दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में निजी अस्पताल के सामने एंबुलेंस चालक से मारपीट का मामला सामने आया है। गांधी मोड़ के पास काम करने वाले एंबुलेंस चालक माणिक धীবर ने आरोप लगाया है कि पूर्व तृणमूल कांग्रेस पार्षद हीरालाल बाउरी को कथित तौर पर मासिक रकम नहीं देने के कारण उनके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। माणिक ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और रिपोर्टों के अनुसार आरोपी पूर्व पार्षद को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, हीरालाल बाउरी ने एंबुलेंस चालक द्वारा लगाए गए वसूली और मारपीट के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि विवाद पैसे को लेकर नहीं, बल्कि कथित गाली-गलौज और व्यक्तिगत टिप्पणी को लेकर हुआ था।
हर महीने ₹10,000 देने का आरोप, भुगतान बंद करने के बाद मारपीट का दावा
माणिक धীবर के मुताबिक, गांधी मोड़ स्थित निजी अस्पताल के सामने करीब 40 एंबुलेंस संचालित होती हैं। उनका आरोप है कि पहले उन्हें हर महीने ₹10,000 बतौर 'मासिक रकम' देनी पड़ती थी और यह भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जाता था। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन महीनों से उन्होंने यह भुगतान बंद कर दिया था। माणिक का आरोप है कि रकम देना बंद करने के बाद ही उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने दावा किया कि आरोपी ने उन्हें सड़क पर गिराकर पीटा और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। चालक ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की है। कुछ रिपोर्टों में माणिक की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना के दौरान उनके पास मौजूद नकदी और सोने की चेन ले ली गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पूर्व पार्षद ने आरोपों से किया इनकार, विवाद की बताई दूसरी वजह
दूसरी ओर, हीरालाल बाउरी ने मासिक वसूली या रंगदारी लेने के आरोप को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि एंबुलेंस चालक के साथ उनका विवाद किसी पैसे की मांग को लेकर नहीं हुआ था। बाउरी के मुताबिक, उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं और विवाद कथित गाली-गलौज तथा परिवार को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद हुआ। उन्होंने मारपीट से जुड़े आरोपों से भी इनकार किया है।
पुलिस जांच और गिरफ्तारी के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने हीरालाल बाउरी को गिरफ्तार किया और उन्हें अदालत में पेश किया गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए पुलिस हिरासत का आदेश दिया था। मामले में पुलिस शिकायत, घटनास्थल के साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयानों की जांच कर रही है। आरोपों की वास्तविकता और घटना के पूरे क्रम का निर्धारण जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर अस्पताल परिसरों में काम करने वाले एंबुलेंस चालकों की सुरक्षा और किसी भी तरह की कथित अवैध वसूली को लेकर सवाल उठे हैं।