कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने संबंधी जनहित याचिका के उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी BJP के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि बिना वजह ध्वनि प्रदूषण न फैलाना सरकार का नीतिगत फैसला है और कानून प्रक्रिया को चुनौती देना सही नहीं है। इसके अलावा उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विवाद पर भी अपनी राय रखी।
लाउडस्पीकर हटाने के फैसले का समर्थन
मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे पर बोलते हुए दिलीप घोष ने कहा कि कई मस्जिदों और मंदिरों ने स्वेच्छा से लाउडस्पीकर की आवाज कम की है या उन्हें हटा लिया है। उन्होंने कहा, "अनावश्यक ध्वनि प्रदूषण को रोकने का फैसला नीतिगत है, जिसे सभी को स्वीकार करना चाहिए। बिना अनुमति के लाउडस्पीकर बजाने का अधिकार किसी को नहीं है। ऐसे में अदालत जाने वालों की हार तय थी, सरकार के नियमों को चुनौती देना सही नहीं है।"
राज्य में भ्रष्टाचार और 'घूसखोर धरो, जेल भरो'
पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हमला बोलते हुए वरिष्ठ नेता ने कहा कि राज्य में हवा जहां तक पहुंचती है, वहां तक भ्रष्टाचार फैल चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की शुरुआत पुलिस महकमे से हुई है, जिसे वसूली का जरिया बना दिया गया है। घोष ने चेतावनी देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
ऋतब्रत बनर्जी और हाईकोर्ट का आदेश
विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में अस्थायी मान्यता दिए जाने के अदालत के आदेश पर दिलीप घोष ने कहा कि मामला न्यायपालिका के समक्ष है और जो भी फैसला अदालत देगी, उसका पालन किया जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के अधिकारों का बचाव
ऋतब्रत बनर्जी के मामले में विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि स्पीकर के पास विशेष अधिकार होते हैं। विधानसभा के भीतर फैसले लेने का अधिकार उनके पास सुरक्षित है और कई गोपनीय जानकारियां ऐसी होती हैं जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
अदालती प्रक्रिया और भविष्य की राह
अपनी बात समाप्त करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि जब मामला कोर्ट के विचाराधीन है, तब न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास रखना चाहिए। जो तथ्य अदालत के सामने आएंगे, उसी के आधार पर इस मामले का अंतिम फैसला होगा।