कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान पूरा होने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया, जबकि विपक्षी दलों ने कई मतदान केंद्रों पर कथित अनियमितता, एजेंटों को बाहर निकालने और बूथ कब्जाने जैसे आरोप लगाए हैं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बताया शांतिपूर्ण मतदान
मतदान के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि नंदीग्राम और रेजीनगर में चुनाव के दौरान किसी बड़े स्तर की हिंसा की स्थिति नहीं बनी। उन्होंने कहा कि मतदान के दौरान बहस या धक्का-मुक्की जैसी छोटी घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन पहले के चुनावों में सामने आने वाली हत्या और बमबाजी जैसी घटनाएं इस बार देखने को नहीं मिलीं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में बीजेपी की बड़ी जीत का दावा भी किया। उन्होंने कहा कि पार्टी यहां रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज कर सकती है। वहीं रेजीनगर में भी उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी की करीब 30 हजार वोटों के अंतर से जीत का दावा किया।
रेजीनगर में हुमायूं कबीर को हिरासत में लेने पर विवाद
रेजीनगर में मतदान के दौरान आम जनता उन्नयन पार्टी के विधायक हुमायूं कबीर को पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, हुमायूं कबीर ने मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी और अपने समर्थकों को बूथों में प्रवेश नहीं दिए जाने का आरोप लगाया था।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाकर चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करता है तो पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। वहीं विपक्षी नेताओं ने हुमायूं कबीर की हिरासत को लेकर सवाल उठाए।
विपक्ष ने लगाए बूथ कब्जाने के आरोप
रेजीनगर में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मतदान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि कुछ मतदान केंद्रों से उनके पोलिंग एजेंटों को कथित तौर पर बाहर कर दिया गया। कुछ स्थानों पर मतदाताओं को मतदान से रोकने के भी आरोप लगाए गए।
कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल्लाहाली काफ़ी ने कथित वोट लूट के विरोध में थाने के सामने धरना दिया। वहीं तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी रबिउल आलम चौधरी ने दावा किया कि कई मतदान केंद्रों से विपक्षी एजेंटों को बाहर कर दिया गया।
नंदीग्राम में भी विपक्ष ने उठाए सवाल
नंदीग्राम में कांग्रेस और वाम दलों की ओर से भी मतदान प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आईं। कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान ने कुछ इलाकों में पार्टी कार्यकर्ताओं और एजेंटों के साथ कथित तौर पर मारपीट किए जाने का आरोप लगाया।
विपक्ष की ओर से सोनाचूड़ा और भांगाबेड़िया सहित कुछ इलाकों में एजेंटों को बूथ से बाहर निकाले जाने का आरोप लगाया गया। कुछ महिला मतदाताओं की वोटर स्लिप को लेकर भी शिकायतें सामने आईं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
97 शिकायतें चुनाव अधिकारी के पास पहुंचीं
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और लोगों की ओर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में कुल 97 शिकायतें दर्ज कराई गईं। विपक्ष ने मतदान प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का हवाला देते हुए दोनों सीटों पर दोबारा मतदान कराने की मांग की है।
वहीं बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए मतदान को शांतिपूर्ण बताया है। अब सभी की नजर चुनाव आयोग की रिपोर्ट और मतगणना के नतीजों पर है।
मतदान प्रतिशत पर भी रही नजर
शाम 5 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नंदीग्राम में 79.39 प्रतिशत और रेजीनगर में 78.42 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इससे पहले 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में 94.5 प्रतिशत और रेजीनगर में 92.7 प्रतिशत मतदान हुआ था।
अब दोनों सीटों के नतीजों का इंतजार है। उपचुनाव की मतगणना 9 अक्टूबर को होगी, जिसके बाद साफ होगा कि मतदाताओं ने किस उम्मीदवार के पक्ष में अपना फैसला सुनाया।