कोलकाता: नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान से जुड़ा मामला अब कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच गया है। पुराने मामलों में गिरफ्तारी के बाद मिलन प्रधान की ओर से अदालत में सुरक्षा की मांग की गई थी। इसी मामले की सुनवाई गुरुवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान खेजुरी थाने से जुड़े एक पुराने मामले में उन्हें ‘श्योन अरेस्ट’ किए जाने का मुद्दा भी उठा। अदालत ने इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए स्थिति स्पष्ट की। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 12 अक्टूबर तक मिलन प्रधान को किसी नए मामले में गिरफ्तार नहीं किया जा सकेगा।
2007 की शिकायत पर इतने साल बाद कार्रवाई क्यों?
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने पुराने मामले में इतने वर्षों बाद कार्रवाई किए जाने पर सवाल उठाया। अदालत के सामने यह बात आई कि संबंधित शिकायत 2007 की है, जबकि अब इस मामले में कार्रवाई की जा रही है। न्यायमूर्ति ने पूछा कि अगर इतने पुराने मामले में गिरफ्तारी वारंट मौजूद था, तो इतने वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अदालत ने इस देरी को लेकर हैरानी जताई। रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि 2007 में शिकायत दर्ज होने के बाद जांच अधिकारी ने इतने लंबे समय बाद कदम क्यों उठाया।
मिलन के वकील ने उठाया नए मामले का मुद्दा
सुनवाई के दौरान मिलन प्रधान की ओर से पेश वकील अयान भट्टाचार्य ने अदालत के सामने एक नए खेजुरी मामले का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ नया मामला सामने आया है और इसकी जानकारी पहले की सुनवाई के दौरान नहीं दी गई थी। वकील के मुताबिक, यह मामला सामने आने से मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर दोबारा चिंता पैदा हुई। इसी वजह से उन्होंने अदालत से सुरक्षा की मांग की। उनका कहना था कि पुराने मामलों को लेकर पहले से ही कार्रवाई हो रही है और नए मामले में भी गिरफ्तारी की आशंका बनी हुई है।
राज्य सरकार ने कहा- कुछ भी नहीं छिपाया
मिलन प्रधान के वकील की दलील के जवाब में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने कहा कि सरकार ने अदालत से कोई जानकारी नहीं छिपाई है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित मामले का उल्लेख राज्य की रिपोर्ट में किया गया था। राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि मामले को लेकर दी गई तारीख संबंधी जानकारी को लेकर भ्रम हुआ है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपने पक्ष को अदालत के सामने रखा। इसके बाद न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि अदालत को संबंधित रिपोर्ट नहीं मिली थी और अगर रिपोर्ट मिली होती तो उसका उल्लेख जरूर किया जाता।
राज्य के वकील ने जांच अधिकारी को लेकर क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील राजदीप मजूमदार ने यह भी कहा कि मामले का मौजूदा जांच अधिकारी नया है। उन्होंने अदालत के सामने यह दलील रखी कि जिस समय ये मामले दर्ज हुए थे, उस समय परिस्थितियां अलग थीं। राज्य की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि संबंधित मामलों में फिलहाल आगे कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस पर अदालत ने स्थिति को दोबारा स्पष्ट किया। कोर्ट के निर्देश के बाद मिलन प्रधान के खिलाफ नए मामले में तत्काल गिरफ्तारी की कार्रवाई पर रोक बनी हुई है।
पुराने मामलों में पहले भी हुई गिरफ्तारी
मिलन प्रधान को 18 सितंबर को पूर्व मेदिनीपुर के चंडीपुर इलाके से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, उनकी गिरफ्तारी 2007 के नंदीग्राम आंदोलन के दौरान दर्ज पुराने मामलों में जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर हुई। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेजा गया। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक, उनके खिलाफ उस दौर से जुड़े कई मामले दर्ज थे। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण, सबूत मिटाने और हथियार से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के तहत ही होगा।
पांच मामलों में राज्य ने कार्रवाई नहीं करने की बात कही
मिलन प्रधान ने गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अपने खिलाफ लंबित अन्य मामलों में हाईकोर्ट से सुरक्षा मांगी थी। इससे पहले राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया था कि जिन पांच मामलों को लेकर सुरक्षा की मांग की गई है, उनमें मिलन प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य ने यह भी कहा कि इन मामलों में वे मुख्य आरोपी नहीं हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने तत्काल किसी अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं बताई थी। अब ताजा सुनवाई में खेजुरी मामले से जुड़े ‘श्योन अरेस्ट’ को लेकर भी अदालत ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
12 अक्टूबर तक नई गिरफ्तारी पर रोक
24 सितंबर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कलकत्ता हाईकोर्ट ने खेजुरी के पुराने मामले में मिलन प्रधान के खिलाफ किए गए ‘श्योन अरेस्ट’ को प्रभावी नहीं करने का निर्देश दिया है। साथ ही 12 अक्टूबर तक उन्हें किसी नए मामले में गिरफ्तार नहीं करने की बात कही गई है। अदालत की ओर से यह निर्देश ऐसे समय आया है जब नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर चुनावी प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, जिस मामले में मिलन प्रधान पहले से न्यायिक हिरासत में हैं, उसकी जमानत और हिरासत से जुड़े मामले अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
मिलन प्रधान के खिलाफ 2007 के नंदीग्राम आंदोलन के दौरान दर्ज पुराने मामलों में गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात सामने आई है। सितंबर 2026 में उपचुनाव से पहले इन वारंटों के आधार पर उनकी गिरफ्तारी हुई। इसके बाद उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया और अन्य मामलों में गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की। राज्य सरकार ने बाद की सुनवाई में कई मामलों में कार्रवाई नहीं करने की बात कही। वहीं, खेजुरी के एक पुराने मामले में ‘श्योन अरेस्ट’ को लेकर फिर अदालत में विवाद उठा। हाईकोर्ट ने अब इस मामले में भी तत्काल सुरक्षा देते हुए 12 अक्टूबर तक नई गिरफ्तारी पर रोक की स्थिति स्पष्ट की है।