सिलीगुड़ी: दुर्गा पूजा को लेकर सिलीगुड़ी में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के ऐसे इलाकों में भी अनोखे पंडाल तैयार किए जा रहे हैं, जहां खाली जगह की काफी कमी है। सुभाषपल्ली में इस बार सुंदरबन की कहानी को पंडाल के जरिए दिखाया जाएगा। यहां रॉयल बंगाल टाइगर की दहाड़ के साथ हिरणों की दौड़ और पक्षियों की आवाज लोगों को सुनाई देगी। वहीं, हाकिमपाड़ा में पुरी के जगन्नाथ देव के रथ की तर्ज पर पंडाल तैयार हो रहा है। यहां श्रद्धालुओं को रथ मेले जैसा माहौल देखने को मिलेगा। दोनों पूजा समितियां अपनी-अपनी थीम के जरिए लोगों को आकर्षित करने की तैयारी में जुटी हैं।
सुभाषपल्ली में दिखेगा सुंदरबन का नजारा
सिलीगुड़ी के प्रमुख और व्यस्त इलाकों में शामिल सुभाषपल्ली में इस बार सुंदरबन की झलक देखने को मिलेगी। इलाके में सड़क के दोनों ओर बहुमंजिला इमारतें हैं और खाली जमीन बेहद कम है। इसी बीच बांधव संघ ने ‘सुंदरबन की रूपकथा’ थीम पर पूजा पंडाल तैयार करने का फैसला किया है। पंडाल में मैंग्रोव जंगल जैसा वातावरण तैयार करने के लिए अलग-अलग सामग्री से पेड़ बनाए जा रहे हैं। बांस, लकड़ी, कपड़ा, धागा, कागज और पायदान जैसी चीजों का इस्तेमाल सजावट में किया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि पंडाल में प्रवेश करते ही लोगों को शहर के बीच सुंदरबन जैसा अनुभव कराने की कोशिश होगी। पंडाल में जंगल, नदी और वहां रहने वाले लोगों के जीवन से जुड़े कई दृश्य देखने को मिलेंगे। इस अनोखी थीम के जरिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी का ध्यान आकर्षित करने की तैयारी है।
दहाड़ेगा रॉयल बंगाल टाइगर
बांधव संघ इस बार अपनी पूजा का 79वां वर्ष मना रहा है और इसी मौके पर सुंदरबन की पूरी कहानी दिखाने की तैयारी है। पंडाल में रॉयल बंगाल टाइगर के दो बड़े मॉडल लगाए जाएंगे। लाइट और साउंड के जरिए इन बाघों की दहाड़ को पंडाल में जीवंत किया जाएगा। इसके अलावा नदी में नाव चलने और हिरणों के दौड़ने जैसे दृश्य भी तैयार किए जाएंगे।मगरमच्छ के धूप सेंकने, मधुमक्खियों और मधुमक्खी के छत्ते के दृश्य भी पंडाल का हिस्सा होंगे। बंदरों के साथ-साथ सुंदरबन में रहने वाले लोगों के संघर्ष को भी अलग-अलग मॉडल के जरिए दिखाया जाएगा। इस तरह पंडाल में सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि सुंदरबन के प्राकृतिक जीवन और वहां के लोगों की कहानी भी दिखाई जाएगी। आयोजकों को उम्मीद है कि यह प्रस्तुति पूजा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींचेगी।
लाइट-साउंड से जीवंत होगी सुंदरबन की कहानी
सुंदरबन की थीम को प्रभावी बनाने के लिए लाइट और साउंड का खास इस्तेमाल किया जा रहा है। कोलकाता समेत अलग-अलग जगहों से कई इंसानी मॉडल और मुखौटे भी मंगाए गए हैं। इन मॉडलों के जरिए सुंदरबन के लोगों की जिंदगी और उनके संघर्ष को दिखाने की कोशिश की जाएगी। पंडाल में अलग-अलग दृश्यों के साथ आवाजों का तालमेल बनाया जाएगा, जिससे पूरा माहौल और ज्यादा वास्तविक लगे। इस खास प्रस्तुति की पूरी कल्पना और निर्माण का काम कलाकार बापन घोष की देखरेख में किया जा रहा है। थीम के अनुरूप देवी दुर्गा की प्रतिमा भी तैयार की जाएगी, ताकि प्रतिमा और पंडाल की कहानी एक-दूसरे से जुड़ी नजर आए। आयोजकों के मुताबिक पंडाल और रोशनी का काम काफी आगे बढ़ चुका है। उन्हें उम्मीद है कि शहर के बीच तैयार हो रहा यह पंडाल बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सभी को पसंद आएगा।
हाकिमपाड़ा में दिखेगा रथ मेले का नजारा
सुभाषपल्ली के पास ही हाकिमपाड़ा में भी दुर्गा पूजा के लिए खास तैयारी की जा रही है। यह इलाका भी बहुमंजिला इमारतों से घिरा हुआ है और यहां खाली जगह की काफी कमी है।इसी जगह अरुणोदय संघ की ओर से पुरी के जगन्नाथ देव के रथ की तर्ज पर पूजा पंडाल बनाया जा रहा है। पंडाल का ढांचा बांस, लकड़ी, प्लाईवुड और कपड़े की मदद से तैयार किया जा रहा है। पंडाल में रथ मेले का ऐसा माहौल तैयार किया जाएगा, जिससे लोगों को मेले में पहुंचने जैसा अनुभव हो। रथ की सजावट और आसपास की व्यवस्था में पारंपरिक मेले की झलक दिखाने की कोशिश की जा रही है। आयोजकों के मुताबिक पूजा पंडाल में आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक माहौल के साथ मेले का आनंद भी मिलेगा। इस थीम के जरिए शहर के बीच पुरी की रथ यात्रा और मेले की याद को जीवंत करने की कोशिश की जा रही है।
खाजा, गजा और तले-भुने पकवानों की दुकानें
अरुणोदय संघ की ओर से तैयार किए जा रहे पंडाल में रथ मेले के साथ पारंपरिक खान-पान की भी झलक देखने को मिलेगी। पंडाल परिसर में खाजा, गजा, बताशा-केला और तले-भुने पकवानों की दुकानों के मॉडल बनाए जाएंगे। इन दुकानों के जरिए रथ मेले में लगने वाली पारंपरिक दुकानों का माहौल तैयार किया जाएगा। क्लब के सचिव सलिल चक्रवर्ती के मुताबिक इस बार पूजा का 64वां वर्ष है। इस वर्ष उनकी प्रस्तुति ‘दुर्गा के दालान में रथ का मेला’ थीम पर आधारित है। पंडाल के अंदर पारंपरिक शैली की देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। आयोजकों का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ मेले की संस्कृति को जोड़ने की कोशिश की गई है। उन्हें उम्मीद है कि यह थीम सिलीगुड़ी के लोगों को पसंद आएगी और पूजा के दौरान पंडाल में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचेंगे।