मैनागुड़ी: पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के मैनागुड़ी में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने शिक्षक को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी शिक्षक पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। मामला 2024 का बताया जा रहा है, जब आरोपी ने 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा को पढ़ाई में मदद और विशेष क्लास के बहाने बुलाया था।
स्पेशल क्लास के नाम पर छात्रा को बुलाने का आरोप
मामला मैनागुड़ी थाना क्षेत्र का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 10वीं कक्षा की छात्रा की पढ़ाई में मदद करने और बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष क्लास लेने के बहाने उसे बुलाया गया था। आरोप है कि मौके पर छात्रा के अकेले होने का फायदा उठाकर शिक्षक ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद छात्रा को कथित तौर पर धमकी भी दी गई थी कि यदि उसने इस बारे में किसी को बताया तो उसे परीक्षा में नुकसान पहुंचाया जाएगा। इस डर के कारण छात्रा ने तत्काल घटना की जानकारी परिवार को नहीं दी।
परिवार को बताने के बाद दर्ज हुआ मामला
बाद में छात्रा ने अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिवार की ओर से मैनागुड़ी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत संबंधित कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की। जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज कराया और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्य जुटाए। अभियोजन पक्ष ने अदालत में पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए।
पॉक्सो अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा
मामले की सुनवाई जलपाईगुड़ी की विशेष पॉक्सो अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ अपना पक्ष रखा। अदालत ने सुनवाई के बाद शिक्षक को दोषी करार दिया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर 1 लाख रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जुर्माने की राशि पीड़िता की सहायता और पुनर्वास से संबंधित प्रावधानों के तहत इस्तेमाल किए जाने का निर्देश दिया गया है।
शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठा सवाल
इस फैसले के बाद शैक्षणिक संस्थानों में नाबालिग विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हुई है। मामले में अदालत का फैसला पॉक्सो कानून के तहत दोषसिद्धि के बाद आया है। नाबालिगों से जुड़े यौन अपराधों में पॉक्सो कानून के तहत विशेष अदालतों में सुनवाई की व्यवस्था की गई है, ताकि ऐसे मामलों का निपटारा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा सके।