कोलकाता: कोलकाता स्थित केंद्रीय सरकारी संस्थान Satyajit Ray Film and Television Institute (एसआरएफटीआई) में रविवार शाम एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई। बंगीय हिंदू जागरण की ओर से निकाली गई रैली को लेकर संस्थान परिसर के आसपास विवाद बढ़ गया। रैली के दौरान कथित तौर पर पथराव की घटना सामने आई, जिसके बाद कई छात्र घायल हो गए। घटना को लेकर संस्थान के छात्रों में नाराजगी देखने को मिली। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने पहले ही प्रशासन को रैली को लेकर आशंका से अवगत कराया था। इसके बावजूद संस्थान की ओर से कथित तौर पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। घटना के बाद छात्रों ने संस्थान के कुलपति और रजिस्ट्रार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
पथराव में चार छात्रों के घायल होने का दावा
छात्रों की ओर से जारी पत्र में आरोप लगाया गया है कि रैली में शामिल लोगों की ओर से कथित तौर पर ईंटें फेंकी गईं। छात्रों का कहना है कि इस पथराव में चार विद्यार्थी घायल हुए हैं। इनमें से दो छात्रों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। छात्रों के मुताबिक, घटना में संस्थान के सुरक्षा कर्मचारियों और कुछ शिक्षकों को भी चोटें आई हैं। इस घटना के बाद परिसर में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। छात्रों का आरोप है कि अगर समय रहते प्रशासन ने उनकी शिकायतों पर ध्यान दिया होता तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता था। छात्रों ने पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
छात्रों ने पहले ही प्रशासन को किया था आगाह
एसआरएफटीआई छात्र संघ और सामान्य छात्रों की ओर से कुलपति को लिखे गए पत्र में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि छात्रों ने बार-बार प्रशासन को इस प्रस्तावित रैली के बारे में जानकारी दी थी। छात्रों का दावा है कि उन्होंने संभावित तनाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जताई थी। इसके बावजूद संस्थान प्रबंधन की ओर से कथित तौर पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। छात्रों का कहना है कि रैली के दौरान हुई घटना ने उनकी आशंकाओं को सही साबित किया। अब छात्र प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। इसी को लेकर छात्रों ने कुलपति और रजिस्ट्रार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
रैलीकार के खिलाफ पुलिस शिकायत की मांग
घटना के बाद छात्रों ने कई मांगों को लेकर संस्थान प्रशासन को पत्र सौंपा है। छात्रों की प्रमुख मांग है कि कथित तौर पर पथराव करने वाले रैलीकार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाए। उनका कहना है कि छात्रों, शिक्षकों और सुरक्षा कर्मचारियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। छात्रों ने घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग उठाई गई है। छात्रों का कहना है कि परिसर में दोबारा ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में तत्काल कदम उठाने की अपील की है।
एबीजीपी और रैली के खिलाफ सार्वजनिक बयान की मांग
छात्रों ने एबीजीपी और रैली में शामिल लोगों की कथित भूमिका को लेकर भी नाराजगी जताई है। पत्र में मांग की गई है कि संस्थान प्रशासन पत्रकार वार्ता कर घटना की निंदा करे। छात्रों का कहना है कि प्रशासन को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि संस्थान में हिंसा या किसी भी तरह की अराजकता स्वीकार नहीं की जाएगी। छात्रों ने इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए प्रशासन से उनसे माफी मांगने की भी मांग की है। उनका कहना है कि इस घटना से छात्रों में डर और असुरक्षा का माहौल बना है। इसलिए संस्थान प्रबंधन को अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए। छात्रों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
VC और रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग
घटना के बाद छात्रों का गुस्सा अब संस्थान के शीर्ष प्रशासन के खिलाफ भी सामने आया है। छात्र संघ और सामान्य छात्रों ने इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। छात्रों ने कहा है कि जब प्रशासन को पहले से रैली की जानकारी दी गई थी, तो सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए। इसी सवाल को लेकर छात्रों ने कुलपति और रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि संस्थान में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अगर प्रशासन इस जिम्मेदारी को निभाने में विफल रहा है तो उसे जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए। फिलहाल घटना को लेकर एसआरएफटीआई परिसर में तनाव और छात्रों की नाराजगी बनी हुई है।