कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने जूट मिल कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर और किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की है। श्रम विभाग प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (PMAY-U 2.0) के अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (AHP) घटक के तहत इस प्रस्ताव को आगे बढ़ा रहा है। शुरुआती चरण में योजना को उत्तर 24 परगना और हुगली जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य लंबे समय से पुराने और जर्जर श्रमिक क्वार्टरों में रह रहे जूट मिल कर्मचारियों को सुरक्षित और बेहतर आवास उपलब्ध कराना है। प्रस्ताव के तहत पात्र श्रमिक परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराने की योजना है, जिससे उनकी लंबे समय से चली आ रही आवास संबंधी समस्या दूर हो सके।

दशकों से खराब आवासीय परिस्थितियों में रह रहे श्रमिक
पश्चिम बंगाल के कई जूट मिल इलाकों में कर्मचारी और उनके परिवार पिछले 80 से 100 वर्षों से उद्योग से जुड़े श्रमिक बस्तियों और क्वार्टरों में रह रहे हैं। इनमें कई आवास पुराने और जर्जर स्थिति में हैं। कई जगहों पर उचित सीवेज व्यवस्था, पर्याप्त आवास और निजी शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कुछ परिवारों को आज भी साझा शौचालय और सीमित सुविधाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में नई आवास योजना का फोकस श्रमिकों को सुरक्षित और व्यवस्थित घर उपलब्ध कराने पर है। सरकार की यह पहल लंबे समय से चली आ रही इन समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से लाई गई है।
3 लाख रुपये से कम सालाना आय वालों को मिलेगा लाभ
प्रस्ताव के मुताबिक, योजना का लाभ ऐसे जूट मिल कर्मचारियों को दिया जाएगा, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 3 लाख रुपये से कम है। इसके साथ ही परिवार के पास भारत में कहीं भी अपना पक्का मकान नहीं होना चाहिए। पात्रता के तहत यह भी देखा जाएगा कि परिवार के किसी सदस्य को पिछले 20 वर्षों में केंद्र सरकार की किसी सार्वजनिक आवास योजना के तहत आवास सहायता मिली है या नहीं। यानी केवल जूट मिल कर्मचारी होना ही योजना का लाभ लेने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। आवेदकों को तय पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद ही पात्र परिवारों को योजना में शामिल किया जाएगा।
30 से 48 वर्ग मीटर का होगा आवास
प्रस्तावित योजना के तहत प्रत्येक घर का कारपेट एरिया 30 से 48 वर्ग मीटर के बीच होगा। आवासीय इकाइयों को जी+3 प्रारूप में बनाए जाने का प्रस्ताव है। प्रत्येक घर में दो कमरे, एक रसोई और एक बाथरूम की व्यवस्था होगी। इस तरह श्रमिक परिवारों को एक व्यवस्थित आवासीय इकाई उपलब्ध कराने की योजना है। मौजूदा पुराने क्वार्टरों की तुलना में इन घरों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रस्ताव के अनुसार, एक घर के निर्माण की अनुमानित लागत 5 लाख रुपये से अधिक हो सकती है।
घर बनाने का खर्च केंद्र, राज्य और श्रमिक मिलकर उठाएंगे
प्रस्तावित फंडिंग व्यवस्था के तहत प्रत्येक घर के निर्माण में केंद्र सरकार की ओर से 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। वहीं, लाभार्थी जूट मिल कर्मचारी की ओर से 50 हजार रुपये का योगदान होगा। निर्माण की बाकी लागत पश्चिम बंगाल सरकार अपने स्तर से वहन करेगी। यानी घर के निर्माण का पूरा खर्च केंद्र, राज्य सरकार और लाभार्थी श्रमिक के बीच साझा किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रमिकों पर आर्थिक बोझ कम रखना और उन्हें किफायती दर पर पक्का घर उपलब्ध कराना है। हालांकि अंतिम वित्तीय व्यवस्था योजना की स्वीकृति और लागू होने वाली शर्तों के अनुसार तय होगी।
घर मिलने के बाद 5 साल तक बेच नहीं सकेंगे
योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को निर्माण पूरा होने के बाद घर आवंटित किया जाएगा। हालांकि आवंटित मकान को तुरंत बेचने की अनुमति नहीं होगी। प्रस्तावित शर्तों के अनुसार, लाभार्थी कम से कम पांच साल तक इस घर को बेच नहीं सकेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता से बनाया गया आवास वास्तविक जरूरतमंद परिवार के पास ही बना रहे। इससे योजना के तहत दिए गए घरों के तत्काल हस्तांतरण या बिक्री पर रोक रहेगी। आवास आवंटन और स्वामित्व से जुड़ी अन्य शर्तें योजना के अंतिम नियमों के अनुसार लागू होंगी।
हुगली और उत्तर 24 परगना में पायलट प्रोजेक्ट
फिलहाल योजना को जूट उद्योग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हुगली और उत्तर 24 परगना जिलों में पायलट आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। उत्तर 24 परगना में भाटपाड़ा, टीटागढ़ और कमरहाटी नगरपालिकाओं को जमीन से जुड़ी प्रक्रिया में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं हुगली में जूट मिल कर्मचारियों को आवेदन प्रक्रिया में मदद देने के लिए विशेष शिविर लगाए जाने की योजना है। श्रम विभाग जिला प्रशासन, स्थानीय निकायों, ट्रेड यूनियनों और जूट मिल प्रबंधन के साथ समन्वय करेगा। इसके जरिए पात्र श्रमिकों की पहचान और आवेदन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
करीब 8 हजार कर्मचारियों ने दिखाई रुचि
श्रम विभाग के मुताबिक, प्रस्तावित आवास योजना में अब तक करीब 8 हजार लोगों ने रुचि दिखाई है। इन इच्छुक लाभार्थियों के आवेदन लिए जाएंगे और उनकी पात्रता की जांच की जाएगी। आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद योग्य परिवारों को आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि जूट मिल कर्मचारियों को आवेदन करने और जरूरी दस्तावेज जमा करने में परेशानी न हो। इसके लिए स्थानीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। पायलट प्रोजेक्ट के अनुभव के आधार पर आगे योजना को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।
जूट उद्योग में श्रमिकों को बनाए रखने की भी कोशिश
आवास की समस्या को जूट उद्योग के सामने मौजूद लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों में से एक माना जाता है। खराब रहने की स्थिति और स्थायी आवास की कमी के कारण कुछ श्रमिकों के उद्योग से दूर होने की बात सामने आई है। ऐसे में स्थायी और बेहतर घर उपलब्ध कराने की पहल का एक उद्देश्य श्रमिकों की रहने की स्थिति में सुधार करना भी है। सुरक्षित आवास मिलने से श्रमिक परिवारों को लंबे समय के लिए स्थिर रहने का आधार मिल सकता है। सरकार की योजना जूट मिल कर्मचारियों के कल्याण के साथ-साथ राज्य के जूट उद्योग को मजबूत करने से भी जुड़ी है। हालांकि श्रमिकों की उद्योग में बने रहने पर इस योजना का वास्तविक प्रभाव इसके लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
योजना से बड़ी संख्या में श्रमिक परिवारों को मिलने की उम्मीद
पश्चिम बंगाल में करीब 118 जूट मिल और लगभग 3.5 लाख जूट मिल कर्मचारी होने की जानकारी दी गई है। इनमें बड़ी संख्या में कर्मचारी हुगली और उत्तर 24 परगना के जूट मिल क्षेत्रों से जुड़े हैं। प्रस्तावित आवास योजना के जरिए इनमें से पात्र और निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले परिवारों को पक्का घर देने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल 8 हजार लोगों की रुचि के बाद आवेदन और पात्रता सत्यापन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण होगी। योजना को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच वित्तीय भागीदारी का प्रस्ताव रखा गया है। अंतिम लाभार्थियों की संख्या आवेदन और पात्रता जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।