कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत छठे और सातवें चरण के ICT कंप्यूटर शिक्षकों ने एजेंसी आधारित नियुक्ति व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है। ‘ICT शिक्षक ऐक्य मंच’ के बैनर तले राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे शिक्षकों ने सोमवार को साल्टलेक स्थित विकास भवन की ओर मार्च किया और सीधे राज्य सरकार के अधीन संविदाकर्मी का दर्जा देने समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि ICT शिक्षकों की नियुक्ति में निजी एजेंसियों और ई-टेंडर की व्यवस्था खत्म की जाए तथा छठे और सातवें चरण के शिक्षकों को सीधे शिक्षा विभाग के अधीन लाया जाए। शिक्षकों का दावा है कि पहले से पांचवें चरण तक के ICT शिक्षकों को आंदोलन के बाद सरकारी संविदा व्यवस्था के तहत काम करने का अवसर मिला, जबकि 6th और 7th Phase के शिक्षक अब भी एजेंसियों के माध्यम से सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे कई वर्षों से सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में कंप्यूटर एवं डिजिटल शिक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके बावजूद नौकरी की स्थिरता, मानदेय और सेवा संबंधी सुविधाओं को लेकर उनके सामने अनिश्चितता बनी हुई है।
‘दफा एक, दाबी एक’ के नारों से गूंजा साल्टलेक
विकास भवन अभियान के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ICT शिक्षकों ने विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और पोस्टर थे, जिन पर “दफा एक, दाबी एक”, “एजेंसी प्रथा बंद करो” और “कोई कंपनी नहीं, कोई ई-टेंडर नहीं” जैसे नारे लिखे थे। पुलिस बैरिकेड्स के सामने भी शिक्षकों ने नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर शिक्षा विभाग के हस्तक्षेप की मांग की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक रूप से तराजू भी हाथ में लिया। उनका कहना था कि अलग-अलग चरणों में काम करने वाले ICT शिक्षकों की जिम्मेदारियां और कार्यस्थल समान हैं, तो उनकी सेवा शर्तों और मानदेय में इतना अंतर क्यों है।
1st-5th और 6th-7th Phase के वेतन में अंतर का दावा
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने अलग-अलग चरणों के ICT शिक्षकों के वेतन और सेवा सुविधाओं को लेकर तुलनात्मक पोस्टर भी दिखाए। प्रदर्शनकारियों के दावे के मुताबिक, 1st से 5th Phase के ICT शिक्षकों को सरकारी व्यवस्था के तहत करीब 21,000 से 30,000 रुपए प्रति माह तक वेतन मिलता है। उनका दावा है कि इसके साथ नौकरी की सुरक्षा, पूजा बोनस और सेवानिवृत्ति से जुड़ी कुछ सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। वहीं, 6th और 7th Phase के शिक्षकों का कहना है कि निजी एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त होने के कारण उन्हें करीब 7,134 से 8,000 रुपए प्रति माह तक मानदेय मिलता है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, सेवा सुरक्षा और अन्य सुविधाओं के मामले में भी दोनों समूहों के बीच बड़ा अंतर है। शिक्षकों का तर्क है कि महंगाई के मौजूदा दौर में इतने कम मानदेय पर परिवार चलाना कठिन है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर और डिजिटल शिक्षा को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें पर्याप्त आर्थिक और सेवा सुरक्षा नहीं मिल रही है।
पांच वर्षों की सेवा के बाद भी एजेंसी व्यवस्था पर सवाल
ICT शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि छठे और सातवें चरण के शिक्षक करीब पांच वर्षों से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें सीधे सरकारी संविदा व्यवस्था में शामिल नहीं किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निजी एजेंसियों और ई-टेंडर की प्रक्रिया के कारण उनकी नौकरी लगातार अस्थिर बनी रहती है। उनका दावा है कि एजेंसी या टेंडर बदलने की स्थिति में रोजगार की निरंतरता को लेकर अनिश्चितता पैदा होती है। शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी स्तर पर ICT शिक्षकों के लिए जारी राशि और उन्हें मिलने वाले वास्तविक मानदेय में अंतर रहता है। हालांकि, इस प्रदर्शन के संदर्भ में इन आरोपों पर संबंधित एजेंसियों या राज्य शिक्षा विभाग की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Webel, Schoolnet और Extramarks जैसी एजेंसियों के जरिए नियुक्ति का विरोध
प्रदर्शनकारियों ने Webel, Schoolnet और Extramarks जैसी एजेंसियों के माध्यम से ICT शिक्षकों की नियुक्ति की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। शिक्षकों की मांग है कि भविष्य में ICT शिक्षकों की नियुक्ति निजी एजेंसियों के माध्यम से करने के बजाय उन्हें सीधे शिक्षा विभाग के अधीन संविदाकर्मी के रूप में नियुक्त किया जाए। उनका कहना है कि इससे नौकरी की निरंतरता, मानदेय और सेवा शर्तों को लेकर स्पष्टता आएगी। मंच के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी मांग किसी अतिरिक्त विशेषाधिकार की नहीं, बल्कि लंबे समय से काम कर रहे शिक्षकों के लिए स्थिर सेवा व्यवस्था और समान व्यवहार की है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
ICT शिक्षक ऐक्य मंच’ ने कहा है कि केवल आश्वासन से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। शिक्षकों की मांग है कि राज्य सरकार उनकी सेवा शर्तों, मानदेय और नौकरी की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट निर्णय ले। मंच की ओर से मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दी गई है। प्रदर्शनकारियों ने आगे धरना और कार्य बहिष्कार जैसे कार्यक्रमों का विकल्प भी खुला रखने की बात कही है। फिलहाल 6th और 7th Phase के ICT शिक्षकों का आंदोलन मुख्य रूप से एजेंसी आधारित नियुक्ति व्यवस्था समाप्त करने, सीधे सरकारी संविदा का दर्जा देने तथा वेतन और सेवा सुविधाओं में कथित असमानता दूर करने की मांग पर केंद्रित है।