जलपाईगुड़ी: उत्तर बंगाल के एक मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थित मर्ग की खराब व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। आरोप है कि मर्ग का कूलिंग और एसी सिस्टम करीब दो सप्ताह से खराब पड़ा है। इसके चलते वहां रखे शवों से तेज दुर्गंध फैल रही है, जिसका असर आसपास के रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहा है। संजय नगर कॉलोनी और आसपास के निवासियों का कहना है कि दुर्गंध इतनी तेज है कि घरों में रहना और खाना-पीना मुश्किल हो गया है। कई लोगों ने दावा किया कि उन्हें दिन-रात अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखनी पड़ रही हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने बदबू के कारण मतली और सिर चकराने जैसी परेशानी होने की भी बात कही है।
दो मर्गों में 46 शव रखे होने का दावा
मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जिला अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में दो अलग-अलग मर्ग संचालित हैं। जिला अस्पताल में वर्ष 2018 में करीब 80 लाख रुपए की लागत से 16 शवों की क्षमता वाला मर्ग तैयार किया गया था। बाद में जरूरत बढ़ने पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में 30 शवों की क्षमता वाला एक और मर्ग बनाया गया। फिलहाल दोनों मर्गों में कुल 46 शव रखे होने की जानकारी सामने आई है। अस्पताल से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इनमें कई शव ऐसे हैं, जिनकी अब तक पहचान या दावेदारी नहीं हो सकी है। नियमों के मुताबिक, निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद लंबे समय से दावेदारहीन शवों का विधिवत अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। हालांकि, सूत्रों का आरोप है कि पिछले करीब एक वर्ष में दोनों मर्गों से किसी भी लावारिस शव का निस्तारण नहीं किया गया।
कूलिंग सिस्टम खराब होने के बाद बढ़ी दुर्गंध
बताया जा रहा है कि करीब दो सप्ताह पहले सुपर स्पेशियलिटी मर्ग का कूलिंग सिस्टम और एसी खराब हो गया। इसके बाद वहां रखे शवों को उचित तापमान पर रखने में परेशानी शुरू हुई। अस्पताल से जुड़े लोगों के मुताबिक, इसके बाद दुर्गंध की समस्या और गंभीर हो गई। गर्मी और नमी के बीच शवों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त कूलिंग व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में मर्ग का कूलिंग सिस्टम लंबे समय तक खराब रहने से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
संजय नगर के लोगों का दावा- घर में रहना मुश्किल
स्थानीय निवासी अनिता सेन ने कहा कि मर्ग से दूरी होने के बावजूद हवा के साथ दुर्गंध उनके घर तक पहुंच रही है। उनका दावा है कि बदबू के कारण सिर चकराने लगता है और खाना तक मुश्किल हो गया है। परिवार को लगातार खिड़की-दरवाजे बंद रखने पड़ रहे हैं। एक अन्य स्थानीय निवासी पवित्र भट्टाचार्य ने कहा कि मर्ग की मशीनें पहले भी खराब हो चुकी हैं और उस समय भी आसपास के लोगों को इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्थायी मरम्मत के बजाय समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
PWD को भेजा गया पत्र, विधायक ने दिया हस्तक्षेप का आश्वासन
अस्पताल प्रबंधन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मर्ग के वातानुकूलन और फ्रीजिंग सिस्टम के रखरखाव की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन है। सिस्टम की तत्काल मरम्मत के लिए संबंधित विभाग को पत्र भेजे जाने की जानकारी दी गई है। मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज की रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष और जलपाईगुड़ी के बीजेपी विधायक अनंतदेव अधिकारी ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मर्ग की फ्रीजिंग व्यवस्था में समस्या की जानकारी उन्हें मिली है और यह जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत कर समस्या का समाधान कराने तथा दावेदारहीन शवों के निस्तारण की प्रक्रिया तेज करने की बात कही है। अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि खराब कूलिंग सिस्टम को कितनी जल्दी ठीक किया जाता है और लंबे समय से रखे दावेदारहीन शवों के निस्तारण को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है।