कोलकाता: पश्चिम बंगाल में इस बार दुर्गा पूजा के जश्न का रंग कुछ अलग ही अंदाज में देखने को मिला। रोशनी से नहाए पंडालों, ढोल-ढाक की गूंज और स्वादिष्ट व्यंजनों की महक के बीच राज्यभर में लोगों ने जमकर जाम छलकाए। आलम यह रहा कि महालया के दिन से लेकर विजयादशमी तक शराब की बिक्री ने पिछले सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। आबकारी विभाग से छनकर आ रही जानकारियों के मुताबिक, पूजा के महज इन चंद दिनों में ही सैकड़ों करोड़ रुपये की शराब गटक ली गई। शहर के नुक्कड़ पर बनी शराब की दुकानों से लेकर महंगे पब और रेस्टोरेंट्स तक, हर जगह बस खरीदारों की लंबी कतारें ही नजर आईं, जिसने न केवल शराब कारोबारियों के चेहरे खिला दिए बल्कि सरकारी खजाने को भी रिकॉर्ड राजस्व से भर दिया।
काउंटरों पर लगी लंबी कतारें और शहरों में दिखा गजब का उत्साह
महालया की सुबह से ही शराब की दुकानों पर जो चहल-पहल शुरू हुई थी, वह षष्ठी और सप्तमी आते-आते भारी भीड़ में बदल गई। अष्टमी और नवमी की रात तो कई व्यस्त इलाकों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। दशमी की शाम विसर्जन से ठीक पहले स्थिति यह हो गई कि कई मशहूर दुकानों में मनपसंद ब्रांड्स की अलमारियां पूरी तरह खाली हो चुकी थीं। बिक्री के मामले में राजधानी कोलकाता और उससे सटे हावड़ा, हुगली और दोनों 24 परगना सबसे आगे रहे। इसके अलावा उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग जैसे पर्यटन केंद्रों में भी छुट्टियों के दौरान बाहर से आए सैलानियों और स्थानीय लोगों ने जमकर खरीदारी की। रातभर पंडाल घूमने के बाद रेस्टोरेंट्स और पबों में बैठने का चलन इस बार भी युवाओं और परिवारों के सिर चढ़कर बोला।
बीयर और पसंदीदा ब्रांड्स की जबर्दस्त मांग
अक्टूबर की हल्की उमस भरी दोपहरी और रात की गहमागहमी ने बीयर की मांग को आसमान पर पहुंचा दिया। कई जगहों पर तो बीयर की बोतलें और कैन इतनी तेजी से बिके कि दुकानदारों को डिपो से आनन-फानन में अतिरिक्त गाड़ियां मंगवानी पड़ीं। वहीं दूसरी ओर, इस बार आम शराब की जगह लोगों का रुझान प्रीमियम व्हिस्की, रम और वोदका जैसे बेहतर ब्रांड्स की तरफ ज्यादा देखने को मिला। दुकानदारों का कहना है कि लोग अब त्योहार के मौके पर पैसे बचाने के बजाय अच्छा वक्त बिताने को तवज्जो दे रहे हैं। इसके साथ ही एक बड़ा बदलाव यह भी दिखा कि पंडालों के भारी धक्के और भीड़ से बचने के लिए बहुत से लोगों ने अपने घरों में ही दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ छोटी-छोटी महफिलें जमाईं, जिसके चलते त्योहार शुरू होने से पहले ही बोतलों का अच्छा-खासा स्टॉक घरों में पहुंचा दिया गया था।
सरकारी खजाने को मिली मजबूती और कड़ा रहा पहरा
पश्चिम बंगाल सरकार के राजस्व में आबकारी विभाग की कमाई हमेशा से एक बड़ा सहारा रही है, और दुर्गा पूजा के इस सीजन ने उस पर सोने पर सुहागा जैसा काम किया। महज एक हफ्ते के भीतर जमा हुए इस भारी टैक्स ने राजकोषीय लक्ष्य को बड़ी राहत दी है। मांग को पूरा करने के लिए 'बेवको' (BEVCO) के गोदामों से दुकानों तक माल की सप्लाई चौबीसों घंटे चालू रखी गई ताकि कहीं कोई कमी न रह जाए। इसके साथ ही त्योहारी भीड़ का फायदा उठाकर कोई नकली या मिलावटी माल न खपा दे, इसके लिए आबकारी विभाग की टीमों ने बॉर्डर इलाकों और संवेदनशील ठिकानों पर लगातार गश्त भी जारी रखी, जिससे पूरा कारोबार शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया।