कोलकाता: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा को पर्यावरण-अनुकूल, स्वच्छ, टिकाऊ और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू की जा रही है। राज्य सरकार के UD&MA विभाग के अधीन राज्य शहरी विकास एजेंसी (SUDA) की ओर से ‘ग्रीन दुर्गा पूजा एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026’ शुरू किया जा रहा है। इस पहल के जरिए ऐसी पूजा समितियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक भागीदारी को अपनी पूजा व्यवस्था का हिस्सा बनाएंगी।
पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा विशेष जोर
ग्रीन दुर्गा पूजा अभियान के तहत पूजा पंडाल और प्रतिमा में पर्यावरण-अनुकूल सामग्री के इस्तेमाल, ऊर्जा की बचत, जिम्मेदार विसर्जन व्यवस्था और प्लास्टिक के कम उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन और स्रोत पर ही कचरे को अलग करने जैसी व्यवस्थाओं को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा।
चार श्रेणियों में दिए जाएंगे पुरस्कार
इस प्रतियोगिता में कुल चार प्रमुख श्रेणियां रखी गई हैं। इनमें सर्वश्रेष्ठ ग्रीन पूजा, सर्वश्रेष्ठ क्लीन एंड वेस्ट स्मार्ट पूजा, सर्वश्रेष्ठ जागरूकता पहल और कम्युनिटी एंगेजमेंट अवॉर्ड शामिल हैं। पूजा समितियों का चयन पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था, साफ-सफाई, सरकारी योजनाओं के प्रचार, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त अभियान और सामुदायिक गतिविधियों के आधार पर किया जाएगा।
सफाई कर्मचारियों और SHG को भी मिलेगा महत्व
इस पहल में पूजा समितियों की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया गया है। सफाई कर्मचारियों को सम्मान देना, उनकी गरिमा और पेशेवर सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाना, स्वयं सहायता समूहों (SHG) और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को बढ़ावा देना भी पुरस्कार के लिए महत्वपूर्ण मानकों में शामिल होगा।
तीन स्तरों पर होगी पूजा समितियों की जांच
ग्रीन दुर्गा पूजा अवॉर्ड्स के लिए मूल्यांकन की प्रक्रिया तीन चरणों में होगी। सबसे पहले ULB स्तर पर स्थानीय मूल्यांकन समिति पूजा समितियों का आकलन करेगी। इसके बाद चयनित प्रविष्टियां जिला स्तर पर भेजी जाएंगी। जिला स्तर की समिति प्रत्येक श्रेणी में बेहतर प्रदर्शन करने वाली पूजा समितियों को राज्य स्तरीय मूल्यांकन के लिए नामांकित करेगी।
राज्य स्तरीय जूरी करेगी अंतिम फैसला
राज्य स्तर पर कला, तकनीकी विशेषज्ञता, शहरी विकास और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़े विशेषज्ञों को जूरी में शामिल किया जा सकता है। HMC, KMC और BMC क्षेत्रों में मूल्यांकन ऑफलाइन तथा अन्य जिलों में ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। राज्य स्तरीय जूरी का फैसला अंतिम माना जाएगा।
विशेष ऐप से होगी पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया
पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए ‘ग्रीन दुर्गा पूजा इवैल्यूएशन ऐप’ का इस्तेमाल किया जाएगा। मूल्यांकन समिति के सदस्य निर्धारित मानकों के अनुसार इसी ऐप पर अंक दर्ज करेंगे। इससे प्रत्येक स्तर के मूल्यांकन को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जा सकेगा।
सर्वश्रेष्ठ पूजा को मिलेगा एक लाख रुपये का पुरस्कार
राज्य स्तर पर सर्वश्रेष्ठ पूजा समिति को ₹1 लाख की पुरस्कार राशि दी जाएगी। वहीं प्रथम रनर-अप को ₹80 हजार और द्वितीय रनर-अप को ₹50 हजार दिए जाएंगे। प्रत्येक जिले की सर्वश्रेष्ठ पूजा समिति को ₹25 हजार की पुरस्कार राशि मिलेगी। विजेताओं को उत्कृष्टता प्रमाण पत्र के साथ टिकाऊ ट्रॉफी या स्मृति चिह्न भी प्रदान किया जाएगा।
विजेता पूजा समितियां बनेंगी ‘ग्रीन कम्युनिटी एंबेसडर’
इस पहल की खास बात यह है कि पुरस्कार जीतने वाली पूजा समितियों को एक साल के लिए ‘ग्रीन कम्युनिटी एंबेसडर’ के रूप में नामित किया जाएगा। उन्हें अपने संबंधित ULB के सहयोग से कम से कम तीन पर्यावरण आधारित सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित करने होंगे। इनमें स्वच्छता अभियान, कचरा पृथक्करण जागरूकता, वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त अभियान जैसी गतिविधियां शामिल होंगी।
सोशल मीडिया के जरिए बढ़ेगी जनभागीदारी
ग्रीन दुर्गा पूजा अभियान को सोशल मीडिया और एक विशेष वेबसाइट के माध्यम से भी प्रचारित किया जाएगा। पूजा समितियों को अपनी पर्यावरण-अनुकूल पहल, अभियान और उसके प्रभाव से जुड़े छोटे वीडियो साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके जरिए नागरिकों को भी इस अभियान से जोड़ने की योजना है।
राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य दुर्गा पूजा को केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, सामाजिक भागीदारी और टिकाऊ शहरी विकास का मंच बनाना है।