कोलकाता: कोलकाता में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के तीसरे डायमंड कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश के ज्वेलरी और डायमंड उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों, कारोबारियों और जेमोलॉजी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कॉन्क्लेव में बदलती उपभोक्ता पसंद, तकनीक, डिजाइन, पारदर्शिता, जिम्मेदार आभूषण कारोबार और भारत की वैश्विक ज्वेलरी इंडस्ट्री में भूमिका को लेकर चर्चा हुई।
प्राकृतिक हीरा कारोबार में भारत की बड़ी भूमिका
ICC ने बताया कि भारत प्राकृतिक हीरों की वैश्विक वैल्यू चेन में अहम स्थान रखता है। देश दुनिया के करीब 90 फीसदी रफ डायमंड की प्रोसेसिंग करता है। वहीं, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डायमंड ज्वेलरी बाजार बन चुका है और वैश्विक मांग में उसकी हिस्सेदारी करीब 12 फीसदी बताई गई है।
मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़ने की जरूरत
ICC नेशनल एक्सपर्ट कमेटी ऑन ज्वेलरी एंड लाइफस्टाइल के चेयरमैन और नेमिचंद बामलवा एंड संस के डायरेक्टर विनोद बामलवा ने कहा कि भारत की डायमंड इंडस्ट्री की पहचान अब केवल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने तकनीक, इनोवेशन, डिजाइन, पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के भरोसे के जरिए लगातार वैल्यू क्रिएशन पर जोर दिया।
भारत को वैश्विक मानक बनाने की कोशिश
विनोद बामलवा के मुताबिक भारत का लक्ष्य केवल दुनिया के लिए डायमंड और ज्वेलरी बनाने वाले प्रमुख केंद्र के तौर पर बने रहना नहीं होना चाहिए, बल्कि इनोवेशन, कारीगरी, डिजाइन और लग्जरी एक्सीलेंस के क्षेत्र में वैश्विक मानक स्थापित करना भी होना चाहिए।
युवा ग्राहकों को जोड़ने पर फोकस
ICC नेशनल एक्सपर्ट कमेटी ऑन ज्वेलरी एंड लाइफस्टाइल के को-चेयरमैन और सेंको गोल्ड एंड डायमंड के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं CEO सुवंकर सेन ने युवा उपभोक्ताओं की बदलती पसंद को उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की आकांक्षाओं, अनुभवों और खर्च करने की प्राथमिकताओं को समझते हुए डायमंड ज्वेलरी को उनके साथ जोड़ना जरूरी है।
आधुनिक डिजाइन के साथ कौशल बचाने की चुनौती
सुवंकर सेन ने कहा कि डायमंड ज्वेलरी उद्योग को नए दौर के आधुनिक डिजाइन और कारोबार के साथ आगे बढ़ाना होगा। इसके साथ ही युवा पीढ़ी के बीच पारंपरिक कौशल को बनाए रखने पर भी ध्यान देना जरूरी है, ताकि उद्योग का विकास और कारीगरी दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकें।
बंगाल में ज्वेलरी सेक्टर को बढ़ावा देने की तैयारी
पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार ज्वेलरी सेक्टर को महत्व देना चाहती है और इसके लिए कोलकाता में भविष्य में ज्वेलरी पार्क या जेम एंड ज्वेलरी पार्क विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है।
ज्वेलरी पार्क में ट्रेनिंग सेंटर का प्रस्ताव
स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित ज्वेलरी पार्क में विशेष रूप से डिजाइन किया गया ट्रेनिंग सेंटर होना चाहिए। उनका कहना था कि इससे कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा और पश्चिम बंगाल में मौजूद डिजाइन तथा स्किल का इस्तेमाल उद्योग के विस्तार के लिए किया जा सकेगा।
देशभर की कंपनियों को बंगाल आने का न्योता
वित्त मंत्री ने देशभर के स्थापित ज्वेलरी कारोबारियों और कंपनियों को पश्चिम बंगाल में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा उपलब्ध कराने की कोशिश करेगी। कस्टम से जुड़ी सुविधाओं को भी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने की बात कही गई।
ज्वेलरी पार्क में ट्रेनिंग सेंटर का प्रस्ताव
स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार दुर्गापूजा से पहले अपनी निवेश नीति सामने लाएगी। उन्होंने ज्वेलरी और डायमंड सेक्टर से जुड़े कारोबारियों को राज्य में उपलब्ध संभावनाओं और सुविधाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।
तकनीक और पारदर्शिता पर भी चर्चा
ICC के डायमंड कॉन्क्लेव में उद्योग के भविष्य को लेकर तकनीक आधारित इनोवेशन, पारदर्शिता और उपभोक्ता विश्वास जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही जिम्मेदार ज्वेलरी, प्राकृतिक हीरे और बदलते बाजार के अनुरूप नए कारोबारी अवसरों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
बंगाल को ज्वेलरी उद्योग का नया केंद्र बनाने की कवायद
कॉन्क्लेव में सामने आए विचारों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में कौशल, डिजाइन और कारोबारी सुविधाओं को एक साथ विकसित करने की कोशिश राज्य को जेम एंड ज्वेलरी सेक्टर में नई भूमिका दे सकती है। ICC के इस आयोजन में उद्योग के मौजूदा रुझानों के साथ भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने के रास्तों पर भी चर्चा हुई।