माथाभांगा: पश्चिम बंगाल के माथाभांगा महकमा क्षेत्र में नदियों का जलस्तर कम होने के साथ ही नदी कटाव की समस्या गंभीर होती जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बारिश के दौरान नदी का पानी बढ़ने पर कटाव शुरू हो जाता है और जलस्तर घटने के बाद भी यह सिलसिला नहीं रुकता। इससे नदी किनारे रहने वाले लोगों में लगातार डर बना हुआ है। कई इलाकों में खेती की जमीन कटकर नदी में समा रही है। कटाव के कारण ग्रामीणों को अपनी जमीन और घर दोनों खोने की चिंता सता रही है। लोगों का आरोप है कि समस्या की जानकारी सिंचाई विभाग और जनप्रतिनिधियों को देने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों ने जल्द तटबंध निर्माण की मांग की है।
मानसाई समेत कई नदियों का बढ़ा कहर
माथाभांगा महकमा में मानसाई, सुटुंगा, धरला और नेंदा समेत कई छोटी-बड़ी नदियां बहती हैं। इन नदियों के कटाव की वजह से हर साल सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि नदी में समा जाती है। इसका सीधा असर किसानों और नदी किनारे रहने वाले परिवारों पर पड़ता है। कई बार लोगों को अपना घर और जमीन छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की स्थिति बन जाती है। निशिगंज, पारडुबी, जोरपाटकी, गोपालपुर, हाजराहाट, खलीसामारी, भाऐरथाना और छोटो शालबाड़ी ग्राम पंचायत के कई नदी किनारे वाले इलाके कटाव से प्रभावित हैं। इस साल भी बारिश के दौरान इन इलाकों में कटाव की समस्या सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल स्थिति दोहराई जाती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
एक-दो जगह तटबंध से नहीं सुलझेगी समस्या
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी कटाव का दायरा काफी बड़ा है, इसलिए केवल एक-दो जगह तटबंध बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। ग्रामीणों के मुताबिक, कई हिस्से लगातार कटाव की चपेट में हैं और बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। नदी का पानी बढ़ने के साथ मिट्टी खिसकने लगती है, जबकि पानी कम होने के बाद भी किनारों का कटाव जारी रहता है। इससे खेती योग्य जमीन लगातार कम होती जा रही है। ग्रामीणों ने कई बार सिंचाई विभाग और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्या रखी है। इसके बावजूद उन्हें स्थायी राहत नहीं मिल पाई है। लोगों की मांग है कि पूरे प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कर व्यापक स्तर पर तटबंध और कटावरोधी काम कराया जाए।
घर और जमीन खोने का सता रहा डर
माथाभांगा-1 ब्लॉक की जोरपाटकी पंचायत के शिवपुर पानागुड़ी इलाके के रहने वाले जहीरुद्दीन मियां और अबुबक्कर मियां ने अपनी परेशानी बताई। उनका कहना है कि नदी में पानी बढ़ने के साथ कटाव शुरू होता है और पानी घटने के बाद भी जमीन खिसकती रहती है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले परिवारों को हर समय अपना घर और जमीन खोने का डर बना रहता है। ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले कई वर्षों से इलाके में तटबंध बनाने की मांग की जा रही है। इसके बावजूद अब तक तटबंध का निर्माण नहीं हुआ है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले समय में और अधिक जमीन नदी में समा सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग की है।
सिंचाई विभाग ने भेजा तटबंध का प्रस्ताव
माथाभांगा महकमा सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने माना कि इलाके में नदी कटाव की समस्या मौजूद है। अधिकारी के अनुसार, कटाव प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर तटबंध निर्माण की योजना तैयार की गई है। इस योजना को फंड की मांग के साथ राज्य सरकार के पास भेजा गया है। विभाग का कहना है कि मंजूरी और आवश्यक राशि मिलने के बाद संबंधित क्षेत्रों में काम शुरू किया जाएगा। इसके अलावा मानसून खत्म होने के बाद कुछ तटबंधों की मरम्मत का काम भी शुरू करने की योजना है। विभाग के इस आश्वासन के बाद अब स्थानीय लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, ग्रामीणों की मांग है कि काम जल्द शुरू किया जाए, ताकि उनकी जमीन और घरों को नदी कटाव से बचाया जा सके।