बर्धमान : पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर और बर्धमान क्षेत्र में बिना अपने अस्पताल और जरूरी बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के संचालित हो रहे एक निजी मेडिकल कॉलेज पर राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने उल्लास इलाके के एक निजी अस्पताल के साथ टाई-अप के आधार पर चल रहे इस मेडिकल कॉलेज में नए छात्रों के प्रवेश (एडमिशन) पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी इस आदेश के बाद कॉलेज प्रबंधन में हड़कंप मच गया है, वहीं वहां पढ़ रहे मेडिकल छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने खुद किया था निरीक्षण, टाई-अप टूटने के बाद लिया बड़ा एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने खुद इस निजी मेडिकल कॉलेज का दौरा किया था। जांच के दौरान पता चला कि जिस निजी अस्पताल के साथ कॉलेज का अनुबंध (टाई-अप) था, उसने ईमेल भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि उनका इस मेडिकल कॉलेज से अब कोई संबंध नहीं है।कार्रवाई की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट कहा:"मेरे पास पहले ही शिकायत आई थी। मैंने खुद जाकर कॉलेज का दौरा किया था। जिस अस्पताल से इनका टाई-अप था, उन्होंने ईमेल कर बताया कि उनका इस कॉलेज से कोई लेना-देना नहीं है। किराए के अस्पताल के भरोसे कोई मेडिकल कॉलेज नहीं चलाया जा सकता। इसीलिए फिलहाल नए दाखिलों पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया है।"
'फर्जी डॉक्टर' शेख सायदुल हक पढ़ा रहा था छात्रों को, जांच में हुआ पर्दाफाश
इस मेडिकल कॉलेज का विवादों से पुराना नाता रहा है। हाल ही में चार साल के बच्चे अरण्य राय की मौत की जांच के दौरान सामने आया था कि शेख सायदुल हक नाम का व्यक्ति इस निजी मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में कार्यरत था।जांच में फर्जी डॉक्टर साबित होने के बाद कॉलेज के प्राचार्य अमिताभ पाल ने माना था कि सायदुल वहां सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर था और छात्रों को अस्पताल ले जाने की जिम्मेदारी निभाता था। कॉलेज प्रबंधन अब नवाबहाट इलाके के एक अन्य निजी अस्पताल से टाई-अप की बात कर रहा है, लेकिन अभी तक कुछ भी आधिकारिक नहीं हुआ है।
कॉलेज प्रबंधन ने साधी चुप्पी, बयानों में दिखे विरोधाभास
स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा और एडमिशन पर रोक के बाद कॉलेज प्रशासन कुछ भी साफ बोलने से बच रहा है। कॉलेज के प्राचार्य अमिताभ पाल से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने व्यस्तता का हवाला दिया और बाद में फोन उठाना बंद कर दिया।दूसरी ओर, संस्था के सीईओ (CEO) सुभाष चंद्र नस्कर ने कहा कि उन्हें अभी तक स्वास्थ्य विभाग से कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन या ईमेल प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
अगस्त से नहीं हुई क्लिनिकल क्लास, छात्रों और अभिभावकों में भारी चिंता
स्वास्थ्य मंत्री के इस फैसले के बाद मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों के भविष्य पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है। कॉलेज के एक छात्र ने बताया कि अगस्त के पहले सप्ताह में उन्हें आखिरी बार उल्लास इलाके के निजी अस्पताल ले जाया गया था, जिसके बाद से कोई व्यवहारिक या क्लिनिकल क्लास नहीं हुई है। अस्पताल और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर न होने के कारण छात्र बेहद डरे हुए हैं और उन्होंने अपने परिजनों को स्थिति की जानकारी दे दी है।