कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी नतीजों के हिसाब से SIR और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अपना रुख बदलती है। सुवेंदु अधिकारी ने इसे 'सुविधा की राजनीति' करार देते हुए कहा कि किसी चुनावी प्रक्रिया को केवल तभी सही नहीं माना जा सकता, जब उसका परिणाम किसी राजनीतिक दल के पक्ष में आए।
केरल और बंगाल के संदर्भ में कांग्रेस पर सवाल
सुवेंदु अधिकारी ने अपने बयान में केरल का उदाहरण देते हुए कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाया। उनका दावा है कि केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले मोर्चे ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को समर्थन दिया था और फर्जी या संदिग्ध प्रविष्टियों को हटाने की कार्रवाई को चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करने वाला कदम बताया था। वहीं, पश्चिम बंगाल में इसी तरह की प्रक्रिया पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। SIR को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों की आपत्तियों के बीच अधिकारी ने यही अंतर अपने आरोप का आधार बनाया है।
'जीत में SIR सही, हार में गलत' का आरोप
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के रुख को दोहरे मानदंड से जोड़ते हुए कहा कि जब SIR की प्रक्रिया से राजनीतिक लाभ मिलता है, तब इसे मजबूत और निष्पक्ष व्यवस्था बताया जाता है, लेकिन जब चुनावी नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आते तो उसी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठने लगते हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी संस्थाओं पर भरोसा परिणामों के आधार पर नहीं बदला जाना चाहिए।
बंगाल में SIR को लेकर पहले भी विपक्ष पर निशाना
पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच सुवेंदु अधिकारी पहले भी विपक्षी दलों पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा था कि SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक विवाद पैदा करने की कोशिश बताया था।
27 लाख नाम हटाए जाने के मुद्दे पर भी बयान
SIR को लेकर बंगाल में करीब 27 लाख नाम हटाए जाने का मुद्दा भी राजनीतिक बहस के केंद्र में है। सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि इन नामों को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत न्यायिक अधिकारियों की निगरानी में हुई और इसके लिए बीजेपी या चुनाव आयोग को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। दूसरी ओर, विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
कांग्रेस और सहयोगी दलों को दी संस्थाओं पर भरोसा रखने की नसीहत
सुवेंदु अधिकारी ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रियाओं पर भरोसा परिस्थितियों के अनुसार नहीं बदला जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक नुकसान होने पर चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।