नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस में विभाजन के बाद पार्टी के नाम और 'जोड़ा फूल' (घास पर फूल) चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने के निर्वाचन आयोग (EC) के अंतरिम फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश में तुरंत हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह पार्टी के स्वामित्व विवाद को बिना किसी अनावश्यक देरी के जल्द से जल्द सुलझाने के लिए अपनी समयसीमा (Timeline) से अदालत को अवगत कराए।
"निर्णय में देरी न हो, जल्द से जल्द अंतिम फैसला लें" – सीजेआई सूर्यकांत
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग (ECI) के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, "आप यह जानकर अदालत को बताएं कि इस मामले के अंतिम निस्तारण (Final Settlement) के लिए आयोग को कितना समय चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों की समीक्षा के लिए आवश्यक समय जरूर लें, लेकिन यह प्रक्रिया किसी भी हाल में बहुत लंबी नहीं खींचनी चाहिए। निर्णय जल्द लेना ही बेहतर होगा।"अदालत ने कहा कि आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए दोनों गुटों के प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है, ऐसे में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए समयबद्ध फैसला जरूरी है।
कपिल सिब्बल ने आयोग के आदेश पर उठाए सवाल, जस्टिस बागची ने दिया 'शिवसेना' का हवाला
ममता बनर्जी गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि क्या उपचुनावों की प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग इस तरह का अंतरिम आदेश जारी कर सकता है? इसके जवाब में न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने स्पष्ट किया कि चूंकि पश्चिम बंगाल में उपचुनावों की घोषणा हो चुकी है, इसलिए चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।वहीं, दूसरे गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि इससे पहले शिवसेना विवाद के मामले में भी चुनाव आयोग ने इसी प्रकार का अंतरिम निर्णय लिया था। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा, "शिवसेना के मामले में निर्णय में हुई देरी का क्या परिणाम हुआ था, यह हम सब देख चुके हैं।"
17 सितंबर को फ्रीज हुआ था प्रतीक, अलग-अलग नामों और सिंबल पर चुनाव लड़ रहे दोनों गुट
उल्लेखनीय है कि 17 सितंबर को ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाली निर्वाचन आयोग की पीठ ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके पारंपरिक प्रतीक चिन्ह 'जोड़ा फूल' को फ्रीज कर दिया था। आयोग ने निर्देश दिया था कि आगामी उपचुनावों में दोनों में से कोई भी गुट इस नाम व सिंबल का उपयोग नहीं कर सकेगा।इस आदेश के बाद ममता बनर्जी नीत गुट 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉलर' प्रतीक चिन्ह के साथ चुनावी मैदान में उतरा है। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' (खाम) चिन्ह पर चुनाव लड़ रहा है।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते तय की है।