कोलकाता - पश्चिम बंगाल में किसानों को राहत देने के लिए सरकार की ओर से कई अहम घोषणाएं की गई हैं। पूर्व बर्दवान में शुक्रवार को आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कृषि क्षेत्र से जुड़े कई फैसलों की जानकारी दी। इनमें सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली पर सब्सिडी, धान की सरकारी खरीद और किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाने जैसे ऐलान शामिल हैं।
चार लाख से ज्यादा किसानों को बिजली में राहत
कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले पंपसेट की बिजली लागत कम करने के लिए सरकार ने प्रति यूनिट ₹2 की सब्सिडी देने की घोषणा की है। इसका फायदा राज्य के करीब चार लाख से अधिक किसानों को मिलने की बात कही गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस सहायता से किसानों के बिजली खर्च में सालाना करीब ₹25,000 से ₹30,000 तक की बचत हो सकती है। सरकार पर इस योजना के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने का भी अनुमान है।
धान की पूरी उपज खरीदने का दावा
किसानों की उपज की बिक्री को लेकर भी सरकार ने बड़ा आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, जो किसान अपना धान बेचना चाहते हैं, उनकी पूरी बिकाऊ उपज खरीदने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार ने धान की खरीद के लिए ₹2,700 प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने की बात कही है। इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना और सरकारी खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना बताया गया है।
बिचौलियों की भूमिका खत्म करने पर जोर
धान खरीद के दौरान बिचौलियों या एजेंटों की भूमिका को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख जताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों और सरकारी खरीद व्यवस्था के बीच अनावश्यक मध्यस्थता नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता बनाए रखने की बात भी कही।
PM-KISAN में राज्य की अतिरिक्त मदद
किसानों को आर्थिक सहायता देने के मामले में PM-KISAN का भी जिक्र किया गया। केंद्र सरकार की PM-KISAN योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना ₹6,000 की सहायता मिलती है। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से इसमें ₹3,000 की अतिरिक्त सहायता देने की बात कही गई है। इसके बाद पात्र किसानों को कुल ₹9,000 सालाना मिलने का प्रावधान बताया गया है।
खेती की लागत कम करने की कोशिश
बिजली सब्सिडी और फसल खरीद के लिए तय राशि को कृषि क्षेत्र में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने से जोड़कर देखा जा रहा है। सिंचाई की लागत घटने से खेती का खर्च कम हो सकता है, जबकि सरकारी खरीद के लिए तय राशि किसानों को फसल बेचने के दौरान बेहतर मूल्य का भरोसा दे सकती है।
राज्य के 2026-27 के बजट में कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए भी अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। आधिकारिक बजट दस्तावेज उपलब्ध हैं और कृषि क्षेत्र के लिए योजनागत आवंटन का उल्लेख किया गया है। इन घोषणाओं के जरिए सरकार ने किसानों को बिजली, फसल खरीद और प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता—तीनों मोर्चों पर राहत देने का संदेश दिया है। अब इन योजनाओं के क्रियान्वयन और पात्र किसानों तक वास्तविक लाभ पहुंचने पर नजर रहेगी।