कोलकाता: पश्चिम बंगाल में महालया के अवसर पर दुर्गा पूजा के उत्सव को खास बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। गंगा के विभिन्न घाटों पर पितरों के तर्पण के दौरान महिषासुरमर्दिनी का पाठ सुनाया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्यपाल की उपस्थिति और कार्यक्रम के उद्घाटन के लिए उनका आभार जताया। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा बंगाल का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव है और इसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया श्रेय
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि दुर्गा पूजा ने दुनिया के मानचित्र पर अपनी खास जगह बनाई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और दुर्गा पूजा की भव्यता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाना सरकार का प्रमुख उद्देश्य है।
पितृ पक्ष के बजाय मातृ पक्ष से उत्सव की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल में इस बात पर चर्चा हुई थी कि दुर्गा पूजा से जुड़े इस विशेष उत्सव की शुरुआत पितृ पक्ष के बजाय मातृ पक्ष में की जानी चाहिए। इसी निर्णय के तहत महालया के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य बंगाल की परंपरा, संस्कृति और देवी दुर्गा की आराधना को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना है।
पूजा समितियों को एक लाख रुपये की सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने दुर्गा पूजा समितियों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। संबंधित पूजा समितियों को यह राशि 11 अक्टूबर से मिलनी शुरू हो जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि कोलकाता में 200 से अधिक पूजा समितियों ने मुख्यमंत्री की अपील पर यह आर्थिक सहायता लेने से इनकार कर दिया है।
राज्यभर में चार दिनों तक होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
मुख्यमंत्री के मुताबिक, अगले चार दिनों तक पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में उत्सव से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मालदा, दीघा, दुर्गापुर, कूचबिहार और विष्णुपुर समेत कई स्थानों पर सांस्कृतिक आयोजन होंगे। ये कार्यक्रम षष्ठी से पहले तक जारी रहेंगे। सरकार का प्रयास है कि बंगाल के अलग-अलग जिलों की स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को इन आयोजनों के माध्यम से मंच मिले।
12,400 से अधिक नई पूजा समितियों को भी मिलेगा अनुदान
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पहले कई पूजा समितियों को दुर्गा पूजा आयोजित करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता था। उन्होंने दावा किया कि इस बार राज्य में 12,400 से अधिक अतिरिक्त दुर्गा पूजा आयोजित की जा रही हैं। इन पूजा समितियों को भी सरकारी अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों की रूपरेखा बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक पहचान को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
40 हजार लोगों को आमंत्रित किया गया
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विशेष आयोजन के लिए करीब 40 हजार लोगों को आमंत्रित किया गया था। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में दुर्गा पूजा की ऐतिहासिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहुंचाने में पश्चिम बंगाल अग्रणी भूमिका निभाएगा।
24 तारीख तक विसर्जन करने की अपील
मुख्यमंत्री ने पूजा समितियों से 24 अक्टूबर तक प्रतिमा विसर्जन पूरा करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि गंगा घाटों पर विसर्जन के दौरान बंगाल की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का पूरा ध्यान रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने कामना की कि इस साल सभी लोगों की दुर्गा पूजा सुखद और आनंदमय हो।
पूजा समितियों को सम्मानित करने की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्गा पूजा समितियों के योगदान को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें पुरस्कृत करने की व्यवस्था भी की गई है। सरकार का उद्देश्य केवल उत्सव का आयोजन करना नहीं, बल्कि बंगाल की कला, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करते हुए उन्हें देश-दुनिया तक पहुंचाना भी है।
विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य
अपने संबोधन के अंत में सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत का निर्माण सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने भारत विरोधी शक्तियों को परास्त करने की बात कहते हुए देश के विकास और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने के संकल्प को दोहराया।