कोलकाता: कोलकाता प्रेस क्लब में ढाक बजाकर पश्चिम बंगाल दुर्गा पूजा समन्वय समिति का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह संगठन राज्य के दुर्गा पूजा आयोजकों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से बनाया गया है। अभिनेता और विधायक रुद्रनील घोष को समिति का प्रमुख आयोजक बनाया गया है। संगठन की वेबसाइट dpssinfo.cm बताई गई है।
समिति से अब तक 700-800 पूजा कमिटियां जुड़ीं
रुद्रनील घोष ने बताया कि समिति से अब तक करीब 700 से 800 पूजा आयोजक जुड़ चुके हैं और जल्द ही यह संख्या एक हजार के करीब पहुंच सकती है। उन्होंने अन्य पूजा समितियों से भी संगठन से जुड़ने की अपील की। उनका कहना है कि आने वाले समय में राज्य की पूजा को दुनिया भर तक पहुंचाने के लिए प्रयास किया जाएगा और विभिन्न पूजा आयोजनों की लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी।
'बुजुर्ग, दिव्यांग और सेवा करने वाले लोग ही VIP'
रुद्रनील घोष ने पूजा में VIP संस्कृति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके लिए VIP का मतलब अलग है। उन्होंने कहा कि जो माता-पिता उम्र या स्वास्थ्य के कारण आसानी से मंडप तक नहीं पहुंच पाते, दिव्यांग लोग, बुजुर्ग और सामाजिक सेवा में लगे लोग VIP हैं। उनके मुताबिक पूजा में VIP की परिभाषा को व्यापक और मानवीय बनाया जाना चाहिए।
VIP टिकट के नाम पर लेनदेन का विरोध
रुद्रनील घोष ने कहा कि पूजा के नाम पर VIP पास या टिकट के बदले पैसे के लेनदेन की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि VIP टिकट के नाम पर बड़े पैमाने पर पैसे कमाए जाते रहे हैं। समिति की ओर से पूजा आयोजकों से अपील की जाएगी कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और जरूरतमंद लोगों के लिए अलग समय या विशेष व्यवस्था की जाए।
पूजा की अनुमति प्रक्रिया आसान करने की मांग
समिति की ओर से प्रशासन के सामने पूजा आयोजकों के लिए अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने का मुद्दा भी उठाने की बात कही गई। रुद्रनील घोष ने कहा कि पूजा केवल बड़े बजट वाले आयोजकों तक सीमित नहीं है। किसी पूजा का बजट एक करोड़ रुपये हो या एक लाख रुपये, समिति की नजर में सभी पूजा आयोजक समान हैं।
विसर्जन व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन से चर्चा
रुद्रनील घोष ने कहा कि पूजा के बाद विसर्जन की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी न हो और लोगों को प्रतिमाएं देखने का अवसर भी मिले। उन्होंने चंदननगर की विसर्जन व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि ऐसी कोई व्यवस्था प्रस्तावित की जाती है, जिससे यातायात प्रभावित न हो और परंपरा भी बनी रहे, तो उस पर विचार किया जा सकता है।
सरकारी अनुदान और कार्निवल पर भी उठाए सवाल
उन्होंने पिछली सरकार के दौरान पूजा समितियों को मिलने वाले अनुदान और विसर्जन कार्निवल को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकारी सहायता का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है, इस पर भी चर्चा जरूरी है। समिति की ओर से ऐसा विसर्जन आयोजित करने का सुझाव दिया जाएगा, जिसमें पूजा की परंपरा और आम लोगों की सुविधा दोनों का ध्यान रखा जाए।
अजेय संहति ने सरकार और पुराने कामों को लेकर टिप्पणी की
कार्यक्रम के दौरान अजेय संहति ने पश्चिम बंगाल की मौजूदा सरकार और राज्य में लंबित कामों को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार को पिछले समय में हुए नुकसान की भरपाई और लंबित कार्यों को पूरा करने में समय लग रहा है। इस विषय पर उन्होंने लोगों से कुणाल घोष से संपर्क करने की बात भी कही।
इंद्रनील सेन ने कुणाल घोष की टिप्पणी पर जताई आपत्ति
इंद्रनील सेन ने कुणाल घोष की कुछ टिप्पणियों को लेकर कहा कि किसी व्यक्ति को इस तरह छोटा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी मामले में कानूनी सवाल हैं तो उन्हें कानून के माध्यम से साबित किया जाना चाहिए। इंद्रनील सेन ने यह भी कहा कि सार्वजनिक मंचों पर परिवार से जुड़ी व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए।
'धर्म के नाम पर किसी को अपमानित नहीं किया जाना चाहिए'
इंद्रनील सेन ने कहा कि धर्म और आस्था से जुड़े विषयों पर किसी समुदाय या व्यक्ति को अपमानित करने वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने लोगों से ऐसी सोच से बचने की अपील की, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा सभी का कल्याण करें।
राजनीतिक स्टॉल को लेकर भी उठे सवाल
दुर्गा पूजा के दौरान पूजा परिसर या उसके आसपास राजनीतिक स्टॉल और धार्मिक भावनाओं से जुड़े साहित्य की बिक्री को लेकर भी सवाल उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल के सामने उस धर्म या उसकी आस्था का अपमान करने वाली सामग्री बेचना उचित नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने पूजा आयोजकों से अपील की कि पंडालों में ऐसी गतिविधियों से बचा जाए, जिनसे किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हों।
'दुर्गा पूजा का माहौल धार्मिक और सांस्कृतिक बना रहे'
वक्ताओं ने कहा कि पूजा के दौरान किताबों या अन्य सामग्री की बिक्री की जा सकती है, लेकिन ऐसी सामग्री नहीं होनी चाहिए जो किसी धर्म, देवी-देवता या समुदाय को निशाना बनाए। उनका कहना था कि दुर्गा पूजा का आयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक एकजुटता का माध्यम होना चाहिए।
VIP व्यवस्था में बुजुर्गों और दिव्यांगों को प्राथमिकता की अपील
समिति ने पूजा समितियों से अपील की कि VIP व्यवस्था का अर्थ केवल प्रभावशाली या खास लोगों तक सीमित न रखा जाए। बुजुर्ग, दिव्यांग, सामाजिक कार्यकर्ता और जरूरतमंद श्रद्धालुओं को प्राथमिकता देने के लिए अलग व्यवस्था बनाने पर विचार किया जाए। रुद्रनील घोष ने कहा कि इस संबंध में किसी पर व्यवस्था थोपने के बजाय पूजा समितियों से अपील की जाएगी।
कुणाल घोष के बयान पर रुद्रनील घोष की प्रतिक्रिया
कुणाल घोष की ओर से की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर रुद्रनील घोष ने कहा कि कोई व्यक्ति किस भाषा में बात करेगा, यह शिक्षक और छात्र के बीच का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में उन्हें हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं लगती।
समिति का फोकस पूजा आयोजकों को एक मंच पर लाना
नई समिति ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में दुर्गा पूजा आयोजित करने वाले आयोजकों को एक साझा मंच पर लाने का लक्ष्य रखा है। संगठन की ओर से पूजा की अनुमति, VIP व्यवस्था, विसर्जन, लाइव स्ट्रीमिंग और पूजा आयोजकों से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों पर आगे भी चर्चा किए जाने की बात कही गई है।