मीटर दूर बनाया जा रहा है जो एक किलोमीटर से भी लंबा है।
पुराने मालवीय ब्रिज की जगह नया पुल
अवध एवं रोहिलखंड रेलवे ने गंगा पर 1887 में मालवीय ब्रिज बनाया था जिसे डफरिन ब्रिज भी कहते हैं। पुराना पुल सिर्फ 2 रेल लाइन और 2 लेन रोड को संभालता है। लेकिन पुराने पुल पर ट्रेनों की रफ्तार बेहद धीमी रखने के साथ भारी वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी है। वाराणसी जंक्शन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के बीच गंगा नदी पर यह सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर में से एक है। नया पुल बनने से ट्रेनों के आउटर पर ठहरने से घंटों की देरी की परेशानी दूर हो जाएगी।
दिल्ली-हावड़ा रूट को मिलेगी रफ्तार
इस सिग्नेचर ब्रिज में ओपन वेब स्टील गर्डर तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। इससे यह पुल 150 साल तक नहीं हिलेगा। उत्तर रेलवे के लिए इस पुल को चार साल में पूरा किया जाएगा। यह पुल वाराणसी और चंदौली जिले को सीधे जोड़ेगा। जीटी रोड और नेशनल हाईवे का ट्रैफिक बिना शहर में प्रवेश किए सीधे बाहर से ही निकल जाएगा। नए रेल कॉरिडोर से दिल्ली-हावड़ा रूट को हाईस्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने से यात्रा समय घटेगा।
आर्थिक बचत और रोजगार के अवसर
इस नए रेल कॉरिडोर से सालाना लगभग 8 करोड़ लीटर डीजल बचेगा। सरकारी खजाने को कम से कम 638 करोड़ रुपये सालाना बचत होगी। निर्माण में लगभग 10 लाख मानव दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होगा। स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। परियोजना से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। रोजगार के नए अवसर युवाओं के लिए फायदेमंद साबित होंगे। दीर्घकालिक बचत से रेलवे को वित्तीय लाभ होगा।
पर्यटन और ट्रैफिक को राहत
काशी विश्वनाथ मंदिर नमो घाट और सारनाथ के श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों को जाम से राहत मिलेगी। शहर के अंदर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। गंगा पर नया पुल पर्यटन को बढ़ावा देगा। यातायात सुगम होने से तीर्थयात्रियों को सुविधा होगी। पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। विकास परियोजनाओं से वाराणसी की तस्वीर और निखरेगी। प्रधानमंत्री के दौरे से इन योजनाओं को नई गति मिलेगी।