दार्जिलिंग: दुर्गा पूजा के दौरान इस बार दार्जिलिंग के पर्यटन स्थलों को नए अंदाज में सजाने की तैयारी है। सिलीगुड़ी स्टेट गेस्ट हाउस में हुई एक अहम बैठक में पहाड़ी पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटकों की सुविधाएं बेहतर करने और प्रमुख पर्यटन स्थलों को आकर्षक बनाने को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में पर्यटन मंत्री शंकर घोष, पर्वतीय विकास विभाग के राज्य मंत्री विशाल लामा, प्रशासनिक अधिकारी और GTA के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में तय योजना के मुताबिक दुर्गा पूजा के दौरान दार्जिलिंग के चौरस्ता और मॉल रोड को विशेष रोशनी और सजावट से नया रूप देने की तैयारी है। इसका उद्देश्य पूजा के मौसम में पहाड़ों की ओर आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करना और दार्जिलिंग की उत्सवी छवि को और मजबूत करना है।
छह महीने के रोडमैप पर चर्चा
बैठक में पहाड़ों में पर्यटन विकास के लिए अगले छह महीनों का रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया गया। दार्जिलिंग के साथ कालिम्पोंग, मिरिक, डुधिया, मंगपू और कर्सियांग जैसे पर्यटन स्थलों को भी विकसित और अधिक आकर्षक बनाने की योजना पर चर्चा हुई। पर्यटन अवसंरचना, ट्रैफिक प्रबंधन, कचरा निस्तारण और नए पर्यटन स्थलों के विकास को प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा गया है। पर्यटन विभाग से जुड़े सरकारी परिसंपत्तियों और जमीन के बेहतर इस्तेमाल के साथ विभाग की वेबसाइट को भी अधिक डिजिटल और पर्यटक-अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। पहाड़ी इलाकों में होमस्टे के पंजीकरण को भी ऑनलाइन करने की योजना पर चर्चा हुई है।
₹57 करोड़ की केंद्रीय सहायता का भी होगा इस्तेमाल
बैठक में पर्यटन क्षेत्र के लिए केंद्र से मिली ₹57 करोड़ की सहायता का इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हुई। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस राशि को केवल दार्जिलिंग के लिए आवंटित राशि के तौर पर पेश करना उचित नहीं है। पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने अलग से बताया है कि केंद्र ने स्वदेश दर्शन योजना के तहत मिरिक झील के सौंदर्यीकरण और उसे ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए ₹57 करोड़ मंजूर किए हैं। इसलिए पहाड़ी पर्यटन विकास की व्यापक योजना में केंद्र की सहायता और अलग-अलग परियोजनाओं के लिए स्वीकृत धनराशि का इस्तेमाल किया जाएगा।
रोपवे की संभावनाओं पर भी काम
पहाड़ी पर्यटन को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए रोपवे की संभावनाओं पर भी काम चल रहा है। पर्यटन विभाग ने अलग-अलग स्थानों पर रोपवे विकसित करने की व्यवहार्यता का अध्ययन कराने के लिए RITES को लगाया है। इसमें दार्जिलिंग-कालिम्पोंग-कर्सियांग क्षेत्र सहित राज्य के अन्य हिस्सों को भी शामिल किया गया है। हालांकि, फिलहाल इसे पांच नए रोपवे के निर्माण की अंतिम स्वीकृति के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मौजूदा चरण में परियोजनाओं की व्यवहार्यता का अध्ययन किया जा रहा है।
ट्रैफिक, कचरा और होमस्टे पर भी फोकस
पूजा और पर्यटन सीजन में पहाड़ी शहरों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक प्रबंधन और कचरा निस्तारण पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। दार्जिलिंग और कालिम्पोंग जैसे प्रमुख पर्यटन केंद्रों में पंजीकृत और बिना पंजीकरण चल रहे होमस्टे की स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस प्रशासन को रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। इसके साथ ही होमस्टे के पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की तैयारी है, ताकि पर्यटन कारोबार को अधिक व्यवस्थित किया जा सके।
दुर्गा पूजा से जोड़ा जाएगा हिल टूरिज्म
राज्य सरकार की व्यापक पर्यटन रणनीति में दुर्गा पूजा को पहाड़ी पर्यटन से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। पर्यटन विभाग की योजना है कि पूजा के दौरान बंगाल आने वाले पर्यटकों को राज्य के अलग-अलग पर्यटन क्षेत्रों की ओर आकर्षित किया जाए। मंत्री शंकर घोष ने भी दुर्गा पूजा को व्यापक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की पहल की बात कही है। इस बीच, दुर्गा पूजा के लिए दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे ने भी विशेष जॉय राइड सेवाओं की घोषणा की है। 1 अक्टूबर से दार्जिलिंग-घूम और कर्सियांग-महानदी मार्गों पर अतिरिक्त सेवाएं चलाने की योजना है, जिससे त्योहार के दौरान पहाड़ आने वाले पर्यटकों को एक अतिरिक्त आकर्षण मिलेगा।