नई दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन के ठिकानों पर छापेमारी की थी। अब इस जांच में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम भी सामने आया है। दुर्गा पूजा के पास से जुड़े कथित घोटाले की जांच कर रही एजेंसी ने दावा किया है कि रॉयल्टी के तौर पर पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खाते में रकम डाली गई थी। ईडी ने स्पष्ट किया कि इस लेनदेन को लेकर किसी आपराधिक कृत्य का आरोप नहीं लगाया गया है। सितंबर के अंत में एजेंसी ने सेन से जुड़े कई ठिकानों पर दबिश दी थी जो 15 घंटों से अधिक चली। अगले दिन सेन को पूछताछ के लिए भी बुलाया गया था। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।
ऑक्टेव रिकॉर्ड्स से हुए हस्तांतरण का दावा
ईडी का दावा है कि इंद्रनील सेन की कंपनी ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के बैंक खाते से करीब 30 लाख रुपये बैंकिंग माध्यम के जरिये ममता बनर्जी को हस्तांतरित किए गए थे। सेन ने पूछताछ के दौरान इसे रॉयल्टी के रूप में भुगतान किए जाने का दावा किया। एजेंसी की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि सेन और उनकी प्रोपराइटरशिप फर्म के खातों में उनके मंत्री रहने के दौरान 3.8 करोड़ रुपये से अधिक नकद जमा किए गए थे। इन्हीं खातों से उक्त राशि तत्कालीन मुख्यमंत्री के खाते में पहुंची। जांच एजेंसी ने इस लेनदेन को आपराधिक प्रकृति का नहीं बताया है। यह पहली बार है जब इस मामले में ममता बनर्जी का नाम सामने आया है। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है।
टेंडर और करीबियों को लाभ पहुंचाने के आरोप
ईडी का कहना है कि मंत्री रहते हुए सेन ने 85 करोड़ रुपये के टेंडर अपने करीबियों को दिलाए थे। इनके नाम ध्रुवज्योति बसु और दीपेश रॉय बताए जा रहे हैं। बाद में इन टेंडरों से मिली रकम को सेन के कई रिश्तेदारों की कंपनियों में भेजा गया था। एजेंसी के अनुसार इन संस्थाओं के बैंक खातों से भारी मात्रा में नकद निकासी भी हुई। सेन की कंपनी में भी 3.8 करोड़ रुपये डाले गए थे। इन आरोपों के केंद्र में पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय से जुड़े टेंडर हैं। जांच में यह सामने आया कि इन लेनदेनों के जरिये धन का प्रवाह व्यवस्थित तरीके से किया गया। एजेंसी इन लेनदेनों की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है।
मासआर्ट सोसाइटी और दुर्गा पूजा पास का मामला
इस केस के केंद्र में मासआर्ट सोसाइटी है जिसकी शुरुआत सेन की पत्नी मधुचंदा ने की थी। इसमें कई और लोग भी शामिल थे। आरोप हैं कि 2022 से 2025 यानी तीन सालों के दौरान दुर्गा पूजा के नाम पर लोगों से वसूली की गई। सोसाइटी को यूनेस्को से जुड़ा बताया गया और अधिकृत पार्टनर के तौर पर पेश किया गया था। मासआर्ट के जरिए कोलकाता के 24 दुर्गा पूजा पंडालों में आयोजित प्रीव्यू शो के लिए आम लोगों को 1749 रुपये से 5499 रुपये तक के टिकट बेचे गए। एजेंसी का आरोप है कि यूनेस्को के नाम और लोगो का गलत इस्तेमाल किया गया तथा अनधिकृत रूप से नाम को सोसाइटी के साथ जोड़ा गया। इस तरह सार्वजनिक त्योहार को व्यावसायिक उद्यम में बदलने का प्रयास किया गया।
जांच की वर्तमान स्थिति और आगे की प्रक्रिया
ईडी ने सेन से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के बाद उन्हें विस्तार से पूछताछ के लिए तलब किया था। एजेंसी का कहना है कि आरोपी व्यक्तियों ने दुर्गा पूजा दर्शन को व्यवस्थित रूप से व्यावसायिक बना दिया और व्यक्तिगत लाभ के लिए इसका उपयोग किया। एक लाख से अधिक टिकट बेचे जाने और धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि ममता बनर्जी के खाते में हुए हस्तांतरण को लेकर कोई आपराधिक आरोप नहीं लगाया गया है। जांच अभी जारी है और एजेंसी आगे की कार्रवाई के लिए सबूतों का आकलन कर रही है। इस मामले में सामने आए दावों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है लेकिन एजेंसी ने तथ्यों पर आधारित अपना रुख साफ रखा है।