कोलकाता: में पश्चिम बंगाल की खस्ताहाल सड़कों और गड्ढों के कारण हो रही दुर्घटनाओं को लेकर कोलकाता उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका (PIL) दायर करने की अनुमति दे दी है। मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे की खंडपीठ के समक्ष इस मामले को उठाए जाने के बाद अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए दिसंबर महीने में इस पर सुनवाई की तारीख तय की है।
सड़कों की बदहाली से परेशान सेवानिवृत्त जज ने जताई इस्तीफे की पेशकश
सड़कों की दयनीय स्थिति का उदाहरण देते हुए हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज इंद्रजीत चटर्जी ने मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय को पत्र लिखकर ट्रिब्यूनल पद से इस्तीफा देने की इच्छा जताई है। उन्होंने पत्र में बताया कि सॉल्ट लेक स्थित आवास से जोका ट्रिब्यूनल तक आने-जाने में टूटी सड़कों और भारी ट्रैफिक के कारण डेढ़ घंटे से अधिक समय लग रहा है, जिससे दैनिक आवागमन बेहद कठिन हो गया है।
पूर्ववर्ती प्रशासनिक उपेक्षा को ठहराया गया जिम्मेदार
रविवार को राज्य की सड़क स्थिति पर सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पिछली प्रशासनिक उपेक्षा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और नगर विकास विभागों के अंतर्गत सड़कों का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया था, जिससे आम लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
दुर्गा पूजा से पहले 4 से 5 हजार सड़कों की मरम्मत का दावा
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम बाईपास का उदाहरण देते हुए बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और आदर्श आचार संहिता (MCC) की बाध्यता के कारण रुका काम 10 तारीख को वर्क ऑर्डर जारी कर शुरू किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि विकास संबंधी मंजूरियों के बाद दुर्गा पूजा के उपलक्ष्य में राज्यभर में लगभग 4 से 5 हजार सड़कों की मरम्मत का काम कराया जा रहा है।