कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला डॉक्टर की दुष्कर्म और हत्या के मामले में अंतिम संस्कार से जुड़े विवाद की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने खड़दह थाने में दर्ज उस FIR की जांच CBI की विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपने का निर्देश दिया है, जिसमें पीड़िता के अंतिम संस्कार में कथित जल्दबाजी और सबूतों को नष्ट करने की आशंका से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने न्याय मिलने की उम्मीद जताई। हालांकि, उन्होंने CBI की अब तक की जांच पर भी सवाल उठाए हैं और पूर्व जांच अधिकारी सीमा पाहुजा की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अंतिम संस्कार से जुड़ी FIR अब CBI SIT के पास
पीड़िता के पिता की शिकायत के आधार पर अगस्त 2026 में खड़दह थाने में एक नई FIR दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 2024 में उनकी बेटी के शव का अंतिम संस्कार जल्दबाजी में कराया गया और इस प्रक्रिया से साक्ष्य के संभावित नष्ट होने की आशंका थी। FIR में आपराधिक साजिश और साक्ष्य से छेड़छाड़ समेत कई धाराएं लगाई गई थीं। इस मामले में पूर्व पानिहाटी विधायक निर्मल घोष, नगरपालिका पार्षद सोमनाथ डे और संजीव मुखर्जी के नाम सामने आए थे। पुलिस ने तीनों के खिलाफ कार्रवाई की थी। हालांकि, उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और अदालत में इन आरोपों का अंतिम निर्धारण होना बाकी है। अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक ही घटनाक्रम की जांच राज्य पुलिस और CBI समानांतर रूप से नहीं कर सकते। खड़दह थाने के जांच अधिकारी को आगे कोई कार्रवाई नहीं करने और मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड CBI SIT को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस की समानांतर जांच पर उठाए सवाल
न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने खड़दह थाने के प्रभारी और जांच अधिकारी को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया था। अदालत ने उनकी ओर से दी गई सफाई पर असंतोष जताते हुए भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की चेतावनी दी। दरअसल, मई 2026 में हाईकोर्ट पहले ही तीन सदस्यीय CBI SIT गठित कर चुका था। इस टीम को 9 अगस्त 2024 की घटना से लेकर अगले दिन पीड़िता के अंतिम संस्कार तक के घटनाक्रम की जांच करने का निर्देश दिया गया था। परिवार की ओर से साक्ष्य नष्ट किए जाने और घटना को दबाने या उसकी गंभीरता कम करने के प्रयासों के आरोप भी जांच के दायरे में रखे गए थे। अब खड़दह थाने में दर्ज FIR को भी इसी CBI SIT के हवाले कर दिया गया है। अदालत ने यह भी कहा है कि यदि इस मामले में कोई आरोपी हिरासत में है, तो CBI SIT यह तय करेगी कि उसकी हिरासत आगे जरूरी है या नहीं।
तीन IPS अधिकारियों के निलंबन के बाद भी जांच पर सवाल
मई 2026 में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आरजी कर मामले की जांच में कथित लापरवाही के आरोपों को लेकर तीन IPS अधिकारियों—तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल, तत्कालीन डीसीपी (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता और डीसीपी (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी—के निलंबन की घोषणा की थी। राज्य सरकार ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की बात भी कही थी।हालांकि, इन निलंबनों को अंतिम संस्कार मामले की CBI जांच का प्रत्यक्ष कारण बताना उचित नहीं होगा। अंतिम संस्कार से जुड़ी FIR अगस्त 2026 में अलग शिकायत के आधार पर दर्ज हुई थी, जबकि हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2026 में इसे पहले से चल रही CBI SIT जांच में शामिल करने का निर्देश दिया। पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने ताजा घटनाक्रम के बाद भी CBI की जांच को लेकर अपनी असंतुष्टि जाहिर की है। उन्होंने पूर्व CBI जांच अधिकारी सीमा पाहुजा की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता बेटी को न्याय दिलाना है।
अंतिम संस्कार से जुड़े आरोपों की जांच पर टिकी नजर
आरजी कर मामले में 9 अगस्त 2024 को महिला पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर का शव अस्पताल परिसर में मिला था। घटना के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। मामले में नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को दोषी ठहराया गया और उसे शेष जीवन तक कारावास की सजा सुनाई गई। अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अंतिम संस्कार से जुड़े आरोपों की जांच भी CBI SIT के दायरे में आ गई है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि उस समय क्या घटनाक्रम हुआ, क्या किसी नियम या प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ और शिकायत में लगाए गए साक्ष्य नष्ट करने अथवा साजिश के आरोपों में कितनी सच्चाई है। पीड़िता का परिवार लंबे समय से मामले के सभी पहलुओं की जांच की मांग करता रहा है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब CBI SIT की जांच और अदालत में पेश होने वाली रिपोर्ट पर सबकी नजर रहेगी।