कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने रोजगार, शिक्षा और सामाजिक कल्याण को लेकर कई अहम फैसले लिए हैं। सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के 14,454 खाली पदों पर भर्ती को मंजूरी दी गई। सरकार का दावा है कि इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया अगले 6 से 8 महीनों में पूरी कर ली जाएगी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। इसके साथ ही कर्मबंधु कर्मचारियों के मासिक वेतन में बढ़ोतरी, एससी-एसटी छात्रों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाने और अविवाहित छात्राओं की उच्च शिक्षा के लिए ‘भगिनी निवेदिता’ योजना शुरू करने का ऐलान किया गया। सरकार के इन फैसलों को युवाओं, छात्रों और कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
14,454 खाली पदों पर होगी भर्ती
राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में खाली पड़े 14,454 पदों पर भर्ती करने का फैसला लिया है। सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में इन नियुक्तियों को मंजूरी दी गई। सरकार के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया को जल्द शुरू कर अगले 6 से 8 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी नौकरी के अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि रोजगार को लेकर युवाओं की काफी उम्मीदें हैं। सरकार का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। संबंधित विभागों को नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इन भर्तियों के जरिए राज्य के अलग-अलग विभागों में कर्मचारियों की कमी को भी दूर करने की कोशिश होगी।
स्वास्थ्य समेत कई विभागों में होगी नियुक्ति
14,454 पदों पर होने वाली भर्ती में कई महत्वपूर्ण विभागों को शामिल किया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में भी बड़ी संख्या में नियुक्तियां किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा वन विभाग में भी खाली पदों को भरा जाएगा। फायर एंड इमरजेंसी डिपार्टमेंट और करेक्शनल होम डिपार्टमेंट में भी भर्ती की जाएगी। इन पदों के लिए पीएससी समेत संबंधित विभागों की ओर से परीक्षा आयोजित की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया में संबंधित विभागों की जरूरत और पदों के अनुसार चयन किया जाएगा। सरकार का कहना है कि पारदर्शी तरीके से भर्ती प्रक्रिया पूरी करने पर जोर रहेगा। इससे सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने में मदद मिलेगी।
इस वित्त वर्ष में 1 लाख नौकरियों का दावा
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में रोजगार को लेकर सरकार की बड़ी योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा वित्त वर्ष में राज्य में करीब 1 लाख नौकरियां दी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के कार्यकाल में रोजगार की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच रोजगार को लेकर काफी उम्मीदें हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, पिछली सरकार के समय ओबीसी से जुड़ी जटिलताओं के कारण भर्ती प्रक्रिया में परेशानी आई थी। अब उनकी सरकार का दावा है कि इन जटिलताओं को दूर कर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीएससी अब नियमित रूप से परीक्षाएं आयोजित कर रहा है। साथ ही एसएससी भी धीरे-धीरे अपनी भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है।
कर्मबंधु कर्मचारियों का वेतन बढ़ा
कैबिनेट बैठक में राज्य के कर्मबंधु कर्मचारियों को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने कर्मबंधु योजना के तहत काम करने वाले कर्मचारियों के मासिक वेतन में बढ़ोतरी की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि अक्टूबर महीने से कर्मबंधु कर्मचारियों को हर महीने 8 हजार रुपये वेतन दिया जाएगा। इस फैसले से योजना के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। वेतन में बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों की मासिक आय में सुधार होगा। कैबिनेट के इस फैसले को राज्य सरकार के कल्याणकारी कदमों में से एक माना जा रहा है।
एससी-एसटी छात्रों के लिए बढ़ी आर्थिक सहायता
राज्य सरकार ने छात्रावासों में रहकर पढ़ाई करने वाले एससी और एसटी वर्ग के छात्रों के लिए भी सहायता राशि बढ़ाने का फैसला लिया है। इन छात्रों को भोजन के लिए अब हर महीने 3,300 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इससे पहले छात्रों को हर महीने 1,800 रुपये दिए जाते थे। यानी सरकार ने भोजन के लिए मिलने वाली मासिक सहायता में 1,500 रुपये की बढ़ोतरी की है। सरकार के इस फैसले से छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्रों के लिए यह सहायता महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य छात्रों की पढ़ाई के दौरान भोजन और अन्य जरूरी खर्चों का बोझ कम करना है। नई सहायता राशि के लागू होने से छात्रों को पहले की तुलना में ज्यादा आर्थिक मदद मिलेगी।
‘भगिनी निवेदिता’ योजना की घोषणा
अविवाहित छात्राओं को स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से नई योजना की घोषणा की गई है। इस योजना का नाम ‘भगिनी निवेदिता’ रखा गया है। बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में अविवाहित छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता देने का वादा किया था। अब सरकार ने इस योजना को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। योजना के तहत छात्राओं को स्नातक की पढ़ाई के दौरान हर वर्ष आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्राओं को उच्च शिक्षा जारी रखने में आर्थिक मदद देना है। इससे उन छात्राओं को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें आर्थिक कारणों से पढ़ाई जारी रखने में परेशानी होती है। योजना की पहली किस्त अगले वर्ष जनवरी में जारी किए जाने की बात कही गई है।
तीन साल में छात्राओं को मिलेंगे 50 हजार रुपये
‘भगिनी निवेदिता’ योजना के तहत छात्राओं को तीन वर्षों में कुल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। स्नातक के पहले वर्ष में छात्राओं को 17 हजार रुपये दिए जाएंगे। दूसरे वर्ष में भी उन्हें 17 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। वहीं तीसरे वर्ष में छात्राओं को 16 हजार रुपये दिए जाएंगे। इस तरह तीन साल में कुल 50 हजार रुपये छात्राओं के खाते में दिए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, योजना की पहली किस्त अगले वर्ष जनवरी में दी जाएगी। आर्थिक सहायता मिलने से छात्राओं को कॉलेज की पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और उनकी पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक सहयोग देना है।