नई दिल्ली: चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठे सवाल अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।
चुनाव आयोग के सामूहिक निर्णय पर सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग में लिए जाने वाले फैसलों के लिए निर्धारित सामूहिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि कुछ फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त के स्तर से लिए गए, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति या मंजूरी नहीं ली गई।
CJI सूर्यकांत के सामने उठाया गया मामला
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि कानून के मुताबिक आयोग जैसे बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय में निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए और मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर फैसला होना चाहिए।
याचिका में अनुच्छेद 324 का हवाला
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को मिली सामूहिक शक्तियों का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त किस अधिकार के तहत उन शक्तियों का इस्तेमाल अकेले कर सकते हैं, जिन्हें कानून आयोग को एक संस्था के तौर पर सौंपता है।
2023 के कानून का भी दिया गया हवाला
याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। यदि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद हो, तो बहुमत की राय के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का दावा
याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कई फैसलों और कदमों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक याचिका में ऐसी करीब 14 आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। इन दावों पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
ECINet को लेकर भी विवाद
मामला चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर उठे सवालों के बीच सामने आया है। चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर चुनावी डेटा और मतदाता सूची से जुड़े डिजिटल सिस्टम के केंद्रीकरण को लेकर चिंताएं सामने आई थीं। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि ECINet विकेंद्रीकृत व्यवस्था पर आधारित है और वैधानिक जिम्मेदारियां संबंधित अधिकारियों के पास ही रहती हैं।
आयोग ने बनाई समीक्षा समिति
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को ECINet की कानून और नियमों के अनुरूप कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की थी। इस समिति की अध्यक्षता एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त कर रहे हैं और इसमें IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल करने का प्रावधान है।
अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह करेगा। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने चुनाव आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की भूमिकाओं तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों से जुड़े सवाल रखे जा सकते हैं।