नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के दो गुटों के बीच चल रहे पार्टी चुनाव चिह्न विवाद को लेकर बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) से कहा है कि विरोधी गुट की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद तीन महीने के भीतर इस विवाद पर फैसला किया जाए। यह मामला पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और AITC नेता ममता बनर्जी की याचिका से जुड़ा है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विवाद का अंतिम फैसला आने तक पार्टी के चुनाव चिह्न को अंतरिम तौर पर फ्रीज किया गया था।
उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्न को लेकर विवाद
ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका में आने वाले उपचुनावों को लेकर पार्टी के चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाया गया था। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के बीच चल रहे विवाद को देखते हुए अंतिम निर्णय होने तक चुनाव चिह्न पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला किया था। इस वजह से पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस विवाद को तय समयसीमा के भीतर सुलझाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
विरोधी गुट को 4 सप्ताह का समय
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ममता बनर्जी की ओर से जवाब पहले ही दाखिल किया जा चुका है। हालांकि, विरोधी गुट की ओर से जवाब अभी दाखिल किया जाना बाकी है। कोर्ट ने विरोधी गुट को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद चुनाव आयोग मामले से जुड़े दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगा।
ECI को तीन महीने में फैसला करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि विरोधी गुट का जवाब मिलने के बाद तीन महीने के अंदर पार्टी के चुनाव चिह्न विवाद पर फैसला किया जाए। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कोर्ट के सामने एक चार्ट भी पेश किया। इसमें पहले सामने आए इसी तरह के राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न विवादों को सुलझाने में लगे समय का ब्योरा दिया गया था। आयोग ने बताया कि इस तरह के विवाद पहले भी उसके सामने आए हैं।
पहले के मामलों का भी दिया गया हवाला
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि AITC से जुड़ा मौजूदा विवाद इस तरह का पहला मामला नहीं है। आयोग ने पहले के पार्टी चुनाव चिह्न विवादों में फैसला लेने में लगे समय की जानकारी भी कोर्ट के सामने रखी। आयोग की ओर से संकेत दिया गया कि मौजूदा मामले में भी निर्धारित समयसीमा के भीतर फैसला किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर जवाब दाखिल होने के बाद तीन महीने की समयसीमा तय की है।
अब आगे क्या होगा?
अब सबसे पहले विरोधी गुट को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब चुनाव आयोग के सामने दाखिल करना होगा। इसके बाद चुनाव आयोग दोनों पक्षों की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और दलीलों पर विचार करेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक जवाब मिलने के बाद आयोग को तीन महीने के भीतर अपना फैसला देना होगा। ऐसे में आने वाले समय में AITC के चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद निर्णायक चरण में पहुंच सकता है।