कोलकाता: दुर्गा पूजा और आगामी त्योहारों के दौरान शहर में बढ़ने वाली भारी भीड़ और लोगों की आवाजाही को देखते हुए कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। महिला और बच्चों समेत संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए 125 पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। दो दिवसीय यह क्षमता निर्माण कार्यक्रम 5 और 6 अक्टूबर को कोलकाता के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को संवेदनशील मामलों से निपटने के साथ-साथ आधुनिक जांच तकनीकों में भी दक्ष बनाना था।
महिला-बच्चों की सुरक्षा से साइबर क्राइम तक ट्रेनिंग
कोलकाता पुलिस और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण का मुख्य विषय महिला एवं बाल सुरक्षा रहा। प्रशिक्षण में महिला और बच्चों से जुड़े अपराधों की जांच के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी गई। पुलिसकर्मियों को ऐसे मामलों में पीड़ितों के प्रति संवेदनशील और पेशेवर रवैया अपनाने की ट्रेनिंग दी गई। इसके साथ ही साइबर अपराधों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों को समझने पर भी जोर दिया गया। फॉरेंसिक साक्ष्यों की पहचान और उनके इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं को प्रशिक्षण में शामिल किया गया। आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी पुलिस प्रतिक्रिया के तरीकों पर भी चर्चा हुई। त्योहारों के दौरान संभावित जोखिमों को देखते हुए पुलिस की फ्रंटलाइन तैयारी मजबूत करने पर जोर दिया गया।
POCSO, BNS और BNSS की भी दी गई जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिसकर्मियों को POCSO कानून के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी गई।इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) से जुड़े प्रावधानों को भी समझाया गया। भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के तहत साक्ष्यों से जुड़े पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया गया। महिला और बच्चों से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन करने पर जोर रहा। जांच के दौरान साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उनकी उपयोगिता बनाए रखने के तरीकों पर भी जानकारी दी गई। पुलिसकर्मियों को शुरुआती स्तर पर सही कार्रवाई करने के लिए जरूरी कानूनी समझ विकसित करने का प्रयास किया गया।इसका उद्देश्य जांच को अधिक प्रभावी, कानूनसम्मत और पीड़ित-केंद्रित बनाना रहा।
पीड़ित-केंद्रित जांच पर विशेष जोर
प्रशिक्षण में पीड़ित की स्थिति और अनुभव को समझते हुए जांच आगे बढ़ाने पर खास जोर दिया गया। पुलिसकर्मियों को ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड रिस्पॉन्स यानी आघात से प्रभावित पीड़ितों के प्रति संवेदनशील प्रतिक्रिया के बारे में बताया गया। पहली पुलिस प्रतिक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी कदमों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। महिला और बच्चों से जुड़े मामलों में बातचीत और व्यवहार के दौरान संवेदनशीलता बनाए रखने की जरूरत बताई गई। पुलिस को यह समझाने पर जोर दिया गया कि शुरुआती प्रतिक्रिया जांच की दिशा को प्रभावित कर सकती है। पीड़ितों की सुरक्षा और उनकी गरिमा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।इससे पुलिस कार्रवाई को अधिक मानवीय और पेशेवर बनाने का लक्ष्य रखा गया।
डिजिटल सबूत और साइबर अपराध की जांच
आज के दौर में अपराध की जांच में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए प्रशिक्षण में डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई। पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध की जांच के दौरान डिजिटल सबूतों को समझने की जानकारी दी गई। साक्ष्यों की पहचान, संरक्षण और जांच प्रक्रिया में उनके उपयोग से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हुई। महिला और बच्चों से जुड़े मामलों में डिजिटल माध्यमों से सामने आने वाले अपराधों पर भी ध्यान दिया गया। आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय पर जोर दिया गया। इस प्रशिक्षण से पुलिस की आधुनिक जांच क्षमता को और मजबूत करने का प्रयास किया गया।
RRU के साथ MoU के बाद पहला बड़ा प्रशिक्षण
कोलकाता पुलिस और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के बीच MoU होने के बाद यह पहला बड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम बताया गया है। इस साझेदारी का उद्देश्य पुलिसकर्मियों की पेशेवर क्षमता को लगातार बेहतर करना है। कार्यक्रम में आधुनिक और वैज्ञानिक पुलिसिंग के तरीकों को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया। महिला और बाल सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया।साइबर अपराध और डिजिटल साक्ष्यों जैसे आधुनिक जांच क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया। पुलिस की क्षमता निर्माण प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। आने वाले समय में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
पुलिस कमिश्नर ने संवेदनशीलता को बताया जरूरी
समापन सत्र में कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय नंद ने महिला और बच्चों के खिलाफ अपराधों से निपटने में संवेदनशीलता पर जोर दिया। उन्होंने पुलिस कार्रवाई में सहानुभूति और संवेदनशील रवैये को महत्वपूर्ण बताया। ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड रिस्पॉन्स की जरूरत पर भी उन्होंने विशेष रूप से बात की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया बेहद अहम होती है। RRU के सहयोग से लगातार विशेष प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। पुलिसकर्मियों को बदलते अपराधों और आधुनिक जांच तकनीकों के अनुरूप तैयार करने की जरूरत बताई गई।कार्यक्रम के समापन पर पेशेवर और संवेदनशील पुलिसिंग को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
पूजा से पहले क्यों अहम है यह ट्रेनिंग?
दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। पंडालों और प्रमुख इलाकों में भीड़ बढ़ने के कारण पुलिस के सामने सुरक्षा की अतिरिक्त चुनौती रहती है। ऐसे में महिला, बच्चों और अन्य संवेदनशील समूहों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो जाती है।प्रशिक्षण के जरिए पुलिसकर्मियों को संभावित जोखिमों का पहले से आकलन करने के लिए तैयार किया गया। आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। साथ ही विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य पूजा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।
पुलिस का फोकस- पहले से तैयारी, बेहतर प्रतिक्रिया
पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम का फोकस केवल घटना के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। पुलिसकर्मियों को खतरे का आकलन यानी Risk Assessment करने के तरीकों से अवगत कराया गया Preventive Policing के जरिए संभावित घटनाओं को पहले ही रोकने पर जोर दिया गया।Emergency Response को बेहतर बनाने के लिए जरूरी प्रक्रियाओं पर भी प्रशिक्षण दिया गया।विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच Multidisciplinary Coordination को मजबूत करने की जरूरत बताई गई। इससे पुलिस को किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी। दुर्गा पूजा से पहले यह पहल कोलकाता पुलिस की तैयारियों और क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।