मेदिनीपुर: पश्चिम बंगाल के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने पश्चिम मेदिनीपुर जिले में विकास परियोजनाओं की धीमी रफ्तार को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। मेदिनीपुर में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने ग्रामीण इलाकों में अधूरे पड़े विकास कार्यों, सरकारी फंड के इस्तेमाल में देरी और फाइलों के निपटारे में सुस्ती पर नाराजगी जताई। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर जनता तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कथित तौर पर काम में लापरवाही बरतने और फाइलें लंबित रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। उनका जोर इस बात पर रहा कि प्रशासनिक बैठकों में योजनाओं की समीक्षा के साथ जमीन पर काम की प्रगति भी दिखाई देनी चाहिए।
फंड आवंटित होने के बावजूद काम में देरी क्यों?
समीक्षा बैठक में विभिन्न ब्लॉकों और ग्राम पंचायतों में चल रही ग्रामीण विकास परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा हुई। सड़कों, पेयजल, आवास और स्वच्छता से जुड़े कार्यों की प्रगति को लेकर मंत्री ने अधिकारियों से जवाब मांगा। दिलीप घोष ने सवाल उठाया कि जब विकास योजनाओं के लिए धन आवंटित किया जा चुका है, तो कई परियोजनाओं को पूरा करने में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने फाइलों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक पहुंचने में लगने वाले समय पर भी नाराजगी जताई। मंत्री ने अधिकारियों को आगाह किया कि सरकारी कामकाज में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने और आम लोगों की शिकायतों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
आवास, रोजगार और पेयजल परियोजनाओं में तेजी लाने का निर्देश
दिलीप घोष ने ग्रामीण आवास योजनाओं और 125 दिवसीय ग्रामीण रोजगार परियोजना से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता बनाए रखने और पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक में अपात्र लाभार्थियों से संबंधित मामलों की जांच और नियमानुसार वसूली की प्रक्रिया का भी जिक्र किया गया। वहीं, पात्र परिवारों को आवास निर्माण के लिए निर्धारित आर्थिक सहायता समय पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। मंत्री ने ग्रामीण इलाकों में शौचालय निर्माण और नल के जरिए पेयजल पहुंचाने वाली परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का निर्देश भी दिया। निर्माण कार्यों में धन की कमी के कारण देरी नहीं हो, इसके लिए भुगतान और फंड जारी करने की प्रक्रिया को सुचारु बनाने पर जोर दिया गया।
ग्रामीण सड़कें, जल निकासी और स्कूलों की मरम्मत पर जोर
बैठक में बारिश के बाद खराब हुई ग्रामीण सड़कों की मरम्मत, जल निकासी व्यवस्था की सफाई और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के मुद्दे भी उठे। मंत्री ने अधिकारियों को प्राथमिक स्कूलों और एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) केंद्रों की स्थिति पर ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कामों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) और इंजीनियरों को केवल दफ्तरों तक सीमित रहने के बजाय गांवों और निर्माण स्थलों का दौरा करने की नसीहत दी। परियोजनाओं की गुणवत्ता और काम की वास्तविक प्रगति की जांच करने पर भी जोर दिया गया।
पंचायतों में राजनीतिक खींचतान पर भी सख्त रुख
दिलीप घोष ने ग्राम पंचायतों में राजनीतिक विवाद और आंतरिक गुटबाजी के कारण विकास कार्य प्रभावित होने के मुद्दे पर भी चेतावनी दी। उनके मुताबिक, स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिरोध के कारण आम लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में बाधा नहीं आनी चाहिए। बैठक में यह निर्देश भी दिया गया कि यदि किसी ग्राम पंचायत का प्रधान लगातार 15 दिनों तक काम से अनुपस्थित रहता है, तो नियमानुसार वहां प्रशासक नियुक्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। इसका उद्देश्य पंचायतों में प्रशासनिक कामकाज और विकास परियोजनाओं को बाधित होने से रोकना बताया गया। मंत्री की इस समीक्षा बैठक के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं पर कितना असर पड़ता है और लंबित कार्यों को पूरा करने की रफ्तार कितनी बढ़ती है।