अलीपुरद्वार: पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार स्थित बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी को फिर से बसाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से करीब तीन साल की एक बाघिन को बक्सा लाया गया है। यह पश्चिम बंगाल में बाघों के पुनर्वास के लिए शुरू किए गए पहले बड़े पुनर्प्रवेश कार्यक्रम का हिस्सा है।
वाल्मीकि से बक्सा तक पहुंची बाघिन
बाघिन को वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में ट्रैंक्विलाइज कर सुरक्षित तरीके से पिंजरे में रखा गया। इसके बाद उसे हवाई मार्ग से पश्चिम बंगाल लाया गया। बाघिन को पहले उत्तर प्रदेश के गोरखपुर एयरपोर्ट तक सड़क मार्ग से पहुंचाया गया और वहां से भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए हासीमारा लाया गया। इसके बाद सड़क मार्ग से उसे बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंचाया गया।
रेडियो कॉलर से होगी लगातार निगरानी
बक्सा पहुंचने के बाद बाघिन की स्वास्थ्य जांच की गई। उसके गले में रेडियो कॉलर भी लगाया गया है, जिसके जरिए वन विभाग उसकी गतिविधियों और लोकेशन पर लगातार नजर रखेगा। निगरानी के लिए रेडियो टेलीमेट्री, कैमरा ट्रैप और मैदानी टीमों की मदद ली जाएगी।
सॉफ्ट रिलीज के जरिए जंगल के माहौल में ढलने का मौका
बाघिन को सीधे जंगल में छोड़ने के बजाय पहले एक सुरक्षित सॉफ्ट एनक्लोजर में रखा गया। इस क्षेत्र में उसके लिए पर्याप्त शिकार उपलब्ध कराया गया है, ताकि वह नए वातावरण के साथ धीरे-धीरे सामंजस्य स्थापित कर सके। इसके बाद उसे बक्सा के जंगल में छोड़ा गया है।
लंबे समय बाद बक्सा में बाघों को बसाने की कोशिश
बक्सा टाइगर रिजर्व में लंबे समय से स्थायी बाघ आबादी नहीं रही है। हालांकि, यह क्षेत्र भूटान और असम के जंगलों से जुड़ा महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर है। 2021 में यहां करीब दो दशक के अंतराल के बाद बाघ देखे जाने की खबर सामने आई थी। अब वैज्ञानिक तरीके से बाघों को फिर से बसाने की योजना के तहत यह कदम उठाया गया है।
आगे और बाघ लाने की तैयारी
वन विभाग की योजना बक्सा में एक स्थायी और आत्मनिर्भर बाघ आबादी तैयार करने की है। अधिकारियों के मुताबिक आने वाले समय में अन्य राज्यों से भी बाघ और बाघिनों को यहां लाने की योजना है। इसके लिए शिकार आधार, पानी की उपलब्धता, जंगल की स्थिति और मानव हस्तक्षेप जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
2 अक्टूबर को हुआ बाघ पुनर्प्रवेश कार्यक्रम
2 अक्टूबर 2026 को बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्प्रवेश कार्यक्रम के तहत बाघिन को जंगल में छोड़ा गया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी में यह कार्यक्रम हुआ। इसे बक्सा के ऐतिहासिक टाइगर लैंडस्केप को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक चरण के रूप में देखा जा रहा है।