कोलकाता: दिल्ली में चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े विरोध-प्रदर्शन को लेकर वामपंथी नेता निहा बोरो ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। कोलकाता में आयोजित वामपंथी नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस में निहा बोरो ने दिल्ली में चल रहे आंदोलन को पार्टी की सीमाओं से बाहर ले जाकर व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन बनाने की अपील की।
दिल्ली के आंदोलन में कई विचारधाराओं के लोग शामिल
निहा बोरो ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शन में योगेंद्र यादव समेत कई लोग शामिल हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन को किसी एक पार्टी तक सीमित रखने के बजाय व्यापक एकता बनाने की कोशिश की गई है। उनके मुताबिक, कपिल सिब्बल से लेकर वृंदा करात तक अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग इस आंदोलन में शामिल हुए हैं।
‘ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लोगों में नाराजगी’
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर निहा बोरो ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करने की जिम्मेदारी जिस व्यक्ति की है, वही एक राजनीतिक दल के पक्ष में लोकतंत्र के खिलाफ काम कर रहे हैं। मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर विरोध करने की अपील की।
जंतर-मंतर और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल
दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी निहा बोरो ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल बनाया गया है, लेकिन वहां प्रदर्शन करने पहुंचने वाले लोगों पर पुलिस कार्रवाई कर रही है। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी उन्होंने आरोप लगाया।
‘महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार’
निहा बोरो ने आरोप लगाया कि दिल्ली के आंदोलन के दौरान एक पत्रकार के साथ एक एसीपी द्वारा कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया। उनका दावा है कि इस मामले में शिकायत दर्ज कराने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा। अपने अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें भी एक गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया और अन्य लोगों को वहां से उतार दिया गया।
नई पीढ़ी के आंदोलन में उतरने का दावा
नई पीढ़ी को लेकर निहा बोरो ने कहा कि युवाओं पर शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मसम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों के स्तर पर लगातार हमले हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इसी के विरोध में नई पीढ़ी आंदोलन का हिस्सा बन रही है। उनके मुताबिक, युवा अब केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के व्यापक मुद्दों को लेकर भी आवाज उठा रहे हैं।
श्रीलंका-बांग्लादेश के आंदोलनों का दिया उदाहरण
निहा बोरो ने श्रीलंका और बांग्लादेश के आंदोलनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों में नई पीढ़ी बदलाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रही है। यूरोप से लेकर भारत तक छात्र और युवा अपने अधिकारों के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों को लेकर भी विरोध दर्ज करा रहे हैं।
‘यह किसी एक पार्टी का नहीं, नागरिकों का आंदोलन’
निहा बोरो ने कहा कि भाजपा और आरएसएस के खिलाफ व्यापक लोकतांत्रिक एकता बनाने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी एक संगठन, पार्टी या व्यक्ति का आंदोलन नहीं है, बल्कि नागरिकों का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि जब आम लोग आंदोलन करते हैं और राजनीतिक दल भी उसमें शामिल होते हैं, तो आंदोलन की एकजुटता और मजबूत होती है।
10 अक्टूबर के आंदोलन को लेकर बड़ी एकता की अपील
निहा बोरो ने 10 अक्टूबर के प्रस्तावित कार्यक्रम को भी व्यापक एकता के साथ आयोजित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विरोध केवल कोलकाता या दिल्ली तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे देश में इस तरह के आंदोलन खड़े किए जाने चाहिए।
‘काउंटडाउन शुरू हो चुका है’
भाजपा और आरएसएस पर हमला बोलते हुए निहा बोरो ने आरोप लगाया कि डर का माहौल बनाकर सत्ता में बने रहने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान लोगों में जिस तरह का उत्साह और प्रतिक्रिया दिखाई दे रही है, उससे पता चलता है कि लोगों का डर कम हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह संकेत है कि ‘काउंटडाउन शुरू हो चुका है।’
ज्ञानेश कुमार को लेकर फिर तीखा हमला
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और निर्देशों का हवाला देते हुए निहा बोरो ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के दिन अब खत्म हो गए हैं। उन्होंने भाजपा के पक्ष में कथित तौर पर काम करने वालों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें भी आने वाले समय में इसका परिणाम भुगतना पड़ सकता है।