कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस ने एक आरटीआई के जवाब में मिले आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया है कि राज्य में पिछले पांच महीनों के दौरान 600 हत्या और 2,454 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए हैं। कालीघाट टीएमसी ने इन आंकड़ों को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए विधानसभा का आपातकालीन सत्र बुलाने की मांग की है। पार्टी ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से सदन में कानून-व्यवस्था पर जवाब देने की भी मांग की है। हालांकि, बीजेपी ने टीएमसी के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि इन आंकड़ों में पुराने मामलों की एफआईआर भी शामिल हैं, जो अब दर्ज की जा रही हैं।
कुणाल घोष ने विधानसभा के बाहर पेश किए आंकड़े
कालीघाट टीएमसी के वरिष्ठ प्रवक्ता कुणाल घोष ने विधानसभा परिसर के बाहर आरटीआई के जवाब में मिले आंकड़ों का हवाला देते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। कुणाल घोष के मुताबिक, मई से सितंबर के बीच 600 हत्या के मामले दर्ज हुए। उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार मई में 125, जून में 134, जुलाई में 133, अगस्त में 111 और सितंबर में 97 हत्याएं दर्ज की गईं। टीएमसी नेता ने दावा किया कि इसी अवधि में दुष्कर्म के 2,454 मामले दर्ज हुए। इसके अलावा हत्या के प्रयास के 13,114 और गंभीर रूप से चोट पहुंचाने के 32,341 मामले भी सामने आए। इन आंकड़ों के आधार पर टीएमसी ने बीजेपी सरकार की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है।
अभिषेक बनर्जी ने बताया ‘डबल इंजन आपदा’
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर इन आंकड़ों को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आंकड़ों का औसत निकालते हुए दावा किया कि राज्य में हर दिन करीब 16 दुष्कर्म, चार हत्याएं, 87 हत्या के प्रयास और 216 गंभीर चोट के मामले दर्ज हो रहे हैं। अभिषेक बनर्जी ने इसे ‘डबल इंजन आपदा’ बताते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। कुणाल घोष ने मांग की कि इन आंकड़ों पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री, पुलिस मंत्री और राज्यपाल से भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
बीजेपी का पलटवार- ‘ये नए अपराध नहीं, पुराने मामलों की एफआईआर हैं’
टीएमसी के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है। राज्य बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता देवजीत सरकार ने दावा किया कि आरटीआई के आंकड़ों को केवल एफआईआर दर्ज होने की तारीख के आधार पर नहीं देखा जा सकता। बीजेपी का कहना है कि टीएमसी शासन के दौरान कई मामलों में शिकायत या एफआईआर दर्ज नहीं की जाती थी। सत्ता परिवर्तन के बाद पुराने मामलों में शिकायतें दर्ज होने और कानूनी प्रक्रिया शुरू होने के कारण मौजूदा आंकड़ों में उन घटनाओं का भी शामिल होना संभव है। देवजीत सरकार ने आरोप लगाया कि इन आंकड़ों को बीजेपी सरकार के पांच महीनों में हुए अपराध के रूप में पेश करना भ्रामक है। उन्होंने कहा कि कई पुराने मामलों में अब पीड़ितों को एफआईआर दर्ज कराने का अवसर मिल रहा है। बीजेपी प्रवक्ता ने टीएमसी शासन के दौरान सामने आए कुछ चर्चित मामलों का जिक्र करते हुए तत्कालीन सरकार की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
टीएमसी के वकील ने भी पुराने मामलों का किया जिक्र
मामले में कानूनी पक्ष भी सामने आया है। टीएमसी के अधिवक्ता अर्क नाग ने स्वीकार किया कि 9 मई के बाद दर्ज की जा रही कुछ शिकायतें कई वर्ष पुरानी घटनाओं से जुड़ी हैं। उनके मुताबिक, इनमें 2016, 2018, 2019 और 2021 की कथित घटनाएं भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी घटनाओं को लेकर शिकायत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज की जा रही है और कुछ मामलों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं। हालांकि, उनके मुताबिक कई आरोपियों को बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। यह पहलू बीजेपी के उस तर्क को भी बल देता है कि मौजूदा अवधि में दर्ज हुई सभी एफआईआर को उसी अवधि में हुई घटनाओं के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
सीपीएम ने टीएमसी और बीजेपी दोनों को घेरा
माकपा केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आरटीआई में शामिल आंकड़ों में कितने पुराने मामले हैं और कितने हालिया घटनाओं से संबंधित हैं, इसकी अलग से जांच जरूरी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि आंकड़े चिंता पैदा करने वाले हैं। सुजन चक्रवर्ती ने टीएमसी और बीजेपी दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में लंबे समय से कानून के शासन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इस पूरे विवाद में अब मुख्य सवाल यही है कि आरटीआई में सामने आए अपराध के आंकड़ों में दर्ज घटनाओं और एफआईआर दर्ज होने की तारीख के बीच कितना अंतर है। इस तथ्य के स्पष्ट होने के बाद ही पिछले पांच महीनों की वास्तविक अपराध स्थिति का सही आकलन किया जा सकेगा।