कोलकाता: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के साथ ही हिलसा मछली की मांग भी बढ़ जाती है। खासकर बांग्लादेश की पद्मा नदी की हिलसा अपने स्वाद और गुणवत्ता के कारण बंगाली लोगों की खास पसंद मानी जाती है। लेकिन इस बार हिलसा प्रेमियों को निराशा का सामना करना पड़ सकता है। दुर्गा पूजा से पहले बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल आने वाली पद्मा हिलसा पर अब तक कोई मंजूरी नहीं मिली है। फिश इंपोर्टर्स एसोसिएशन ने बांग्लादेश सरकार से हिलसा निर्यात की अनुमति देने का आग्रह किया था, लेकिन फिलहाल वहां से हरी झंडी नहीं मिली है। ऐसे में इस बार पूजा के दौरान बंगाल के बाजारों में पद्मा हिलसा की उपलब्धता पर संशय बना हुआ है।
दुर्गा पूजा से पहले हिलसा की उम्मीदों पर पानी
हर साल दुर्गा पूजा से पहले पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से हिलसा मछली आने का इंतजार रहता है। इस बार भी फिश इंपोर्टर्स एसोसिएशन की ओर से बांग्लादेश सरकार को पत्र भेजकर हिलसा निर्यात की अनुमति देने का आग्रह किया गया था। एसोसिएशन के सचिव सैयद अनवर मकसूद ने बताया कि फिलहाल अनुमति नहीं मिली है। बांग्लादेश में हिलसा की उपलब्धता और सरकार की नीतियों के बीच इस साल निर्यात को लेकर स्थिति साफ नहीं हुई है। इससे बंगाल के बाजारों में पद्मा हिलसा की आवक को लेकर असमंजस बना हुआ है। सामान्य तौर पर पूजा के दौरान इस मछली की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे में कारोबारियों के साथ-साथ हिलसा पसंद करने वाले लोगों की नजर अब बांग्लादेश सरकार के अगले फैसले पर है।
समय कम, 8 अक्टूबर से हिलसा पकड़ने पर रोक
बांग्लादेश में हिलसा के संरक्षण के लिए 8 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक 22 दिनों का मछली पकड़ने पर प्रतिबंध घोषित किया गया है। इस दौरान हिलसा पकड़ने के साथ-साथ उसके परिवहन, भंडारण, खरीद-बिक्री और बाजार में कारोबार पर भी रोक रहेगी। बांग्लादेश सरकार के मुताबिक यह प्रतिबंध हिलसा के प्रजनन काल में मछली के संरक्षण के लिए लगाया गया है। ऐसे में भारत को हिलसा भेजने के लिए समय भी लगातार कम होता जा रहा है। भारतीय व्यापारियों के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुर्गा पूजा अक्टूबर में ही है। अगर समय रहते निर्यात की अनुमति नहीं मिली, तो बंगाल के बाजारों में पद्मा हिलसा पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
बांग्लादेश ने भारतीय हिलसा का आयात भी रोका
हिलसा को लेकर बांग्लादेश में हाल ही में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बांग्लादेश के मत्स्य विभाग ने भारत से आने वाली हिलसा के लिए जारी 103 नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं। इसके बाद बेनापोल के रास्ते भारत से बांग्लादेश जाने वाली हिलसा की सप्लाई रोक दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक 20 जुलाई से 20 सितंबर के बीच भारत से करीब 553 टन हिलसा बांग्लादेश पहुंची थी। यह पहली बार था जब पारंपरिक दिशा के उलट भारत से बड़ी मात्रा में हिलसा बांग्लादेश भेजी गई। अब इस आयात पर रोक के बाद भारत से बांग्लादेश और बांग्लादेश से भारत हिलसा व्यापार को लेकर नई स्थिति बन गई है।
पद्मा की हिलसा का स्वाद क्यों है खास?
बंगाल में बांग्लादेश की हिलसा खास तौर पर पसंद की जाती है। पद्मा और मेघना नदी तंत्र से आने वाली हिलसा को उसके स्वाद, बनावट और खुशबू के लिए जाना जाता है। दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली घरों और रेस्तरां में हिलसा से कई तरह के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। इसी वजह से पूजा से पहले बांग्लादेशी हिलसा की मांग बाजार में बढ़ जाती है। इस साल अगर बांग्लादेश से मछली नहीं आती है, तो कारोबारियों को दूसरे स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार फिलहाल बाजार में म्यांमार की हिलसा उपलब्ध है, जबकि गुजरात से आने वाली हिलसा का कारोबार भी हाल के महीनों में बढ़ा है। हालांकि, बंगाल के उपभोक्ताओं के बीच पद्मा हिलसा की अपनी अलग मांग बनी हुई है।
पहले भी लग चुका है बांग्लादेशी हिलसा पर प्रतिबंध
भारत में बांग्लादेशी हिलसा की मांग पुरानी है और दोनों देशों के बीच इसका कारोबार लंबे समय से होता रहा है। बांग्लादेश ने 2012 से 2018 के बीच भारत को हिलसा निर्यात पर रोक लगा रखी थी। इसके बाद राजनयिक स्तर पर बातचीत और अन्य प्रक्रियाओं के बाद दुर्गा पूजा से पहले हिलसा निर्यात की अनुमति दी जाने लगी। पिछले वर्षों में पूजा के आसपास बांग्लादेश से बड़ी मात्रा में हिलसा भारत भेजी जाती रही है। 2025 में भी बांग्लादेश ने दुर्गा पूजा से पहले भारत को 1,200 टन हिलसा निर्यात करने की अनुमति दी थी। इस वजह से हर साल पूजा से पहले बंगाल के बाजारों में बांग्लादेशी हिलसा आने की उम्मीद रहती है।
इस बार पूजा की थाली से गायब हो सकती है पद्मा हिलसा
फिश इंपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सैयद अनवर मकसूद के मुताबिक अब समय काफी कम बचा है। अगर बांग्लादेश सरकार जल्द निर्यात की अनुमति नहीं देती है, तो इस साल पश्चिम बंगाल में पद्मा नदी की हिलसा की उपलब्धता नहीं हो पाएगी। दूसरी ओर, बांग्लादेश में 8 अक्टूबर से शुरू होने वाला 22 दिन का प्रतिबंध भी स्थिति को और मुश्किल बना रहा है। ऐसे में पूजा के दौरान बाजार में म्यांमार या भारत के दूसरे हिस्सों से आने वाली हिलसा पर निर्भरता बढ़ सकती है। फिलहाल व्यापारियों की नजर बांग्लादेश सरकार के फैसले पर टिकी हुई है। दुर्गा पूजा नजदीक आने के साथ हिलसा की उपलब्धता को लेकर तस्वीर जल्द साफ होने की उम्मीद है।