कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और लोकसभा में पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर टीएमसी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की है। ये सांसद टीएमसी के चुनाव चिह्न पर जीतकर संसद पहुंचे थे, लेकिन बाद में एनसीपीआई (NCPI) में शामिल होने का ऐलान कर दिया।
19 जून को दायर हुई थीं अयोग्यता याचिकाएं
अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में बताया कि 19 जून 2026 को संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) और लोकसभा (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1985 के तहत इन 20 सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दायर की गई थीं। उनका दावा है कि इन सांसदों ने पार्टी छोड़कर एक ऐसे राजनीतिक संगठन का साथ दिया है, जिसकी संसद या किसी राज्य विधानसभा में मान्यता प्राप्त स्थिति नहीं है।
'पांच सप्ताह बाद भी नहीं हुई कोई सुनवाई'
पत्र में अभिषेक बनर्जी ने कहा कि याचिका दायर हुए पांच सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो कोई नोटिस जारी हुआ है और न ही सुनवाई की तारीख तय की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की देरी से संविधान की दसवीं अनुसूची का उद्देश्य प्रभावित होता है और दल-बदल विरोधी कानून की प्रभावशीलता कमजोर पड़ सकती है।
हर सांसद के मामले की अलग-अलग सुनवाई की मांग
टीएमसी नेता ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि सभी 20 मामलों की अलग-अलग सुनवाई कराई जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सांसद का मामला अलग तथ्यों और कानूनी परिस्थितियों से जुड़ा है, इसलिए सभी पक्षों और उनके कानूनी प्रतिनिधियों को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
सर्वदलीय बैठक का भी किया जिक्र
अभिषेक बनर्जी ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि जिन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं लंबित हैं, उन्हें 19 जुलाई को आयोजित सर्वदलीय बैठक में अलग समूह के रूप में आमंत्रित किया गया था। उनके अनुसार, यह स्थिति इस मामले के जल्द निपटारे की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है ताकि संसद की कार्यवाही और संवैधानिक व्यवस्था पर किसी तरह का सवाल न उठे।
स्पीकर से जल्द निर्णय लेने की अपील
पत्र के अंत में अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनुरोध किया कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए इन सभी याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई कर उचित आदेश पारित किए जाएं। फिलहाल इस मामले पर लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।