बालुरघाट: पश्चिम बंगाल में कोडीन युक्त कफ सिरप के कथित अवैध इस्तेमाल और तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बीच दवा कंपनी लेबोरेट फार्मास्युटिकल्स इंडिया लिमिटेड ने राज्य में अपने उत्पाद ‘एस्कफ कफ सिरप’ (Eskuf Cough Syrup) की सप्लाई रोकने का फैसला किया है। खबरों के मुताबिक, दक्षिण दिनाजपुर में करीब 2 लाख कोडीन युक्त कफ सिरप की बोतलें नष्ट किए जाने के बाद कंपनी ने पश्चिम बंगाल में इस उत्पाद की बिक्री नहीं करने और कोलकाता डिपो में मौजूद स्टॉक को वापस मंगाने की जानकारी पुलिस को दी है। दक्षिण दिनाजपुर में हुई इस कार्रवाई को कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के खिलाफ पुलिस अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल पुलिस के मुताबिक, जिले में करीब 2 लाख कोडीन सिरप की बोतलें नष्ट की गईं, जिनकी कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये बताई गई है।
हरिरामपुर केस से शुरू हुई जांच, 2 लाख बोतलें नष्ट
सूत्रों के अनुसार, दक्षिण दिनाजपुर के हरिरामपुर थाने में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान बड़ी मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद किया गया था। मामले में पुलिस ने NDPS Act के तहत कार्रवाई की और जब्त सामग्री को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नष्ट किया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद संबंधित दवा कंपनी से भी सिरप की सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े रिकॉर्ड मांगे गए थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वैध रूप से निर्मित दवा का स्टॉक अवैध नेटवर्क तक कैसे पहुंचा।

कंपनी ने कहा- बंगाल के डीलरों को नहीं होगी आगे सप्लाई
खबरों के मुताबिक, लेबोरेट फार्मास्युटिकल्स ने पुलिस को भेजे पत्र में कहा है कि ‘एस्कफ कफ सिरप’ एक वैध और लाइसेंस प्राप्त दवा है, लेकिन कुछ आपराधिक तत्व इसका गैर-चिकित्सीय इस्तेमाल कर रहे हैं। कंपनी ने कथित तौर पर पश्चिम बंगाल में इस उत्पाद की सीधी बिक्री रोकने की बात कही है। साथ ही, कोलकाता स्थित डिपो में मौजूद एस्कफ सिरप के स्टॉक को वापस मंगाने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी भी दी गई है। कंपनी ने यह भी कहा है कि गिरफ्तार आरोपियों के साथ उसका कोई सीधा व्यावसायिक संबंध नहीं था और वह जांच में अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है।

दवा वैध, लेकिन कथित दुरुपयोग बना पुलिस की चिंता
यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि एस्कफ कफ सिरप की बिक्री पर कंपनी द्वारा पश्चिम बंगाल में सप्लाई रोकना और दवा के अवैध इस्तेमाल पर कार्रवाई अलग-अलग बातें हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी ने इस उत्पाद को राज्य में सप्लाई नहीं करने का फैसला कथित दुरुपयोग और जांच के संदर्भ में लिया है। इसे अपने आप में पूरे देश में दवा पर प्रतिबंध नहीं माना जा सकता। सूत्रों के अनुसार, पुलिस का फोकस अब इस बात पर है कि कोडीन युक्त दवाओं की वैध सप्लाई चेन से उत्पाद अवैध बाजार तक कैसे पहुंचता है और इसके पीछे कौन-कौन से लोग या नेटवर्क सक्रिय हैं।
सीमावर्ती जिलों में कोडीन सिरप की तस्करी पर नजर
पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में कोडीन युक्त कफ सिरप की कथित अवैध तस्करी लंबे समय से पुलिस और नारकोटिक्स एजेंसियों के लिए चुनौती रही है। मालदा, दक्षिण दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में ऐसी गतिविधियों पर विशेष निगरानी की जाती रही है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने हालिया ड्रग डिस्पोजल अभियान के दौरान राज्य में बड़ी मात्रा में जब्त मादक पदार्थों और अवैध ड्रग्स को नष्ट किए जाने की जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार, पिछले चार महीनों में राज्यभर में करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य के अवैध ड्रग्स के निपटान की कार्रवाई की गई।
‘ड्रग-फ्री बंगाल’ अभियान के तहत सख्ती जारी
खबरों के अनुसार, पुलिस और प्रशासन कोडीन युक्त कफ सिरप समेत नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रखने की तैयारी में हैं। जांच एजेंसियां जब्त खेप के स्रोत, सप्लाई चेन और संभावित खरीदारों की जानकारी जुटा रही हैं। एस्कफ की बंगाल में सप्लाई रोकने और कोलकाता डिपो का स्टॉक वापस लेने का कंपनी का फैसला इसी कार्रवाई के बीच सामने आया है। हालांकि, मामले की जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति या संस्था की आपराधिक भूमिका को अंतिम रूप से स्थापित नहीं माना जा सकता।