कोलकाता: एजेंसी प्रथा खत्म कर सीधे सरकारी अनुबंध आधारित कर्मचारी के तौर पर नियुक्ति की मांग को लेकर आईसीटी इंस्ट्रक्टरों ने सोमवार को विकास भवन अभियान किया। सप्ताह के पहले ही दिन सॉल्टलेक की सड़कों पर हजारों अनुबंध आधारित कंप्यूटर शिक्षक उतर आए। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे पिछले करीब पांच वर्षों से अलग-अलग स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक निजी एजेंसियों के अधीन काम करना पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि एजेंसी व्यवस्था के कारण उनकी नौकरी को लेकर लगातार असुरक्षा बनी रहती है। अब अनुबंध की अवधि खत्म होने और नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना से उनकी चिंता और बढ़ गई है। इसी के विरोध में शिक्षकों ने विकास भवन की ओर मार्च किया।
निजी एजेंसियों के जरिए हुई थी नियुक्ति
आंदोलनकारी शिक्षकों के अनुसार, उनकी नियुक्ति वेबेल स्कूलनेट और एक्स्ट्रामार्क जैसी निजी संस्थाओं के माध्यम से की गई थी। इन एजेंसियों के जरिए उन्हें अलग-अलग सरकारी स्कूलों में आईसीटी इंस्ट्रक्टर के तौर पर काम करने का अवसर मिला। शिक्षकों का दावा है कि लंबे समय से स्कूलों में काम करने के बावजूद उनकी सेवा शर्तों में स्थायी सुरक्षा नहीं है। अब मौजूदा अनुबंध की अवधि भी समाप्त होने के करीब बताई जा रही है। नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आने के बाद शिक्षकों में नौकरी को लेकर चिंता बढ़ गई है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि कई शिक्षकों को अनुबंध का नवीनीकरण नहीं होने की जानकारी भी दी गई है। ऐसे में शिक्षक एजेंसी व्यवस्था खत्म कर सीधे सरकार के अधीन अनुबंध आधारित नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
नौकरी बचाने के लिए विकास भवन की ओर मार्च
अपनी नौकरी जारी रखने और सीधे सरकारी अनुबंध आधारित कर्मचारी के तौर पर मान्यता देने की मांग को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में आईसीटी शिक्षक विकास भवन की ओर मार्च करने पहुंचे। शिक्षकों ने हाथों में अपनी मांगों से जुड़े पोस्टर और बैनर लेकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि पांच साल तक सेवा देने के बाद अचानक नौकरी पर संकट पैदा होना उनके लिए बड़ी परेशानी है। आंदोलनकारियों ने सरकार से मौजूदा शिक्षकों की सेवा जारी रखने की मांग की है। साथ ही उन्होंने एजेंसी के जरिए होने वाली नियुक्ति व्यवस्था को खत्म करने की मांग उठाई। हालांकि, विकास भवन के मुख्य गेट के पास पहुंचने से पहले ही पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस की स्थिति बन गई।
पूजा से पहले नौकरी को लेकर बढ़ी चिंता
पूजा से पहले नौकरी को लेकर बनी अनिश्चितता ने आंदोलनकारी शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से स्कूलों में छात्रों को कंप्यूटर और सूचना तकनीक से जुड़ी शिक्षा दे रहे हैं। इसके बावजूद उनकी नौकरी की सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। आंदोलनकारियों का सवाल है कि वर्षों तक काम करने वाले शिक्षकों को सीधे सरकारी अनुबंध के तहत नियुक्त क्यों नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि हर बार एजेंसी बदलने या नया टेंडर आने के साथ उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो जाता है। इससे शिक्षकों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक अनिश्चितता पैदा होती है। इसी वजह से उन्होंने सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
विकास भवन के बाहर धरने पर बैठे शिक्षक
पुलिस द्वारा बैरिकेड लगाकर रोके जाने के बाद आंदोलनकारी विकास भवन के बाहर ही धरने पर बैठ गए। शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी और सरकार से बातचीत की मांग उठाई। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि शिक्षा मंत्री उनसे मुलाकात करें और उनकी समस्याओं को सीधे सुनें। उनका कहना है कि सिर्फ टेंडर प्रक्रिया के भरोसे उनकी नौकरी का भविष्य तय नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षकों ने लंबे समय से काम कर रहे आईसीटी इंस्ट्रक्टरों को सीधे सरकारी अनुबंध आधारित कर्मचारी के रूप में नियुक्त करने की मांग की है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि काफी देर तक धरना चलने के बावजूद विकास भवन की ओर से उनसे बातचीत के लिए कोई अधिकारी नहीं आया। इसके बाद शिक्षकों ने अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
पुलिस की तैनाती, इलाके में तनाव
आंदोलन को देखते हुए विकास भवन के सामने बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मुख्य गेट की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए। इस दौरान कई बार पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तीखी बहस की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारी लगातार अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। इससे विकास भवन और आसपास का इलाका काफी देर तक प्रदर्शनकारियों की आवाज से गूंजता रहा। पुलिस की ओर से स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश की गई। वहीं, आंदोलनकारी शिक्षकों ने साफ किया कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। फिलहाल विकास भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
सरकार के फैसले पर टिकी नजर
आईसीटी शिक्षकों के इस आंदोलन के बाद अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है। खास तौर पर छठे और सातवें चरण के शिक्षकों की नौकरी और नियुक्ति व्यवस्था को लेकर सरकार क्या फैसला लेती है, यह महत्वपूर्ण होगा। आंदोलनकारी शिक्षक एजेंसी व्यवस्था खत्म कर सीधे सरकारी अनुबंध आधारित नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। वहीं, मौजूदा अनुबंध खत्म होने और नई टेंडर प्रक्रिया की संभावना को लेकर शिक्षकों के बीच चिंता बनी हुई है। शिक्षक चाहते हैं कि लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों की सेवा को जारी रखने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही वे शिक्षा मंत्री और प्रशासन के साथ बातचीत की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत करती है या नहीं और उनकी मांगों को लेकर क्या कदम उठाया जाता है।