कोलकाता: आरजी कर अस्पताल में महिला प्रशिक्षु डॉक्टर की बलात्कार और हत्या के मामले में कोलकाता हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति शंपा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने पीड़िता के परिवार द्वारा दर्ज कराई गई पृथक प्राथमिकी (FIR) की जांच का जिम्मा भी राज्य पुलिस से छीनकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मुख्य मामले की जांच अदालत की निगरानी में सीबीआई कर रही है, तो उसी घटना से जुड़ी अलग प्राथमिकी की जांच राज्य पुलिस के पास नहीं रह सकती।
पुलिस की 'चालाकी' और अज्ञानता पर कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने खड़दह थाने के जांच अधिकारी (IO) और प्रभारी निरीक्षक (IC) को अदालत में पेश होने पर जमकर फटकार लगाई। अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब हाईकोर्ट पहले ही विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर सीबीआई जांच की निगरानी कर रहा है, तब पुलिस ने अलग से एफआईआर क्यों दर्ज की? न्यायमूर्ति सरकार ने पुलिस की अज्ञानता और कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए संकेत दिए कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आने वाले दिनों में विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए जा सकते हैं।
जल्दबाजी में अंतिम संस्कार और सबूत मिटाने का आरोप
पीड़िता के परिवार का शुरुआत से ही आरोप रहा है कि 9 अगस्त 2024 को हुई इस जघन्य घटना के बाद साक्ष्यों को मिटाने और मामले को दबाने की नीयत से आनन-फानन में शव का दाह-संस्कार कराया गया था। पानीहाटी की भाजपा विधायक और पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन प्रभावशाली नेताओं ने साजिश के तहत ऐसा किया। परिवार की इसी शिकायत के आधार पर अलग एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने अब सीबीआई के विस्तृत जांच के दायरे में शामिल कर दिया है।
बैरकपुर से सियालदह कोर्ट ट्रांसफर होंगी फाइलें
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, राज्य पुलिस को इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और फाइलें तुरंत सीबीआई को सौंपनी होंगी। चूंकि मुख्य रेप-मर्डर केस का ट्रायल कोलकाता की सियालदह अदालत में चल रहा है, इसलिए बैरकपुर अदालत में लंबित इस अलग एफआईआर से संबंधित सभी दस्तावेजों को भी सियालदह कोर्ट में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है। अब दोनों मामलों की सुनवाई एक ही जज के समक्ष होगी।
फैसले पर परिवार ने जताई संतुष्टि
मामले की जांच सीबीआई को मिलने के बाद पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने अदालत के फैसले पर संतोष व्यक्त किया है। पूर्व में गठित एसआईटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट द्वारा जांच पूरी तरह से सीबीआई को सौंपे जाने से अब घटना के दिन से लेकर अंतिम संस्कार तक में शामिल सभी प्रभावशाली चेहरों और अधिकारियों की भूमिका सीबीआई के रडार पर आ गई है।