पांडबेश्वर : पश्चिम बर्दवान जिले के पांडबेश्वर विधानसभा के अंतर्गत मधाईपुर, फरीदपुर, दुर्गापुर और पांडबेश्वर के विभिन्न घाटों से अवैध रेत तस्करी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार अजय नदी के घाटों से रेत निकालकर दूसरे जिलों में भेजी जा रही थी, जिसके लिए बीरभूम (बीरभूम) जिले का चालान अवैध रूप से इस्तेमाल किया जा रहा था। स्थानीय लोगों की सतर्कता के कारण इस अवैध कारोबार का पर्दाफाश हुआ और 10 ट्रकों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।
स्थानीय लोगों की मुस्तैदी से पकड़े गए 10 ट्रक
रात के अंधेरे में और स्थानीय लोगों की नजरों से बचकर बालू की अवैध निकासी और परिवहन का काम चल रहा था। जब इस खेल की भनक स्थानीय निवासियों को लगी, तो उन्होंने भारी विरोध जताते हुए बालू से भरे 10 ट्रकों को बीच रास्ते में ही रोक लिया। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने उन ट्रकों को अपने कब्जे में लेकर स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
वीरभूम के चालान पर पश्चिम बर्दवान से रेत की निकासी
इस पूरे गोरखधंधे की सबसे बड़ी बात यह है कि वेस्ट बर्दवान में अजय नदी के घाटों से रेत की ढुलाई की जा रही थी, जबकि चालान बीरभूम जिले के दिखाए जा रहे थे। सरकारी रेवेन्यू की भारी हेराफेरी और ऐसे नकली कागज़ात के आधार पर चल रहे गैर-कानूनी रेत के कारोबार ने एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विधायक जितेंद्र तिवारी का तीखा हमला
पूरे मामले की जानकारी सामने आने के बाद पांडबेश्वर के विधायक जितेंद्र तिवारी ने इस पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया और बालू तस्करों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए स्थानीय निवासियों की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने इस अवैध धंधे में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस की भूमिका पर उठते सवाल
अवैध बालू तस्करी की इतनी बड़ी गतिविधि चलने के बावजूद स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। लोगों का कहना है कि पुलिस की मिलीभगत या उदासीनता के बिना इस तरह से खुलेआम दूसरे जिले के चालान पर अवैध बालू का परिवहन संभव नहीं है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं को जल्द से जल्द बेनकाब किया जाए।
सरकारी राजस्व को भारी नुकसान
इस प्रकार की अवैध बालू तस्करी से राज्य सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर अजय नदी के घाटों से हो रही अंधाधुंध बालू की उठान से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर भी गंभीर खतरा मंडराने लगा है। जनता और जनप्रतिनिधियों के मुखर होने के बाद अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाता है।