कोलकाता: दो साल के अंतराल के बाद न्यूटाउन का चर्चित सनातनी दुर्गोत्सव एक बार फिर भव्य रूप में आयोजित होने जा रहा है। वर्ष 2022 में शुरू हुई इस पूजा का आयोजन 2024 और 2025 में नहीं हुआ था। अब दो साल बाद एक बार फिर पूजा की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। आयोजकों का दावा है कि पिछली सरकार के दौरान अनिच्छा और कथित अड़चनों के कारण पूजा का आयोजन नहीं हो सका था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘सनातन से विज्ञान’ होगी इस बार की थीम
न्यूटाउन सनातनी दुर्गोत्सव कमेटी ने इस बार की थीम ‘सनातन से विज्ञान’ रखी है। पूजा पंडाल के जरिए प्राचीन भारत की विज्ञान परंपरा, ज्ञान-विज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच संबंध को दर्शाने की तैयारी है। आयोजकों का कहना है कि नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान-विज्ञान के इतिहास से जोड़ना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।
शून्य और दशमलव से लेकर आयुर्वेद तक दिखेगी झलक
आयोजकों के मुताबिक पंडाल में शून्य की अवधारणा, दशमलव के विकास, आयुर्वेद और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। उनका कहना है कि आधुनिक विज्ञान को केवल पश्चिमी दुनिया से जोड़कर देखने के बजाय प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों और ज्ञान परंपरा को भी लोगों के सामने लाना जरूरी है।
ISRO के साथ स्पेस साइंस की खास प्रदर्शनी
पूजा के साथ इस बार विज्ञान से जुड़ी विशेष प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र होगी। आयोजकों के अनुसार ISRO के सहयोग से स्पेस साइंस पर प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। सोमवार को ISRO के डायरेक्टर के हाथों विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रस्तावित है। एक हाईटेक वाहन के जरिए प्रदर्शनी की शुरुआती झलक भी सामने लाई जाएगी।
सुब्रत गुप्ता बोले- यह किसी टकराव का विषय नहीं
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार सुब्रत गुप्ता ने कहा कि यह आयोजन किसी टकराव का विषय नहीं है। भारत के ज्ञान, विज्ञान और इतिहास को सामने रखना ही मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने प्राचीन भारत में यज्ञवेदी के निर्माण की वैज्ञानिक माप व्यवस्था और आयुर्वेद के विस्तार जैसे उदाहरणों का उल्लेख किया। उनका कहना है कि भारतीय ज्ञान परंपरा के इन पहलुओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है।
21 सितंबर को प्रदर्शनी का उद्घाटन, 27 को स्पेस रिसर्च पर कार्यक्रम
आयोजकों के अनुसार 21 सितंबर को विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन होगा। 13 तारीख से पंडाल खोलने की योजना है, जबकि 27 सितंबर को अंतरिक्ष अनुसंधान से संबंधित विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी पूरे दिन दर्शकों के लिए खुली रहेगी। इसके साथ मेले का भी आयोजन किया जाएगा।
600 VVIP को भेजा गया न्योता
सूत्रों के मुताबिक पूजा को लेकर करीब 600 VVIP को निमंत्रण भेजा गया है। प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और 21 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल बीजेपी के कई विधायकों और मंत्रियों को भी न्योता भेजे जाने की बात कही जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी रहेगी नजर
VVIP मेहमानों के संभावित आगमन को देखते हुए पूजा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी भी हो सकती है। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अंतिम तस्वीर प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट होनी बाकी है।
सनातन और आधुनिक तकनीक का संगम होगा खास आकर्षण
आयोजकों के मुताबिक इस बार पूजा को सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रखा गया है। सनातन परंपरा, भारतीय इतिहास और आधुनिक विज्ञान-तकनीक को एक साथ प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है। इसी के जरिए नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान-विज्ञान की परंपरा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
दो साल बाद फिर शुरू हुई पूजा, राजनीतिक चर्चा भी तेज
दो साल तक पूजा का आयोजन नहीं होने के बाद अब दोबारा इसकी तैयारियां शुरू होने से इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। आयोजकों की ओर से पिछली सरकार के दौरान कथित अड़चनों का जिक्र किया गया है। वहीं, सरकार बदलने के बाद पूजा दोबारा शुरू होने को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हो रही है। पूजा को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।