कोलकाता: पश्चिम बंगाल की जादवपुर यूनिवर्सिटी में दुर्गा पूजा से पहले कई कर्मचारियों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने रिटायरमेंट के बाद दोबारा नियुक्त किए गए कर्मचारियों का कार्यकाल 15 अक्टूबर से समाप्त करने का फैसला लिया है। इस संबंध में यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर नोटिफिकेशन जारी किया गया है। फैसले के बाद विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और लैब्स में कामकाज प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, कर्मचारियों की कमी के बीच इस निर्णय को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
15 अक्टूबर से समाप्त होगी कर्मचारियों की सेवा
जादवपुर यूनिवर्सिटी की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद पुनर्नियुक्ति के आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों को 14 अक्टूबर तक ही अपनी सेवाएं देने की अनुमति होगी। 15 अक्टूबर से उनका कार्यकाल समाप्त माना जाएगा। इसके बाद वे पहले की तरह अपने पदों पर काम नहीं कर सकेंगे। यूनिवर्सिटी के इस फैसले का असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिन्हें रिटायरमेंट के बाद विभागीय जरूरतों को देखते हुए दोबारा नियुक्त किया गया था। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति या उनका कार्यकाल बढ़ाने के लिए आने वाले नए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। ऐसे में इन कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
कर्मचारियों की कमी के बीच लिया गया फैसला
यूनिवर्सिटी के विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की कमी लंबे समय से कामकाज के लिए चुनौती बनी हुई थी। इसी जरूरत को देखते हुए रिटायरमेंट के बाद कुछ कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त किया गया था। इन कर्मचारियों की मदद से विभागों और प्रयोगशालाओं में रोजमर्रा के कामकाज को जारी रखने में सहायता मिल रही थी। अब 15 अक्टूबर से उनकी सेवाएं समाप्त होने के बाद संबंधित पद फिर से खाली हो जाएंगे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। नई नियुक्तियां नहीं होने की स्थिति में विभागों पर अतिरिक्त काम का दबाव बढ़ सकता है। इसका असर विश्वविद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ने की आशंका है।
दुर्गा पूजा की छुट्टियों से पहले बढ़ सकती है परेशानी
जादवपुर यूनिवर्सिटी में कर्मचारियों का कार्यकाल समाप्त होने की तारीख दुर्गा पूजा की छुट्टियों से ठीक पहले पड़ रही है। ऐसे में विभागों और लैब्स में कामकाज को व्यवस्थित रखना विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है। कर्मचारियों की कमी के कारण कई जरूरी प्रशासनिक कार्यों में देरी होने की आशंका जताई जा रही है। प्रयोगशालाओं में नियमित कामकाज और विभागीय जिम्मेदारियों को संभालने के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की जरूरत होती है। यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो उपलब्ध कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ सकता है। हालांकि, विश्वविद्यालय के कामकाज पर इसका वास्तविक कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
कर्मचारियों ने फैसले पर जताई आपत्ति
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी के एक शिक्षाकर्मी ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नई भर्तियां नहीं होने के कारण प्रबंधन को पहले से सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कार्यकाल बढ़ाना पड़ा था। ऐसे में नए कर्मचारियों की नियुक्ति किए बिना मौजूदा पुनर्नियुक्त कर्मचारियों को हटाने से विभागों का काम प्रभावित हो सकता है। कर्मचारियों की कमी के बीच अनुभवी कर्मियों की सेवाएं समाप्त होने से रोजमर्रा की जिम्मेदारियों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है। इस फैसले को लेकर कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ने की संभावना है। वहीं, नई भर्ती को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर भी नजर बनी हुई है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने क्या कहा?
यूनिवर्सिटी की ओर से इस फैसले के पीछे सरकारी निर्देशों का हवाला दिया गया है। प्रशासन के मुताबिक, 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को नौकरी पर बनाए रखने की अनुमति नहीं है। इसी निर्देश के तहत रिटायरमेंट के बाद पुनर्नियुक्त किए गए कर्मचारियों का कार्यकाल समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। जारी नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में ऐसे कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति या कार्यकाल विस्तार से जुड़े नए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। फिलहाल, कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त होने के बाद विभागों में कामकाज सुचारू रूप से जारी रखने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी, इस पर सबकी नजर है। यह फैसला विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज और कर्मचारियों की उपलब्धता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।