कोलकाता: बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन एक बार फिर पश्चिम बंगाल में अपनी किताब के प्रकाशन को लेकर चर्चा में हैं। उनकी नई किताब अब राज्य में प्रकाशित हुई है। यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि करीब 23 साल पहले उनकी चर्चित पुस्तक ‘द्विखंडित’ को लेकर पश्चिम बंगाल में बड़ा विवाद खड़ा हुआ था।
‘द्विखंडित’ पर 2003 में लगी थी रोक
तस्लीमा नसरीन की आत्मकथा के तीसरे हिस्से ‘द्विखंडित’ को वर्ष 2003 में पश्चिम बंगाल में प्रतिबंधित कर दिया गया था। तत्कालीन सरकार ने किताब के कुछ हिस्सों को लेकर आपत्ति जताई थी। सरकार का कहना था कि इसके प्रकाशन और प्रसार से सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की आशंका है।
किताब की बिक्री और प्रचार पर भी लगी थी पाबंदी
प्रतिबंध के बाद केवल किताब के प्रकाशन पर ही रोक नहीं लगी, बल्कि इसकी बिक्री और प्रचार-प्रसार पर भी कार्रवाई की गई। उस समय कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट इलाके में पुलिस ने छापेमारी कर ‘द्विखंडित’ की 2,500 से अधिक प्रतियां जब्त की थीं। किताब के कुछ अंशों को लेकर विवाद काफी बढ़ गया था।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, 2005 में हटी रोक
‘द्विखंडित’ पर प्रतिबंध का मामला अदालत तक पहुंचा। सितंबर 2005 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने किताब पर लगी रोक को हटा दिया। इसके बाद पश्चिम बंगाल में इसके प्रकाशन और बिक्री का रास्ता खुल गया। इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और साहित्यिक अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा गया।
किताब विवाद के बीच तस्लीमा को छोड़ना पड़ा था कोलकाता
‘द्विखंडित’ को लेकर शुरू हुआ विवाद बाद के वर्षों में तस्लीमा नसरीन के कोलकाता प्रवास से जुड़े विवादों से भी जुड़ गया। वर्ष 2007 में उनके लेखन और मौजूदगी के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद उन्हें कोलकाता छोड़ना पड़ा था। इसके बाद लंबे समय तक वह शहर से दूर रहीं।
करीब दो दशक बाद फिर कोलकाता लौटीं तस्लीमा
जुलाई 2026 में तस्लीमा नसरीन करीब 19 साल के अंतराल के बाद कोलकाता वापस लौटीं। उन्होंने कोलकाता से अपने पुराने भावनात्मक जुड़ाव को कई मौकों पर जाहिर किया है। उनके लिए यह शहर लंबे समय से साहित्यिक और व्यक्तिगत जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
नई किताब के प्रकाशन से फिर लौटी पुरानी यादें
अब पश्चिम बंगाल में उनकी नई किताब के प्रकाशित होने के बाद एक बार फिर तस्लीमा नसरीन और उनके लेखन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। एक तरफ यह उनके साहित्यिक सफर में नए अध्याय के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इससे ‘द्विखंडित’ और उससे जुड़े पुराने विवाद की याद भी ताजा हो गई है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस से जुड़ा रहा है लेखन
तस्लीमा नसरीन का लेखन लंबे समय से सामाजिक रूढ़ियों, महिलाओं के अधिकार, धर्म और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा है। उनके लेखन को लेकर जहां समर्थकों ने इसे बेबाक और साहसी आवाज बताया है, वहीं कई बार उनके विचारों पर तीखी आपत्तियां भी सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल में उनकी नई किताब का प्रकाशन इसी लंबे साहित्यिक और सामाजिक संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।